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September 10, 2020
समय की हर अंगड़ाई मेरी मुट्ठी में,
दुनिया की सच्चाई मेरी मुट्ठी में।
आसमान कहता है तू ख़ुद को लेकिन,
है तेरी ऊंचाई मेरी मुट्ठी में।
कभी पारसा ख़ुद को नहीं कहा लेकिन,
है मेरी रुसवाई मेरी मुट्ठी में।
सबके आगे खुलती कहाँ आसानी से,
रहती है तन्हाई मेरी मुट्ठी में।
बहुत बुरा किरदार निभाया हो शायद,
रही सदा अच्छाई मेरी मुट्ठी में।
दुनियादारी नहीं मुझे आती है पर,
दुनिया की चतुराई मेरी मुट्ठी में।
मछली हूँ मैं सही कहा तुमने लेकिन,
सागर की गहराई मेरी मुट्ठी में।
सुरेन्द्र चतुर्वेदी
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