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February 2, 2018

मेरे प्यार को वो दुनिया में रुसवा करने वाला था

मेरे प्यार को वो दुनिया में रुसवा करने वाला था

January 9, 2018

हर सितम हमने सहां लेकिन ख़ता कुछ भी नहीं,

हर सितम हमने सहां लेकिन ख़ता कुछ भी नहीं,

December 21, 2017

सूफ़ीयाना इश्क : सुरेन्द्र चतुर्वेदी

सूफ़ीयाना इश्क में है दिल फ़कीराना मेरा

December 11, 2017

स्वप्न मेरे : सुरेन्द्र चतुर्वेदी

स्वप्न मेरे उसके काजल में रहते हैं

October 26, 2017

रघु की नीति: सुरेंद्र चतुर्वेदी

रघु की रीति यही चल आयी, वोटन के दिन शक्ल दिखाई। नेताजी रघु शर्मा अचानक अजमेर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते हुए नजर आए तो अजमेरियों का दिमाग बिजली के मीटर जैसा चलने लगा

October 21, 2017

ब्लॉग लेखक मित्तल: सुरेंद्र चतुर्वेदी

वैसे तो अजमेर में ब्लॉग लिखने का एक फैशन ही चल निकला है

October 12, 2017

सचिन का हवाई अड्डा !!! (सुरेन्द्र चतुर्वेदी )

अजमेर के कांग्रेसियों ने किशनगढ़ हवाई अड्डे के लोकार्पण पर किशनगढ़ में आतिशबाजी कर जश्न मनाया। उनका मानना है कि अजमेर एयरपोर्ट के लिए युवा नेता सचिन पायलट का हाथ ज्यादा है। उन्होंने ही यह सपना सबसे पहले देखा था

October 11, 2017

हवाई अड्डा खुल गया !!! (सुरेन्द्र चतुर्वेदी )

        हवाई अड्डा खुल गया।चील गाड़ी उड़ेंगी हवाई अड्डे पर ।अजमेर शहर में एयर बस चलेगी ।जहाँ शहर की तंग गलियों में फायर ब्रिगेड की दमकलें डैम तोड़ देती हैं वहां के लोग हवाई अड्डे हवाई अड्डों में उड़ेंगे । वाह !इलायची  भाई के शहर में हवाई अड्डा खुल गया है ।यह सपना तो कभी खुद ईलायची बाई ने भी नहीं देखा होगा ।ब्रह्मा जी ने जब सृष्टि का निर्माण किया तब उन्होंने कहाँ  कल्पना की थी कि पुष्कर से कुछ ही दूरी पर उनके भक्तों को वायु यान छोड़ने आएंगे। यह तो वाकई कमाल हो गया।  मेरे कई फुकरे दोस्तों ने पहली बार चील गाड़ी का अनुभव प्राप्त करने के लिए पैसे उधार लेने शुरू कर दिए हैं ।देखना चाहते हैं कि अजमेर शहर आसमान से कैसा दिखता है ?पुष्कर में कैसा दिखता है तीर्थराज सरोवर? सावित्री माता का मंदिर या ओंकार सिंह लखावत जी का होटल ?  कैसी दिखती है ख्वाजा साहब की दरगाह और वे सड़कें  जहाँ  ज़रा ज़रा सी देर में जाम लग जाते हैं और स्वेत वेश धारी सिपाही जाम तोड़ने के लिए नीचे तक का जोर लगा देते हैं। रेलवे स्टेशन के बाहर ऑटो वालों से लड़ रहे लोग सब्जी मंडी में आलू गोभी के मोल भाव करते मतदाता या अस्पतालों के सामने बीमारी से जूझ रहे शहरवासी आखिर कैसे दीखते हैं ऊपर से? हवाई जहाज से जयपुर जाते वक्त बहुत कुछ देखने को मिलेगा मार्बल की मंडी जहाँ मार्बल पैदा ही नहीं होता। विधायक भागीरथ चौधरी का बंगला जहां बैठ कर उन्होंने हवाई अड्डा खुलवाने के लिए न जाने कित्ती बार अपनी धोती बंधी और खोली होगी।  मैं तो सच धन्य ही हो गया हूँ।अब  तो बस सरकार से यह गुजारिश है कि हवाई अड्डे तक सिटी बस भी चलवा दे।किशनगढ़ और अजमेर के ठेले वालों को भी वहां रोज़गार दे दे।सांसदों की तरह पार्षदों को भी निशुल्क यात्रा का सुख प्रदान कर दे।पत्रकारों को रोडवेज की तरह फ्री कर द

August 22, 2017

तब तलक़ उसके दर पे जलता हूँ, जब तलक़ वो बुझा नहीं देता

दर्द को आसरा नहीं देता, ज़ख्म लेकिन नया नहीं देता. जो वफ़ा मांग के तो ले जाता, मुझको वापस वफ़ा नहीं देता. डाल दी क़ायनात क़दमों में, फिर भी वो तो दुआ नहीं देता. तोड़ डाला हवाओं ने उसको, जो शजर अब हवा नहीं देता. मैं गुनाहों से दूर हूँ शायद , अब कोई भी सज़ा नहीं देता. जो मेरे घर पे रोज़ आता है, अपने घर का पता नहीं देता. दर्द अब दर्द भी नहीं देते, अब मज़ा भी मज़ा नहीं देता तब तलक़ उसके दर पे जलता हूँ, जब तलक़ वो बुझा नहीं देता.          सुरेन्द्र चतुर्वेदी

May 9, 2017

क़िस्सा ए ग़म सुनाऊँ क्या - सूफी सुरेन्द्र चतुर्वेदी

क़िस्सा ए ग़म सुनाऊँ क्या, लौट के वापस आऊं क्या. हाथ कटा कर हाज़िर हूँ, सर भी अब कटवाऊं क्या.

April 30, 2017

एक ऐसा जहां प्रधानमंत्री चराते हैं बकरी और राष्ट्रपति देते हैं खेतों में पानी

सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लगेगा, लेकिन यह वाकया बिलकुल सच है. आपने शायद ही कभी ऐसा सुना होगी कि प्रधानमंत्री बकरी चराने गए हैं और राष्ट्रपति खेतों में पानी दे रहे हैं. लेकिन आज हम जिस गांव की बात करने जा रहे हैं, वहां ऐसा ही कुछ होता है. बता दें, राजस्थान के बूंदी जिले में पड़ने वाले इस रामनगर गांव में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के अलावा यहां राज्यपाल कंचे खेलते हैं तो एक टूटी बंदूक के लिए कलेक्टर आपस में भिड़े रहते हैं. लेकिन ये सब यहां क्यों और कैसे होता है, यह जानने के बाद आप एक बार हैरत में जरूर पड़ जाएंगे.

April 5, 2017

घर पर ख़ुशी को आए कई रोज़ हो गए

घर पर ख़ुशी को आए,कई रोज़ हो गए , उनसे नज़र मिलाए , कई रोज़ हो गए चेहरा पढ़ा जो माँ का,महसूस हो गया , बच्चों को मुस्कराए , कई रोज़ हो गए . महफ़िल में दोस्तों की ,चलो दिल ने ये कहा , अपनों से चोट खाए ,कई रोज़ हो गए . तू गर है माहताब तो बहार ज़रा निकल , बदली में मुँह छुपाए, कई रोज़ हो गए. ये मयक़दे से सोच कर ,बाहर निकल गये, बिन पीये लडखड़ाए, कई रोज़ हो गए. तूफाँ को कह दिया है, के आए हमारे घर, ताक़त को आज़माए ,कई रोज़ हो गए



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