केकड़ी के अस्पताल को ज़िला अस्पताल बनाकर राज ऋषि रघु शर्मा ने केकड़ी पर ऐसा एहसान किया है जो कि केकड़ी चाहकर भी चांद तारों के रहते भुला नहीं पाएगी। मलाईदार दूध बिल्ली को सौंपकर ...बिल्ली को जिला स्तर पर सम्मानित करवाकर डॉ शर्मा ने वाक़ई मर्द वाला काम किया है।  वैसे भी मर्दों वाला काम करने वालों की केकड़ी में कोई कमी नहीं। नगर पालिका के अध्यक्ष अनिल मित्तल को ही लीजिए। कब से और कितने मर्दों वाले काम किन्नर बनकर कर रहे थे। *हर मर्द लगने वाले किन्नरों के काम बस !किसी तरह केकड़ी को लूट लो !!*

    केकड़ी में वैसे तो दो ही असली वाले मर्द सिद्ध हो पाए हैं ।एक तो ज़िला अस्पताल के *पी.एम.ओ .डॉ गणपत राज पुरी दूसरे अनिल मित्तल।* दोनों ही सत्ता की कृपा से मलाई का सेवन करते रहे हैं ।डॉ गणपत राजपुरी पर राज ऋषि शर्मा का पूरा- पूरा वरद हस्त  है ।इसे आप क्या कहेंगे कि डॉ रघु शर्मा की पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने जिस पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए । टी.वी चैनल पर जिन की कारगुजारीयां चर्चाओं में रहीं।उन्हें महाप्रभु रघु शर्मा ने स्वयं अपने हाथों से सम्मानित किया। इसे पुरी साहब की मर्दानगी ही तो कहेंगे कि उनका कांग्रेस कुछ नहीं बिगाड़ पाई। भ्रष्टाचार और लूट के सभी मामले कांग्रेस के ही मंत्री द्वारा बर्फ़ में लगा  दिए गए। वैसे एक बात तो साफ़ है कि डॉ रघु शर्मा और डॉ पुरी की जीवन शैली और कार्यप्रणाली बिल्कुल एक जैसी है। दोनों ही अपने सिवा किसी की नहीं सुनते। किसी की नहीं मानते। दोनों ही अपने आप को रावतभाटा परमाणु बिजली घर की चलित इकाई मानते हैं । कांग्रेस जिसे एक नंबर का भ्रष्ट अधिकारी बताती है  उन्हें  ब्रह्म देवता अपनी आंख का तारा समझते हैं ।वजह क्या है यह तो डॉ शर्मा और पुरी के बीच की बात है ।दोनों का ही कोई मुक़ाबला नहीं ।काट खाने का भी दोनों को लंबा अनुभव है। डॉ पुरी अपने कर्मचारियों को हड़काते  हैं तो डॉ शर्मा  अपने कार्यकर्ताओं को।दोनों  ही हिटलर और मुसोलिनी के बताए रास्तों पर चलकर कामयाबी के झंडे गाड़ रहे हैं ।
     मुझे बताया गया कि अस्पताल की एक महिला कर्मचारी ने तंग आकर नौकरी छोड़ने का मानस बना लिया है। मैं भी उन्हें सलाह देता हूं कि नौकरी छोड़ दें और रूखी -सूखी खा कर जीवन यापन करें।वरना सत्ता के वरद हस्त प्राप्त अधिकारी किसी को कहीं का नहीं छोड़ते।
     *आस-पास कई किलोमीटर तक जब अस्पताल के कोई कर्मचारी का बच्चा रोता है तो मां कहती है बेटा रो मत!! डॉ .पुरी आ जाएगा ।* जब सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का ।पूरी केकड़ी डॉ पुरी को अस्पताल की दीमक मानती रहे तो क्या जब चिकित्सा मंत्री उसे  अपना ड्रीम प्रोजेक्ट का भगत सिंह मान कर चल रहे हों। हो सकता है मंत्री जी यह सोच कर ख़ुश  होते रहें कि केकड़ी का अस्पताल देश के सर्वश्रेष्ठ अस्पतालों में से एक है मगर हक़ीक़त  यह है कि पूरे अस्पताल में अव्यवस्थाएं ब्याई हुई कुतिया की तरह इधर-उधर भटकती नज़र आती हैं।आपातकाल वार्ड में जाकर देखें व्यवस्थाएं आपत्ति काल से गुज़र रही हैं। इमरजेंसी वार्ड में इमरजेंसी लगी हुई है।आई. सी.यू. की लिफ्ट किसी रोगी को लिफ्ट नहीं देती।ड्रेसिंग तक बाज़ार से कॉटन मंगवा कर की जाती है।ड्रेसिंग के लिए  वार्ड बॉय का इस्तेमाल किया जाता है। कार्डिक मॉनिटर अंत समय में पसर जाते हैं। अस्पताल में रोगियों को बाहर ले जाने के लिए एंबुलेंस के ड्राइवर तक नहीं होते।

     _*डॉ गणेश पुरी ...गणेश जी की ऐसी प्रतिमा हैं  जिनका केकड़ी से विसर्जित किया जाना डॉक्टर रघु शर्मा के वश की बात नहीं।*_  अस्पताल में सुविधाएं मशीनें आ जाने से नहीं मिलतीं। मशीनों का इस्तेमाल करना भी आना चाहिए ।अस्पताल के चिकित्सक आई हुई आधुनिक चिकित्सा मशीनों को ऐसे देखते हैं जैसे बावले  गांव में ऊँट आ  जाता है।जैसे सुहागरात पर पहली बार पत्नी अपने पति के पराक्रम को निहारती है। डॉ.शर्मा या तो अभी डॉ पुरी की पूरी  जन्मपत्री को खोल कर पढ़ नहीं पाए हैं या फिर उन्हें फ़र्ज़ी जन्मपत्री हाथ लग गई है वरना भ्रष्टाचार के आरोपों को देखा जाए तो वह भी अनिल मित्तल से किसी मायने में कम नहीं ।या तो थोड़ा इंतजार करें जब तक ..तब-तक... ए.सी.बी .की कार्यवाही पालिका की तरह ज़िला अस्पताल में भी हो ।कच्चे चिट्ठों की लंबी फेहरिस्त खोली जाए और डॉक्टर रघु शर्मा महसूस करें कि उन्होंने जिसे सफ़ेद घोड़े पर हाथ रखा था वह तो खच्चर  निकला ।
   वैसे मेरी मित्रतावश  डॉ रघु शर्मा को यह राय है कि वह मेरी बात को दिल पर ना लें ।शांति पूर्वक सोचें कि क्या डॉ पुरी पर रखा गया उनका हाथ सही है क्या उनके ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए डॉक्टर पुरी का होना पूरी तरह जरूरी व लाभदायक है इन सवालों में जो भी उन्हें सही उत्तर मिले वह उस पर अमल करें । 
        *बाक़ी तो केकड़ी की महिमा अपरम्पार है ही
"/> केकड़ी के अस्पताल को ज़िला अस्पताल बनाकर राज ऋषि रघु शर्मा ने केकड़ी पर ऐसा एहसान किया है जो कि केकड़ी चाहकर भी चांद तारों के रहते भुला नहीं पाएगी। मलाईदार दूध बिल्ली को सौंपकर ...बिल्ली को जिला स्तर पर सम्मानित करवाकर डॉ शर्मा ने वाक़ई मर्द वाला काम किया है।  वैसे भी मर्दों वाला काम करने वालों की केकड़ी में कोई कमी नहीं। नगर पालिका के अध्यक्ष अनिल मित्तल को ही लीजिए। कब से और कितने मर्दों वाले काम किन्नर बनकर कर रहे थे। *हर मर्द लगने वाले किन्नरों के काम बस !किसी तरह केकड़ी को लूट लो !!*

    केकड़ी में वैसे तो दो ही असली वाले मर्द सिद्ध हो पाए हैं ।एक तो ज़िला अस्पताल के *पी.एम.ओ .डॉ गणपत राज पुरी दूसरे अनिल मित्तल।* दोनों ही सत्ता की कृपा से मलाई का सेवन करते रहे हैं ।डॉ गणपत राजपुरी पर राज ऋषि शर्मा का पूरा- पूरा वरद हस्त  है ।इसे आप क्या कहेंगे कि डॉ रघु शर्मा की पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने जिस पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए । टी.वी चैनल पर जिन की कारगुजारीयां चर्चाओं में रहीं।उन्हें महाप्रभु रघु शर्मा ने स्वयं अपने हाथों से सम्मानित किया। इसे पुरी साहब की मर्दानगी ही तो कहेंगे कि उनका कांग्रेस कुछ नहीं बिगाड़ पाई। भ्रष्टाचार और लूट के सभी मामले कांग्रेस के ही मंत्री द्वारा बर्फ़ में लगा  दिए गए। वैसे एक बात तो साफ़ है कि डॉ रघु शर्मा और डॉ पुरी की जीवन शैली और कार्यप्रणाली बिल्कुल एक जैसी है। दोनों ही अपने सिवा किसी की नहीं सुनते। किसी की नहीं मानते। दोनों ही अपने आप को रावतभाटा परमाणु बिजली घर की चलित इकाई मानते हैं । कांग्रेस जिसे एक नंबर का भ्रष्ट अधिकारी बताती है  उन्हें  ब्रह्म देवता अपनी आंख का तारा समझते हैं ।वजह क्या है यह तो डॉ शर्मा और पुरी के बीच की बात है ।दोनों का ही कोई मुक़ाबला नहीं ।काट खाने का भी दोनों को लंबा अनुभव है। डॉ पुरी अपने कर्मचारियों को हड़काते  हैं तो डॉ शर्मा  अपने कार्यकर्ताओं को।दोनों  ही हिटलर और मुसोलिनी के बताए रास्तों पर चलकर कामयाबी के झंडे गाड़ रहे हैं ।
     मुझे बताया गया कि अस्पताल की एक महिला कर्मचारी ने तंग आकर नौकरी छोड़ने का मानस बना लिया है। मैं भी उन्हें सलाह देता हूं कि नौकरी छोड़ दें और रूखी -सूखी खा कर जीवन यापन करें।वरना सत्ता के वरद हस्त प्राप्त अधिकारी किसी को कहीं का नहीं छोड़ते।
     *आस-पास कई किलोमीटर तक जब अस्पताल के कोई कर्मचारी का बच्चा रोता है तो मां कहती है बेटा रो मत!! डॉ .पुरी आ जाएगा ।* जब सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का ।पूरी केकड़ी डॉ पुरी को अस्पताल की दीमक मानती रहे तो क्या जब चिकित्सा मंत्री उसे  अपना ड्रीम प्रोजेक्ट का भगत सिंह मान कर चल रहे हों। हो सकता है मंत्री जी यह सोच कर ख़ुश  होते रहें कि केकड़ी का अस्पताल देश के सर्वश्रेष्ठ अस्पतालों में से एक है मगर हक़ीक़त  यह है कि पूरे अस्पताल में अव्यवस्थाएं ब्याई हुई कुतिया की तरह इधर-उधर भटकती नज़र आती हैं।आपातकाल वार्ड में जाकर देखें व्यवस्थाएं आपत्ति काल से गुज़र रही हैं। इमरजेंसी वार्ड में इमरजेंसी लगी हुई है।आई. सी.यू. की लिफ्ट किसी रोगी को लिफ्ट नहीं देती।ड्रेसिंग तक बाज़ार से कॉटन मंगवा कर की जाती है।ड्रेसिंग के लिए  वार्ड बॉय का इस्तेमाल किया जाता है। कार्डिक मॉनिटर अंत समय में पसर जाते हैं। अस्पताल में रोगियों को बाहर ले जाने के लिए एंबुलेंस के ड्राइवर तक नहीं होते।

     _*डॉ गणेश पुरी ...गणेश जी की ऐसी प्रतिमा हैं  जिनका केकड़ी से विसर्जित किया जाना डॉक्टर रघु शर्मा के वश की बात नहीं।*_  अस्पताल में सुविधाएं मशीनें आ जाने से नहीं मिलतीं। मशीनों का इस्तेमाल करना भी आना चाहिए ।अस्पताल के चिकित्सक आई हुई आधुनिक चिकित्सा मशीनों को ऐसे देखते हैं जैसे बावले  गांव में ऊँट आ  जाता है।जैसे सुहागरात पर पहली बार पत्नी अपने पति के पराक्रम को निहारती है। डॉ.शर्मा या तो अभी डॉ पुरी की पूरी  जन्मपत्री को खोल कर पढ़ नहीं पाए हैं या फिर उन्हें फ़र्ज़ी जन्मपत्री हाथ लग गई है वरना भ्रष्टाचार के आरोपों को देखा जाए तो वह भी अनिल मित्तल से किसी मायने में कम नहीं ।या तो थोड़ा इंतजार करें जब तक ..तब-तक... ए.सी.बी .की कार्यवाही पालिका की तरह ज़िला अस्पताल में भी हो ।कच्चे चिट्ठों की लंबी फेहरिस्त खोली जाए और डॉक्टर रघु शर्मा महसूस करें कि उन्होंने जिसे सफ़ेद घोड़े पर हाथ रखा था वह तो खच्चर  निकला ।
   वैसे मेरी मित्रतावश  डॉ रघु शर्मा को यह राय है कि वह मेरी बात को दिल पर ना लें ।शांति पूर्वक सोचें कि क्या डॉ पुरी पर रखा गया उनका हाथ सही है क्या उनके ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए डॉक्टर पुरी का होना पूरी तरह जरूरी व लाभदायक है इन सवालों में जो भी उन्हें सही उत्तर मिले वह उस पर अमल करें । 
        *बाक़ी तो केकड़ी की महिमा अपरम्पार है ही
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अंदाजे बयां: केकड़ी के किन्नर बनाम मर्द

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August 31, 2019

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केकड़ी के अस्पताल को ज़िला अस्पताल बनाकर राज ऋषि रघु शर्मा ने केकड़ी पर ऐसा एहसान किया है जो कि केकड़ी चाहकर भी चांद तारों के रहते भुला नहीं पाएगी। मलाईदार दूध बिल्ली को सौंपकर ...बिल्ली को जिला स्तर पर सम्मानित करवाकर डॉ शर्मा ने वाक़ई मर्द वाला काम किया है।  वैसे भी मर्दों वाला काम करने वालों की केकड़ी में कोई कमी नहीं। नगर पालिका के अध्यक्ष अनिल मित्तल को ही लीजिए। कब से और कितने मर्दों वाले काम किन्नर बनकर कर रहे थे। *हर मर्द लगने वाले किन्नरों के काम बस !किसी तरह केकड़ी को लूट लो !!*

    केकड़ी में वैसे तो दो ही असली वाले मर्द सिद्ध हो पाए हैं ।एक तो ज़िला अस्पताल के *पी.एम.ओ .डॉ गणपत राज पुरी दूसरे अनिल मित्तल।* दोनों ही सत्ता की कृपा से मलाई का सेवन करते रहे हैं ।डॉ गणपत राजपुरी पर राज ऋषि शर्मा का पूरा- पूरा वरद हस्त  है ।इसे आप क्या कहेंगे कि डॉ रघु शर्मा की पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने जिस पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए । टी.वी चैनल पर जिन की कारगुजारीयां चर्चाओं में रहीं।उन्हें महाप्रभु रघु शर्मा ने स्वयं अपने हाथों से सम्मानित किया। इसे पुरी साहब की मर्दानगी ही तो कहेंगे कि उनका कांग्रेस कुछ नहीं बिगाड़ पाई। भ्रष्टाचार और लूट के सभी मामले कांग्रेस के ही मंत्री द्वारा बर्फ़ में लगा  दिए गए। वैसे एक बात तो साफ़ है कि डॉ रघु शर्मा और डॉ पुरी की जीवन शैली और कार्यप्रणाली बिल्कुल एक जैसी है। दोनों ही अपने सिवा किसी की नहीं सुनते। किसी की नहीं मानते। दोनों ही अपने आप को रावतभाटा परमाणु बिजली घर की चलित इकाई मानते हैं । कांग्रेस जिसे एक नंबर का भ्रष्ट अधिकारी बताती है  उन्हें  ब्रह्म देवता अपनी आंख का तारा समझते हैं ।वजह क्या है यह तो डॉ शर्मा और पुरी के बीच की बात है ।दोनों का ही कोई मुक़ाबला नहीं ।काट खाने का भी दोनों को लंबा अनुभव है। डॉ पुरी अपने कर्मचारियों को हड़काते  हैं तो डॉ शर्मा  अपने कार्यकर्ताओं को।दोनों  ही हिटलर और मुसोलिनी के बताए रास्तों पर चलकर कामयाबी के झंडे गाड़ रहे हैं ।
     मुझे बताया गया कि अस्पताल की एक महिला कर्मचारी ने तंग आकर नौकरी छोड़ने का मानस बना लिया है। मैं भी उन्हें सलाह देता हूं कि नौकरी छोड़ दें और रूखी -सूखी खा कर जीवन यापन करें।वरना सत्ता के वरद हस्त प्राप्त अधिकारी किसी को कहीं का नहीं छोड़ते।
     *आस-पास कई किलोमीटर तक जब अस्पताल के कोई कर्मचारी का बच्चा रोता है तो मां कहती है बेटा रो मत!! डॉ .पुरी आ जाएगा ।* जब सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का ।पूरी केकड़ी डॉ पुरी को अस्पताल की दीमक मानती रहे तो क्या जब चिकित्सा मंत्री उसे  अपना ड्रीम प्रोजेक्ट का भगत सिंह मान कर चल रहे हों। हो सकता है मंत्री जी यह सोच कर ख़ुश  होते रहें कि केकड़ी का अस्पताल देश के सर्वश्रेष्ठ अस्पतालों में से एक है मगर हक़ीक़त  यह है कि पूरे अस्पताल में अव्यवस्थाएं ब्याई हुई कुतिया की तरह इधर-उधर भटकती नज़र आती हैं।आपातकाल वार्ड में जाकर देखें व्यवस्थाएं आपत्ति काल से गुज़र रही हैं। इमरजेंसी वार्ड में इमरजेंसी लगी हुई है।आई. सी.यू. की लिफ्ट किसी रोगी को लिफ्ट नहीं देती।ड्रेसिंग तक बाज़ार से कॉटन मंगवा कर की जाती है।ड्रेसिंग के लिए  वार्ड बॉय का इस्तेमाल किया जाता है। कार्डिक मॉनिटर अंत समय में पसर जाते हैं। अस्पताल में रोगियों को बाहर ले जाने के लिए एंबुलेंस के ड्राइवर तक नहीं होते।

     _*डॉ गणेश पुरी ...गणेश जी की ऐसी प्रतिमा हैं  जिनका केकड़ी से विसर्जित किया जाना डॉक्टर रघु शर्मा के वश की बात नहीं।*_  अस्पताल में सुविधाएं मशीनें आ जाने से नहीं मिलतीं। मशीनों का इस्तेमाल करना भी आना चाहिए ।अस्पताल के चिकित्सक आई हुई आधुनिक चिकित्सा मशीनों को ऐसे देखते हैं जैसे बावले  गांव में ऊँट आ  जाता है।जैसे सुहागरात पर पहली बार पत्नी अपने पति के पराक्रम को निहारती है। डॉ.शर्मा या तो अभी डॉ पुरी की पूरी  जन्मपत्री को खोल कर पढ़ नहीं पाए हैं या फिर उन्हें फ़र्ज़ी जन्मपत्री हाथ लग गई है वरना भ्रष्टाचार के आरोपों को देखा जाए तो वह भी अनिल मित्तल से किसी मायने में कम नहीं ।या तो थोड़ा इंतजार करें जब तक ..तब-तक... ए.सी.बी .की कार्यवाही पालिका की तरह ज़िला अस्पताल में भी हो ।कच्चे चिट्ठों की लंबी फेहरिस्त खोली जाए और डॉक्टर रघु शर्मा महसूस करें कि उन्होंने जिसे सफ़ेद घोड़े पर हाथ रखा था वह तो खच्चर  निकला ।
   वैसे मेरी मित्रतावश  डॉ रघु शर्मा को यह राय है कि वह मेरी बात को दिल पर ना लें ।शांति पूर्वक सोचें कि क्या डॉ पुरी पर रखा गया उनका हाथ सही है क्या उनके ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए डॉक्टर पुरी का होना पूरी तरह जरूरी व लाभदायक है इन सवालों में जो भी उन्हें सही उत्तर मिले वह उस पर अमल करें । 
        *बाक़ी तो केकड़ी की महिमा अपरम्पार है ही


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