July 9, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं के विरोध में जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन गुरुवार को 20वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बारिश के बीच भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के लिए टेंट लगाने की अनुमति मांगते हुए पुलिस अधिकारियों से हाथ जोड़कर और उनके पैर पकड़कर गुहार लगाई। इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। अभिजीत दीपके ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर वीडियो साझा करते हुए लिखा कि लगातार बारिश के कारण भूख हड़ताल पर बैठे छात्र भीग रहे हैं। उनका कहना था कि प्रदर्शनकारी केवल इतना चाहते हैं कि छात्रों को बारिश से बचाने के लिए अस्थायी टेंट लगाने की अनुमति दी जाए। उन्होंने दावा किया कि इसी मांग को लेकर उन्होंने पुलिस अधिकारियों से बार-बार अनुरोध किया। दीपके ने एक अन्य वीडियो भी साझा किया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि तिरपाल लेकर प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे छात्रों के साथ पुलिस ने बदसलूकी की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महिला प्रदर्शनकारियों को पुरुष पुलिसकर्मियों ने धक्का दिया। हालांकि, इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कॉकरोच जनता पार्टी की प्रमुख मांग केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। संगठन का आरोप है कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आए पेपर लीक और अनियमितताओं के मामलों की नैतिक जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग कर रहे हैं। इस आंदोलन में पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल हैं। वांगचुक 28 जून से आमरण अनशन पर बैठे हैं। बुधवार को उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण किया। चिकित्सकों के अनुसार लगातार 11 दिनों की भूख हड़ताल के दौरान उनका वजन सात किलोग्राम से अधिक घटकर 59.4 किलोग्राम रह गया है। इसके बावजूद उन्होंने अपना आंदोलन जारी रखने की बात कही है। इधर, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के सदस्य और पूर्व जेएनयू छात्र नेता ऋषिकेश की भी भूख हड़ताल के दौरान तबीयत बिगड़ गई। उन्हें सीने में दर्द और हाथ-पैर सुन्न होने की शिकायत के बाद राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकीय सलाह के बाद उन्होंने अपनी 11 दिन की भूख हड़ताल समाप्त कर दी, जबकि संगठन के चार अन्य छात्र अब भी अनशन पर बैठे हुए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत इस वर्ष मई में हुई थी। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके के अनुसार, इसकी प्रेरणा भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी से मिली थी, जिसमें कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना "कॉकरोच" से किए जाने की चर्चा सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से हुई। इसी के बाद 16 मई को अमेरिका में रह रहे अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया के माध्यम से CJP की शुरुआत की और पार्टी के विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाए। इसके बाद 22 मई को संगठन ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर ऑनलाइन अभियान शुरू किया, जिसे सोशल मीडिया पर व्यापक समर्थन मिला। CJP का दावा है कि इस अभियान को आठ लाख से अधिक लोगों ने समर्थन दिया। सोशल मीडिया पर भी CJP ने कम समय में बड़ी पहचान बनाई। संगठन के अनुसार, 10 जून तक इंस्टाग्राम पर उसके 2.27 करोड़ फॉलोअर्स हो गए थे। वर्तमान में यह संख्या लगभग दो लाख कम हुई है, लेकिन फिर भी संगठन का दावा है कि उसके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स प्रमुख राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के आधिकारिक खातों से अधिक हैं। वहीं, एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर CJP के करीब 2.79 लाख फॉलोअर्स हैं। जंतर-मंतर पर जारी यह प्रदर्शन अब केवल NEET पेपर लीक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही जैसे मुद्दों को लेकर भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनता जा रहा है। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
July 9, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। भाजपा के राष्ट्रीय राजनीतिक गलियारों में मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर सुगबुगाहट बढ़ी है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक सरकार या भाजपा नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। ऐसे में राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि सत्र से पहले यदि मंत्रिमंडल में बदलाव होता है, तो सरकार नए सिरे से राजनीतिक और प्रशासनिक संतुलन साधने का प्रयास कर सकती है। पहले यह संकेत मिल रहे थे कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में बदलाव मानसून सत्र के बाद 15 अगस्त तक भी संभव नहीं है। लेकिन बीते दिनों राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बातचीत के दौरान फिर से यह चर्चा सामने आई कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संसद सत्र से पहले ही मंत्रिमंडल में बदलाव कर सकते हैं। चर्चा इस बात की भी है कि संभावित फेरबदल में नए और युवा चेहरों को अवसर दिया जा सकता है। मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलों के बीच 2021 का उदाहरण भी राजनीतिक गलियारों में याद किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में 7 जुलाई 2021 को बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल किया था। उस समय 43 मंत्रियों ने शपथ ली थी, जिनमें 36 नए चेहरे शामिल थे और कई प्रमुख मंत्रियों को पद से हटाया गया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2021 की तरह यदि इस बार भी सत्र से पहले फेरबदल होता है, तो इसका उद्देश्य शासन-प्रशासन में नई ऊर्जा लाना, क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधना तथा आगामी राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाना हो सकता है। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 11 जुलाई तक विदेश यात्रा कार्यक्रम और 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद सत्र को देखते हुए फेरबदल की समयसीमा को लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि यदि फेरबदल होना है, तो संसद सत्र से पहले सीमित समय में फैसला लिया जा सकता है। वहीं कुछ का मानना है कि सत्र के बाद भी बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस बार संभावित बदलाव को लेकर भाजपा के भीतर युवा नेतृत्व, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और सहयोगी दलों की भूमिका पर भी चर्चा है। एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल में राजनीतिक समीकरण पहले की तुलना में अधिक व्यापक हैं, इसलिए किसी भी बदलाव में सहयोगी दलों और राज्यों के प्रतिनिधित्व को भी महत्व दिया जा सकता है। फिलहाल मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर केवल राजनीतिक चर्चा और संकेत सामने आ रहे हैं। अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर ही होगा। आधिकारिक घोषणा होने तक इसे संभावित राजनीतिक गतिविधि के रूप में ही देखा जा रहा है।
July 7, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले को लेकर बड़ा बयान दिया है। गहलोत ने इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने मौजूदा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग कर नया ट्रस्ट बनाने की भी मांग उठाई है। दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान अशोक गहलोत ने कहा कि चढ़ावा चोरी जैसा मामला अत्यंत गंभीर है और इससे श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच कराई जानी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सुझाव देते हुए कहा कि वे नया ट्रस्ट बनाएं और स्वयं उसके अध्यक्ष बनें। उन्होंने कहा कि पहले जांच पूरी होनी चाहिए और इसके बाद नया ट्रस्ट गठित किया जाना चाहिए, जिसमें सभी वर्गों और विचारधाराओं के लोगों को शामिल किया जाए। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने आरोप लगाया कि वर्तमान ट्रस्ट में मुख्य रूप से आरएसएस और भाजपा से जुड़े लोगों को स्थान दिया गया, जबकि व्यापक प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि पीवी नरसिम्हा राव के समय की तरह सभी विचारधाराओं के लोगों को साथ लेकर ट्रस्ट बनाया जाता, तो आज ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि राम मंदिर देश के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, इसलिए इससे जुड़े प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या वित्तीय अनियमितता की आशंका को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई जानी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राम मंदिर निर्माण में इस्तेमाल हुए पत्थरों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण के दौरान भरतपुर के बंशी पहाड़पुर क्षेत्र से अवैध खनन के जरिए पत्थर ले जाए गए। उन्होंने कहा कि उस समय भी अवैध खनन को लेकर सवाल उठे थे, लेकिन उन पर पर्याप्त गंभीरता से कार्रवाई नहीं की गई। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि राम मंदिर के नाम पर देशभर के लोगों ने श्रद्धा से दान दिया है। ऐसे में दान, चढ़ावे और ट्रस्ट के कामकाज से जुड़े हर पहलू की पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि जनआस्था और विश्वास से जुड़ा हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने मांग की कि मौजूदा ट्रस्ट को तत्काल भंग किया जाए, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराई जाए और जांच पूरी होने के बाद नया, व्यापक और सर्वसमावेशी ट्रस्ट बनाया जाए। उन्होंने कहा कि नए ट्रस्ट में सभी समाजों, विचारधाराओं और योग्य व्यक्तियों को स्थान दिया जाना चाहिए, ताकि मंदिर प्रबंधन पर लोगों का विश्वास बना रहे।
July 7, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलात मंत्री निर्मला सीतारमण से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों और केंद्र-राज्य समन्वय के मुद्दों पर सार्थक एवं सकारात्मक चर्चा हुई। भेंट के दौरान राजस्थान में विकास परियोजनाओं, आर्थिक प्रगति, वित्तीय सहयोग और केंद्र सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश के समग्र विकास के लिए केंद्र सरकार से मिल रहे सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान को विकसित राज्य बनाने के लक्ष्य के साथ राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय से विकास कार्यों को गति मिलेगी और आमजन को योजनाओं का अधिक प्रभावी लाभ मिलेगा। इस मुलाकात को प्रदेश के विकास, वित्तीय प्रबंधन और केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य सरकार केंद्र के सहयोग से बुनियादी ढांचे, निवेश, रोजगार और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को और गति देने पर जोर दे रही है।
July 7, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के निजी स्टाफ में बड़े स्तर पर फेरबदल के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 3 जुलाई को जारी आदेशों के तहत मंत्री के निजी स्टाफ से जुड़े चार अधिकारियों को हटाया गया या उनके मूल विभाग में वापस भेजा गया है। इस कदम को सामान्य प्रशासनिक फेरबदल से अलग और अहम माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, भूपेंद्र यादव के मुख्य निजी सचिव अमर सिंह को उनके मूल कैडर में वापस भेज दिया गया है। अमर सिंह 2010 बैच के आईआरएस-आईटी अधिकारी हैं। वे लंबे समय से भूपेंद्र यादव के साथ कार्यरत थे। जब भूपेंद्र यादव वर्ष 2021 से 2024 तक श्रम मंत्री रहे, तब भी अमर सिंह उनके निजी सचिव थे। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद यादव के पर्यावरण मंत्री बनने पर उन्हें फिर निजी सचिव नियुक्त किया गया था। इसके अलावा अतिरिक्त निजी सचिव शैलेश कुमार सिंह को समय से पहले उनके मूल विभाग में वापस भेजा गया है। वहीं अतिरिक्त निजी सचिव आयुष सारण और सहायक निजी सचिव सिद्धार्थ यादव की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि इन अधिकारियों को हटाने के पीछे की वजह को लेकर सरकार या विभाग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। एक साथ निजी स्टाफ के कई अधिकारियों को हटाए जाने के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं होने के कारण इस मामले में अभी तक केवल प्रशासनिक आदेशों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के आधार पर ही चर्चा हो रही है। कांग्रेस नेता और राज्यसभा सदस्य जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री के स्टाफ से जुड़े अधिकारियों को हटाए जाने को चौंकाने वाला बताया और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी इस मामले को लेकर X पर पोस्ट किया और कहा कि केंद्रीय मंत्री के स्टाफ में कौन रहेगा और किसे हटाया जाएगा, यह केंद्र सरकार का विशेषाधिकार है, लेकिन इस तरह की कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है। भूपेंद्र यादव राजस्थान के अलवर से सांसद हैं और केंद्र सरकार में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री हैं। इससे पहले वे श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का दायित्व भी संभाल चुके हैं। भाजपा संगठन में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में उनके निजी स्टाफ में अचानक हुए इस बदलाव को लेकर राजनीतिक हलकों में अधिक चर्चा हो रही है। फिलहाल इस मामले में केंद्र सरकार, मंत्रालय या स्वयं भूपेंद्र यादव की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जब तक कारणों को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं आती, तब तक यह मामला प्रशासनिक फेरबदल और राजनीतिक सवालों के बीच चर्चा में बना रहेगा।
July 4, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: राजस्थान की सियासत में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की सक्रियता ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। पिछले कुछ दिनों में प्रदेश के कई मंत्रियों को दिल्ली बुलाए जाने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार, मंत्रियों की परफॉर्मेंस और संगठनात्मक फीडबैक को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व प्रदेश सरकार के कामकाज, मंत्रियों की परफॉर्मेंस और विभागीय प्रगति को लेकर फीडबैक ले रहा है। इसके साथ ही यह भी चर्चा है कि मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल की संभावनाओं को देखते हुए मंत्रियों से उनके कामकाज और उनके खिलाफ आई शिकायतों पर भी जानकारी ली जा रही है। पिछले दो-तीन दिनों में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर जैसे मंत्रियों के दिल्ली दौरे ने इन चर्चाओं को और बल दिया है। हालांकि संबंधित मंत्रियों की ओर से अपने दिल्ली दौरों को अधिकृत कार्यक्रमों से जोड़ा है। भाजपा के 20 विधायक दिल्ली जाकर केंद्रीय नेतृत्व को अपनी भावनाओं से अवगत करा कर आए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले समय में व्यापक पैमाने पर मंत्रिमंडल में फेरबदल होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा कुछ मंत्रियों को बुलाकर विस्तार से चर्चा से यह होता है कि अब राजस्थान में बदलाव की संभावनाएं अधिक नजर आ रही है। मंत्रियों के कामकाज और विधायकों के प्रति व्यवहार और बयान बाजी से भी केंद्रीय नेतृत्व चिंतित है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति वाले विकसित भारत ग्राम योजना कार्यक्रम में शामिल होने का उल्लेख किया। वहीं शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में भाग लेने की जानकारी दी। चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर भी हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले थे। इसके बाद शुक्रवार को डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की अमित शाह से मुलाकात ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दी। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि केंद्रीय नेतृत्व मंत्रियों से उनके विभागों की प्रगति, योजनाओं के क्रियान्वयन, जनसंपर्क और संगठन के साथ तालमेल को लेकर फीडबैक ले रहा है। वहीं स्थानीय स्तर पर कुछ आलोचक यह भी कह रहे हैं कि जिन मंत्रियों को लेकर शिकायतें अधिक हैं, उन्हें पहले दौर में दिल्ली बुलाया जा रहा है। हालांकि इस बारे में आधिकारिक रूप से कोई पुष्टि नहीं की गई है। बीते करीब एक साल से राजस्थान में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर समय-समय पर चर्चाएं चलती रही हैं। हालांकि अब तक इस दिशा में कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व पहले भी प्रदेशों के मंत्रियों और नेताओं को बुलाकर फीडबैक लेने की रणनीति अपनाता रहा है। ऐसे में मौजूदा बैठकों को संगठनात्मक समीक्षा और शासन के आकलन की प्रक्रिया के रूप में भी देखा जा रहा है। फिलहाल राजस्थान के मंत्रियों के दिल्ली दौरों ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह कवायद केवल नियमित फीडबैक प्रक्रिया है या मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक फेरबदल की दिशा में कोई बड़ा संकेत।
July 4, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 3 जुलाई को अपने पिता डॉ. नारायण लाल नड्डा के 101वें जन्मदिवस के अवसर पर उनके साथ स्नेहिल क्षण बिताए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर को भावनात्मक और प्रेरणादायी बताते हुए उन्होंने पिता के प्रति अपनी श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त की। जेपी नड्डा ने कहा कि पिता का स्नेह और मार्गदर्शन जीवन की सबसे अनमोल पूंजी होती है। उन्होंने कहा कि उनके पिता द्वारा दिए गए संस्कार, आदर्श और आशीर्वाद ही उनके जीवन की वास्तविक शक्ति और सबसे बड़ी निधि हैं। उन्होंने कहा कि पिता के साथ बिताया गया प्रत्येक क्षण उनके लिए प्रेरणा, ऊर्जा और भावनात्मक संबल का स्रोत है। जीवन के हर चरण में माता-पिता का आशीर्वाद व्यक्ति को सही दिशा देता है और कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने ईश्वर से अपने पूज्य पिताश्री डॉ. नारायण लाल नड्डा के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। उन्होंने प्रार्थना की कि उनका स्नेहिल आशीर्वाद सदैव परिवार और सभी शुभचिंतकों पर बना रहे।
July 4, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: अजमेर, 4 जुलाई । राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने त्रिपुरा प्रवास के दौरान आज शनिवार को त्रिपुरा विधानसभा में विधानसभा अध्यक्ष श्री राम पादा जमातिया, उपाध्यक्ष श्री राम प्रसाद पाल तथा सरकार के मुख्य सचेतक श्रीमती कल्याणी साहा रॉय से शिष्टाचार भेंट कर संसदीय परंपराओं, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा दोनों राज्यों के मध्य आपसी सहयोग के विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा की। बैठक के दौरान श्री देवनानी ने राजस्थान विधानसभा के गौरवशाली संसदीय इतिहास, नवाचारों एवं जनहित आधारित विधायी कार्यप्रणाली की जानकारी साझा की। उन्होंने राजस्थान विधानसभा में किए गए विभिन्न नवाचारों एवं जनोन्मुखी पहलों की भी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि विभिन्न विधानसभाओं के बीच संवाद, अनुभवों का आदान-प्रदान तथा श्रेष्ठ संसदीय परंपराओं का साझा होना लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। त्रिपुरा विधानसभा अध्यक्ष श्री राम पादा जमातिया ने श्री देवनानी का स्वागत करते हुए दोनों विधानसभाओं के बीच निरंतर सहयोग और अनुभवों के आदान-प्रदान को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उपयोगी बताया ।इस अवसर पर उपाध्यक्ष श्री राम प्रसाद पाल एवं मुख्य सचेतक श्रीमती कल्याणी साहा रॉय ने भी संसदीय कार्यों से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। शिष्टाचार भेंट सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई। सभी जनप्रतिनिधियों ने लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने तथा राज्यों के मध्य संसदीय सहयोग को और अधिक प्रगाढ़ बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने त्रिपुरा प्रवास के दौरान त्रिपुरा सुंदरी मंदिर के किये दर्शन राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने त्रिपुरा प्रवास के दौरान गोमती जिले स्थित त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में त्रिपुरा सुंदरी के दर्शन एवं विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। स्पीकर श्री देवनानी ने माँ जगदंबा के श्रीचरणों में राष्ट्र की सुख-समृद्धि, जनकल्याण, शांति एवं निरंतर प्रगति की कामना की। श्री देवनानी ने कहा कि माँ त्रिपुरासुंदरी की असीम कृपा से प्रत्येक नागरिक के जीवन में सुख, शांति, शक्ति और समृद्धि का वास हो तथा भारत निरंतर विकास और वैभव के पथ पर अग्रसर रहे। इस दौरान श्री देवनानी ने मंदिर की दिव्य एवं आध्यात्मिक गरिमा का अनुभव करते हुए माँ के प्रति अपनी श्रद्धा और आस्था व्यक्त की।
July 3, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: अजमेर, 3 जुलाई। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने लोकसभा सचिवालय के पार्लियामेंटरी रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसीज़ (PRIDE) तथा पश्चिम बंगाल विधानसभा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नवनिर्वाचित विधायकों के राष्ट्रीय प्रबोधन कार्यक्रम में संसदीय व्यवस्था में वित्तीय कार्य और बजटीय प्रक्रिया विषय पर अध्यक्षीय उदबोधन देते हुए कहा कि लोकधन पर विधायिका का प्रभावी नियंत्रण ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि जनता के विश्वास, पारदर्शिता, जवाबदेही और लोककल्याण का संवैधानिक संकल्प है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने कार्यपालिका पर विधायिका का वित्तीय नियंत्रण सुनिश्चित करते हुए ऎसी व्यवस्था विकसित की है कि जनता की गाढ़ी कमाई का एक-एक रुपया सदन की अनुमति के बिना न तो व्यय किया जा सकता है और न ही जनता पर कोई नया कर लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनप्रतिनिधि का दायित्व है कि वह बजटीय प्रक्रिया, अनुदान मांगों, विनियोग विधेयक, वित्त विधेयक तथा संचित निधि, आकस्मिकता निधि और लोक लेखा जैसी संवैधानिक व्यवस्थाओं की गहन समझ विकसित करे। श्री देवनानी ने कहा कि बजट पर होने वाली चर्चा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मंच नहीं, बल्कि राज्य के आर्थिक विकास और जनकल्याण की दिशा तय करने वाला गंभीर लोकतांत्रिक विमर्श होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभाग सम्बद्ध स्थायी समितियां कार्यपालिका की वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने उन राज्यों में भी ऎसी समितियों के गठन की आवश्यकता पर बल दिया, जहां अभी तक यह व्यवस्था लागू नहीं है। उन्होंने कहा कि इन समितियों के माध्यम से बजटीय प्रावधानों की गहन समीक्षा होगी, लोकधन के उपयोग पर प्रभावी निगरानी बढ़ेगी तथा बिना पर्याप्त चर्चा के बजट पारित होने जैसी प्रवृत्तियों पर रोक लगेगी। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने राजस्थान विधानसभा की परंपराओं और नवाचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान में बजट पर सामान्य चर्चा और अनुदान मांगों पर पर्याप्त समय दिया जाता है तथा पहली बार निर्वाचित होकर आए सदस्यों को भी व्यापक भागीदारी का अवसर उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने बताया कि जनलेखा समिति, प्राक्कलन समिति तथा राजकीय उपक्रम समिति जैसी समितियां सार्वजनिक धन के उपयोग की गहन समीक्षा करती हैं। साथ ही विधानसभा सचिवालय की शोध एवं संदर्भ शाखा सदस्यों को बजटीय विषयों पर तथ्यात्मक अध्ययन सामग्री, सांख्यिकीय विश्लेषण और संदर्भ सामग्री उपलब्ध कराकर गुणवत्तापूर्ण बहस में सहयोग प्रदान करती है। उन्होंने विधान मंडलों की वित्तीय स्वायत्तता का विषय प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि जब कार्यपालिका विधायिका के प्रति जवाबदेह है, तब विधानसभाओं की वित्तीय आवश्यकताओं के लिए कार्यपालिका पर निर्भर रहना शक्ति पृथक्करण की संवैधानिक भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि राजस्थान विधानसभा इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है तथा वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष को वर्षभर में 50 लाख रुपये तक के विकास एवं प्रशासनिक कार्य पूर्व स्वीकृति के बिना कराने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि देश के सभी विधान मंडलों को स्वतंत्र वित्तीय अधिकार और अपना स्वायत्त बजट मिलना चाहिए, जिससे वे पूर्ण स्वतंत्रता के साथ अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें। श्री देवनानी ने संसद और राज्य विधान मंडलों की व्यवस्थाओं की तुलना करते हुए कहा कि संसद के बजटीय प्रस्तावों को सम्मानपूर्वक मुख्य बजट का हिस्सा बनाया जाता है, जबकि अनेक राज्यों में विधानसभाओं के बजटीय प्रस्तावों में कार्यपालिका द्वारा कटौती कर दी जाती है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता की दृष्टि से गंभीर विषय बताते हुए इस दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक विमर्श और आवश्यक सुधारों की आवश्यकता जताई। उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित लोकसभा सचिवालय के पूर्व संयुक्त सचिव श्री विनय मोहन के संसदीय अनुभव का उल्लेख करते हुए नवनिर्वाचित विधायकों से संवाद सत्र का अधिकतम लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि संसदीय प्रक्रियाओं, वित्तीय नियमों और कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित करने के व्यावहारिक उपायों की समझ प्रभावी जनप्रतिनिधित्व की आधारशिला है। श्री देवनानी ने नवनिर्वाचित विधायकों का आह्वान किया कि वे बजट के आंकड़ों के पीछे निहित जनकल्याण के उद्देश्यों को समझें, अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से सदन में उठाएं तथा वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के माध्यम से लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक सशक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
July 3, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: जोधपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई को जोधपुर पहुंचकर शहर के बहुप्रतीक्षित नए एयरपोर्ट टर्मिनल का लोकार्पण करेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री सुबह विशेष विमान से एयरफोर्स स्टेशन पहुंचेंगे और वहां से नए टर्मिनल भवन तक जाएंगे। एयरपोर्ट परिसर में आयोजित कार्यक्रम में वे एलईडी स्क्रीन के माध्यम से रिमोट से बटन दबाकर नए एयरपोर्ट टर्मिनल का लोकार्पण करेंगे। इसी दौरान क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना ‘उड़ान-2’ का भी शुभारंभ किया जाएगा। लोकार्पण समारोह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हेलिकॉप्टर से बालोतरा जिले के पचपदरा स्थित एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी के कार्यक्रम के लिए रवाना होंगे। प्रधानमंत्री की यात्रा को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। गुरुवार को सुरक्षा एजेंसियों ने एयरपोर्ट परिसर और आसपास के क्षेत्र को अपने नियंत्रण में लेकर सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की। विशेष दस्तों ने डॉग स्क्वायड की सहायता से एयरपोर्ट परिसर, नए टर्मिनल भवन और आसपास के क्षेत्रों में सघन जांच की। प्रधानमंत्री विशेष विमान से एयरफोर्स स्टेशन पहुंचेंगे। इसके बाद वे एयरफोर्स एरिया के अंदर से ही सड़क मार्ग द्वारा नए टर्मिनल भवन के डिपार्चर गेट तक आएंगे। लाउंज एरिया में लोकार्पण समारोह आयोजित होगा। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों से संक्षिप्त मुलाकात भी कर सकते हैं। पूरा कार्यक्रम करीब 22 मिनट का बताया जा रहा है। इसके बाद प्रधानमंत्री नए टर्मिनल के अराइवल गेट से बाहर निकलकर हेलिकॉप्टर से पचपदरा के लिए प्रस्थान करेंगे। जोधपुर एयरपोर्ट का नया टर्मिनल भवन करीब तीन वर्ष में तैयार हुआ है। इसके निर्माण पर लगभग 400 करोड़ रुपए की लागत आई है। यह भवन पुराने टर्मिनल की तुलना में लगभग छह गुना बड़ा है और इसमें यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। नए टर्मिनल की सबसे बड़ी विशेषता छह एयरोब्रिज हैं। पश्चिमी राजस्थान के किसी भी एयरपोर्ट पर पहली बार इस प्रकार की सुविधा विकसित की गई है। इसके अलावा आधुनिक चेक-इन काउंटर, उन्नत सुरक्षा जांच व्यवस्था, स्वचालित बैगेज सिस्टम, विस्तृत प्रतीक्षालय और यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। नए टर्मिनल के एप्रन पर एक साथ 12 से अधिक विमानों की पार्किंग की व्यवस्था होगी। वर्तमान टर्मिनल पर केवल तीन से चार विमानों को ही खड़ा किया जा सकता है। ऐसे में नए टर्मिनल से भविष्य में उड़ानों की संख्या बढ़ाने और पश्चिमी राजस्थान की हवाई कनेक्टिविटी मजबूत करने में मदद मिलेगी। लोकार्पण के बाद तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी होने पर एयरलाइंस और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के कार्यालयों को चरणबद्ध तरीके से नए टर्मिनल में स्थानांतरित किया जाएगा। इसके बाद वाणिज्यिक उड़ानों का संचालन भी नए टर्मिनल से शुरू किया जाएगा। माना जा रहा है कि नया टर्मिनल एक महीने के भीतर ऑपरेशनल हो सकता है। प्रधानमंत्री के दौरे से पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी दो दिवसीय यात्रा पर शुक्रवार कोजोधपुर पहुंचेंगे प्रधानमंत्री के दौरे से पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी दो दिवसीय यात्रा पर जोधपुर पहुंचेंगे। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री शुक्रवार दोपहर 12.45 बजे जोधपुर हवाई अड्डे पहुंचेंगे। वे नए एयरपोर्ट पर प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण करेंगे और इसके बाद हेलिकॉप्टर से पचपदरा जाएंगे। पचपदरा में मुख्यमंत्री एचपीसीएल के नए फ्लैगशिप रिटेल आउटलेट का उद्घाटन करेंगे और पौधरोपण कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके बाद वे रिफाइनरी का निरीक्षण कर बैठक लेंगे। शाम को वे जोधपुर लौटेंगे और रात्रि विश्राम सर्किट हाउस में करेंगे। चार जुलाई को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जोधपुर एयरपोर्ट पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य आतिथ्य में नए टर्मिनल के उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे। इसके बाद वे हेलिकॉप्टर से पचपदरा जाएंगे और वहां से लौटकर जोधपुर से जयपुर के लिए रवाना होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे को देखते हुए जोधपुर और पचपदरा दोनों स्थानों पर प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। सुरक्षा, यातायात, कार्यक्रम स्थल, जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति और तकनीकी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
July 3, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने पश्चिम बंगाल प्रवास के दौरान शुक्रवार को कोलकाता स्थित प्रसिद्ध और प्राचीन कालीघाट मंदिर में माँ काली के दर्शन किए। उन्होंने मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर राष्ट्र और प्रदेश की सुख-शांति, समृद्धि तथा उज्ज्वल भविष्य की कामना की। दर्शन-पूजन के अवसर पर देवनानी ने कहा कि माँ काली की कृपा सभी के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, साहस, सद्बुद्धि और लोककल्याण की भावना का संचार करे। उन्होंने प्रदेशवासियों के सुखी, समृद्ध और शांतिपूर्ण जीवन की प्रार्थना की। विधानसभा अध्यक्ष ने कालीघाट मंदिर की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि भारत के प्राचीन तीर्थस्थल हमारी सनातन संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक विरासत के जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे पवित्र स्थलों के दर्शन से आत्मिक शांति और नई ऊर्जा का अनुभव होता है। देवनानी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में तीर्थस्थलों का विशेष महत्व है। ये स्थल समाज को आस्था, सेवा, संयम और लोककल्याण के मार्ग पर प्रेरित करते हैं। कालीघाट मंदिर जैसे ऐतिहासिक धार्मिक स्थल देश की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करते हैं।
July 3, 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। देश में अरबों रुपए की लागत से बन रहे एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता पर पहली बरसात ने ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई स्थानों से नए बने या हाल ही में शुरू हुए एक्सप्रेसवे, हाईवे, पुलों और सड़कों के क्षतिग्रस्त होने, धंसने और गड्ढे बनने की तस्वीरें सामने आ रही हैं। इन घटनाओं ने सड़क निर्माण में गुणवत्ता, निगरानी और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2017 में संसद में कहा था कि सड़क निर्माण में स्पेस टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा है और सैटेलाइट आधारित फोटोग्राफी व मॉनिटरिंग से कार्यों की निगरानी होती है। वहीं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी भारत में विश्वस्तरीय सड़क नेटवर्क विकसित करने की बात कही थी। ऐसे में यदि पहली या शुरुआती बरसात में ही बड़े राजमार्ग और एक्सप्रेसवे क्षतिग्रस्त होते हैं, तो यह केवल तकनीकी खामी नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था की विफलता का भी संकेत माना जा रहा है। हाल के दिनों में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, सूरत, रीवा-सतना हाईवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे जैसे मार्गों से सड़क धंसने, गड्ढे बनने या निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने की खबरें और वीडियो सामने आए हैं। कई स्थानों पर पुलों के एक्सपेंशन जॉइंट, सड़क की सतह और ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं। इन दावों और घटनाओं की तकनीकी जांच कर वास्तविक कारणों को सार्वजनिक किया जाना आवश्यक है। सबसे गंभीर चिंता यह है कि एक्सप्रेसवे और हाईवे पर वाहन सामान्य सड़कों की तुलना में कहीं अधिक गति से चलते हैं। ऐसे में सड़क पर अचानक बने गड्ढे, धंसी हुई सतह या पुल के जोड़ में खामी किसी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। सड़क सुरक्षा केवल यातायात नियमों का विषय नहीं है, बल्कि निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव से भी सीधे जुड़ी हुई है। बड़ी सड़क परियोजनाओं के निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से जुड़ी व्यवस्थाओं पर होती है। यदि हजारों करोड़ रुपए की परियोजनाएं शुरुआती बरसात में ही प्रभावित हो रही हैं, तो यह जांच का विषय है कि खामी डिजाइन में है, निर्माण सामग्री में है, ठेकेदार के कार्य में है या निगरानी प्रणाली में। देश में सामान्यतः सड़क टूटने पर स्थानीय इंजीनियरों, अधिकारियों या ठेकेदारों पर कार्रवाई कर दी जाती है। कई बार ठेकेदारों को अस्थायी रूप से ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता है और कुछ अधिकारियों को निलंबित कर मामला शांत कर दिया जाता है। लेकिन बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में केवल निचले स्तर की कार्रवाई पर्याप्त नहीं हो सकती। ऐसी परियोजनाओं में मंजूरी, डिजाइन, सुपरविजन, गुणवत्ता परीक्षण, थर्ड पार्टी ऑडिट और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े सभी स्तरों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। सवाल यह भी है कि यदि सड़कों के निर्माण में आधुनिक तकनीक, सैटेलाइट मॉनिटरिंग, ड्रोन सर्वे, थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन और डिजिटल रिपोर्टिंग का दावा किया जाता है, तो फिर गुणवत्ता की कमियां समय रहते क्यों नहीं पकड़ी जातीं। यदि निगरानी तंत्र मौजूद है, तो वह प्रभावी क्यों नहीं है और यदि प्रभावी है, तो दोषी कौन है—यह स्पष्ट होना चाहिए। सड़क, पुल, एयरपोर्ट और सार्वजनिक भवन जैसे बड़े निर्माण केवल सरकारी उपलब्धियां नहीं होते, बल्कि जनता के पैसों से तैयार राष्ट्रीय संपत्ति होते हैं। इनकी गुणवत्ता से आम नागरिकों की सुरक्षा, समय, अर्थव्यवस्था और भरोसा जुड़ा होता है। इसलिए किसी भी एक्सप्रेसवे या हाईवे के क्षतिग्रस्त होने को केवल बारिश या प्राकृतिक कारणों पर डालकर टाला नहीं जा सकता। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को आमतौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में सक्रिय और परिणामोन्मुख मंत्री के रूप में देखा जाता है। ऐसे में मंत्रालय की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है कि निर्माण गुणवत्ता पर सख्त निगरानी रखी जाए और जहां भी गड़बड़ी हो, वहां पारदर्शी जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। केवल मरम्मत कर देना पर्याप्त नहीं है; जनता यह जानना चाहती है कि पहली बरसात में सड़क क्यों टूटी और किस स्तर पर लापरवाही हुई। डबल इंजन सरकार और तेज विकास के दावों के बीच सड़कों की गुणवत्ता का प्रश्न सीधे शासन की विश्वसनीयता से जुड़ता है। यदि एक्सप्रेसवे और हाईवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स टिकाऊ नहीं हैं, तो विकास मॉडल पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। सरकारों को चाहिए कि सभी हालिया क्षतिग्रस्त सड़क परियोजनाओं का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराया जाए, रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और दोषियों के विरुद्ध समयबद्ध कार्रवाई हो। आखिरकार, सवाल केवल सड़क के गड्ढों का नहीं है। सवाल जनता के धन, यात्रियों की सुरक्षा और सरकारी दावों की विश्वसनीयता का है। अरबों रुपए की परियोजनाएं यदि पहली बरसात में ही जवाब देने लगें, तो यह व्यवस्था से गंभीर आत्ममंथन की मांग करता है।