राजस्थान न्यूज़: जोधपुर। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि जोधपुर एयरपोर्ट का नया टर्मिनल पश्चिमी राजस्थान के विकास को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि 4 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एयरपोर्ट के नए टर्मिनल के लोकार्पण के साथ ही क्षेत्र में विकास के नए युग की शुरुआत होगी। शेखावत ने कहा कि यह केवल एक भवन का उद्घाटन नहीं है, बल्कि पर्यटन, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने वाली बड़ी आधारभूत परियोजना है। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर उड़ान फेज-2 की भी शुरुआत होगी, जिससे क्षेत्रीय हवाई संपर्क को और गति मिलेगी। अब एक साथ खड़े हो सकेंगे 12 विमान गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि वर्ष 2014 तक जोधपुर एयरपोर्ट पर एक समय में केवल दो बड़े विमान ही खड़े हो सकते थे। रात में या खराब मौसम के दौरान विमानों की लैंडिंग के लिए भी पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जोधपुर एयरपोर्ट का व्यापक विस्तार किया गया है। अब यहां एक साथ 12 विमान खड़े किए जा सकेंगे। इसके साथ ही यात्रियों को संभालने की क्षमता भी करीब दस गुना बढ़ गई है। महानगरों जैसी सुविधाओं से लैस होगा नया टर्मिनल करीब 400 करोड़ रुपए की लागत से बना नया टर्मिनल वर्तमान एयरपोर्ट की तुलना में लगभग दोगुनी क्षमता वाला होगा। इसमें प्रतिवर्ष करीब 25 लाख यात्रियों के आवागमन की व्यवस्था की गई है। नए टर्मिनल में छह एयरोब्रिज, आठ बोर्डिंग गेट, चार डिपार्चर गेट, 20 चेक-इन काउंटर और तीन बैगेज बेल्ट स्थापित की गई हैं। एयरक्राफ्ट एप्रन भी इतना बड़ा बनाया गया है कि एक साथ 12 विमान खड़े किए जा सकेंगे। आधुनिक तकनीक से तैयार हुआ टर्मिनल जोधपुर का नया एयरपोर्ट टर्मिनल मॉड्यूलर स्टील स्ट्रक्चर और जीएफआरसी तकनीक से निर्मित है। इसमें विशाल लाउंज क्षेत्र को केवल छह कॉलम के सहारे डिजाइन किया गया है, जिससे यात्रियों को खुला और आधुनिक अनुभव मिलेगा। करीब तीन साल की निर्माण प्रक्रिया और सभी तकनीकी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद नया टर्मिनल अब उद्घाटन की दहलीज पर है। नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो यानी बीसीएएस से सुरक्षा संबंधी अंतिम मंजूरी मिलने के बाद अब तैयारियां उद्घाटन समारोह पर केंद्रित हैं।\ एएआई अधिकारियों ने लिया तैयारियों का जायजा एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के ऑपरेशनल कार्यकारी निदेशक एस.एस. राजू ने जोधपुर पहुंचकर नए टर्मिनल और यात्री सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों के साथ व्यवस्थाओं की समीक्षा की और उद्घाटन से जुड़ी तैयारियों का जायजा लिया। अधिकारियों ने टर्मिनल की यात्री सुविधा, सुरक्षा, बोर्डिंग व्यवस्था, बैगेज सिस्टम और संचालन संबंधी तैयारियों की जानकारी दी। उद्घाटन से पहले सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उद्घाटन के बाद बढ़ सकती है उड़ानों की संख्या एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार, उद्घाटन के कुछ सप्ताह बाद नए टर्मिनल से नियमित फ्लाइट संचालन शुरू होने की संभावना है। वर्तमान में जोधपुर से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, अहमदाबाद, पुणे और हैदराबाद के लिए नियमित उड़ानें संचालित हो रही हैं। नए टर्मिनल के शुरू होने के बाद एयरलाइंस के लिए अतिरिक्त स्लॉट उपलब्ध होंगे। इससे नए शहरों के लिए उड़ानों की संभावना मजबूत होगी और जोधपुर सहित पूरे पश्चिमी राजस्थान को बेहतर हवाई संपर्क मिल सकेगा। पर्यटन और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि जोधपुर एयरपोर्ट का विस्तार पर्यटन और व्यापार दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, पाली और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन, रक्षा, उद्योग और व्यापारिक गतिविधियों को इससे नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि उड़ान योजना के माध्यम से आम लोगों के लिए हवाई यात्रा अधिक सुलभ हुई है और नया टर्मिनल पश्चिमी राजस्थान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में रहने और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार बबीता धाकड़ उर्फ खदीजा की न्यायिक हिरासत 15 दिन के लिए बढ़ा दी गई है। सोमवार को जयपुर जिला अदालत में उसकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराई गई। सुरक्षा कारणों के चलते बबीता धाकड़ को जेल से अदालत नहीं लाया गया। जयपुर जिला अदालत की सीजेएम-2 कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी के दौरान अदालत ने उसे जेल में ही रखने के आदेश दिए। एटीएस ने अदालत में पेश किया वारंट पेशी से पहले राजस्थान एटीएस की टीम ने अदालत में आरोपी का वारंट पेश किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने बबीता धाकड़ की न्यायिक हिरासत 15 दिनों के लिए बढ़ा दी। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में जेल में रहेगी। इससे पहले शनिवार को सात दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद एटीएस ने उसे जयपुर की वेकेशन कोर्ट में पेश किया था। वहां से उसे दो दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया था। 20 जून को जयपुर से हुई थी गिरफ्तारी राजस्थान एटीएस ने बबीता धाकड़ उर्फ खदीजा को 20 जून को जयपुर से गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि वह आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में थी और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए कथित जासूसी गतिविधियों में शामिल थी। गिरफ्तारी के बाद एटीएस ने आरोपी से सात दिन तक गहन पूछताछ की। इस दौरान उसके संपर्कों, डिजिटल उपकरणों और कथित नेटवर्क से जुड़े पहलुओं को लेकर जानकारी जुटाई गई। डिजिटल सबूतों और संपर्कों की जांच जारी एटीएस अब मामले की जांच आगे बढ़ा रही है। जांच एजेंसी बबीता धाकड़ के मोबाइल, सोशल मीडिया अकाउंट, ऑनलाइन संपर्कों और डिजिटल सबूतों की पड़ताल कर रही है। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि वह किन-किन लोगों के संपर्क में थी और कथित नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा था। एटीएस इस मामले में आतंकी संगठन से जुड़े संभावित संपर्कों और आईएसआई के लिए जासूसी गतिविधियों के आरोपों की गहराई से जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। सुरक्षा कारणों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आरोपी को कोर्ट में प्रत्यक्ष रूप से पेश नहीं किया गया। सुरक्षा कारणों के चलते उसकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराई गई। अदालत ने सुनवाई के बाद न्यायिक हिरासत बढ़ाते हुए उसे जेल में रखने के आदेश दिए।फिलहाल बबीता धाकड़ न्यायिक हिरासत में है और एटीएस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। जयपुर की सेंट्रल जेल में हनुमान चालीसा पढ़ने को लेकर विचाराधीन बंदियों के बीच विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों में मारपीट हो गई और एक बंदी घायल हो गया। आरोप है कि हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे बंदी पर दूसरे बंदी ने नुकीली वस्तु से हमला कर दिया। घटना के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। घायल बंदी का तत्काल उपचार कराया गया। मामले की सूचना मिलने पर लालकोठी थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पाठ करने पर टोका, फिर बढ़ा विवाद शुरुआती जांच के अनुसार, जेल में एक विचाराधीन बंदी हनुमान चालीसा का पाठ कर रहा था। इसी दौरान दूसरे बंदी ने उसे टोका, जिसके बाद दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। कुछ ही देर में विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों में मारपीट हो गई। आरोप है कि विवाद के दौरान एक बंदी ने नुकीली वस्तु से हमला कर दिया, जिससे दूसरा बंदी घायल हो गया। जेल स्टाफ ने तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रण में किया। लालकोठी थाने में मामला दर्ज लालकोठी थानाधिकारी श्याम सुंदर शर्मा ने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस घायल बंदी के बयान, जेल प्रशासन की रिपोर्ट और मौके पर मौजूद अन्य बंदियों की जानकारी के आधार पर घटना की वास्तविक स्थिति पता लगाने का प्रयास कर रही है। नुकीली वस्तु जेल में कैसे पहुंची, जांच का विषय पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कथित हमले में इस्तेमाल की गई नुकीली वस्तु जेल परिसर में कैसे पहुंची। जेल जैसे संवेदनशील और सुरक्षित परिसर में इस तरह की वस्तु मिलना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। घटना के समय मौजूद बंदियों और जेल स्टाफ से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि विवाद की वास्तविक वजह केवल पाठ को लेकर थी या इसके पीछे कोई पुराना विवाद भी था। जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल सेंट्रल जेल में हुई इस घटना के बाद जेल प्रशासन की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विचाराधीन बंदियों के बीच विवाद का अचानक हिंसक रूप लेना और नुकीली वस्तु से हमला होना गंभीर मामला माना जा रहा है।फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
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अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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राष्ट्रीय न्यूज़: अयोध्या। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के मामले को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को पुलिस ने सोमवार देर रात करीब 11:30 बजे अयोध्या के एक होटल में नजरबंद कर दिया। थोड़ी देर बाद उन्हें कृषि विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस ले जाया गया। कांग्रेस सांसद किशोरी लाल शर्मा, तनुज पूनिया और उज्जवल रमण सिंह को भी हाउस अरेस्ट किए जाने की जानकारी सामने आई है। अजय राय के नेतृत्व में कांग्रेस का डेलिगेशन चढ़ावा चोरी के विरोध में अयोध्या पहुंचा था। कांग्रेस नेताओं ने मंगलवार को ट्रस्ट कार्यालय के घेराव का ऐलान किया था। ट्रस्ट कार्यालय घेराव से पहले पुलिस की कार्रवाई कांग्रेस नेताओं के प्रस्तावित घेराव को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने पहले ही सख्त कदम उठाए। अजय राय को देर रात होटल में नजरबंद किया गया और बाद में उन्हें गेस्ट हाउस ले जाया गया। वहीं अन्य कांग्रेस सांसदों और नेताओं की गतिविधियों पर भी पुलिस ने निगरानी रखी। कांग्रेस का आरोप है कि चढ़ावे से जुड़े मामले में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय होनी चाहिए। पार्टी का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े विषय पर पारदर्शिता जरूरी है। राम जन्मभूमि मंदिर की ओर कूच कर रहे कार्यकर्ताओं को रोका इस बीच मंगलवार दोपहर करीब 12:30 बजे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राम जन्मभूमि मंदिर की ओर कूच किया। पुलिस ने मंदिर से करीब एक किलोमीटर पहले टेढ़ी बाजार क्षेत्र में उन्हें रोक दिया। रोके जाने पर कांग्रेस कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए और पुलिस से धक्का-मुक्की करने लगे। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। पुलिसकर्मी कार्यकर्ताओं को पकड़कर वाहनों में ले जाते नजर आए। कांग्रेस ने कार्रवाई को बताया दमनकारी कांग्रेस नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक विरोध को दबाने का प्रयास बताया है। पार्टी का कहना है कि चढ़ावा चोरी जैसा मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है और इस पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है। कांग्रेस ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई हो।
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राष्ट्रीय न्यूज़: जयपुर/नई दिल्ली। यमुना जल बंटवारे को लेकर राजस्थान और हरियाणा के बीच 1994 के समझौते को लागू करने से जुड़े लंबे विवाद के समाधान की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। करीब 32 साल बाद दोनों राज्यों के बीच इस मुद्दे पर सहमति बन गई है। सूत्रों के अनुसार, सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समझौते को लागू करने के लिए मेमोरंडम ऑफ एग्रीमेंट यानी एमओए पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इस दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल भी मौजूद रहेंगे। समझौते के प्रमुख बिंदुओं पर रविवार को दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस में मैराथन बैठक हुई। करीब दो घंटे चली इस बैठक में राजस्थान और हरियाणा के बीच कई अहम विषयों पर सहमति बनी। इस समझौते को शेखावाटी सहित राजस्थान के जल संकटग्रस्त क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीकानेर हाउस में दो घंटे चली बैठक रविवार को हुई बैठक में राजस्थान की ओर से मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, एसीएस अभय कुमार और जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर भुवन भास्कर मौजूद रहे। वहीं हरियाणा की ओर से एसीएस अनुराग अग्रवाल और चीफ इंजीनियर वीरेन्द्र सिंह बैठक में शामिल हुए। हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जुड़े। बैठक में यमुना जल समझौते के क्रियान्वयन, पाइपलाइन मार्ग, जल प्रवाह, वित्तीय व्यय, परियोजना संचालन और भविष्य में अन्य जल स्रोतों से मिलने वाले पानी के उपयोग पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने तकनीकी और प्रशासनिक बिंदुओं पर सहमति बनाते हुए एमओए के लिए आधार तैयार किया। हरियाणा ने इन स्थानों से मांगा पानी समझौते के तहत हरियाणा ने कई स्थानों से पानी लेने की मांग रखी है। इसमें दानोदा कलां से 10 क्यूसेक, नयागांव के पास सारसौद डिस्ट्रीब्यूटी से 80 क्यूसेक, चौधरी माइनर पर हिंदवान से 70 क्यूसेक, सरसना माइनर पर पाट्टन से 20 क्यूसेक, सेगा नरार से 2 क्यूसेक, कैथल टाउन के पास पेओदा से 43 क्यूसेक और कैथल टाउन के पास चांदना मानस रोड से 41.83 क्यूसेक पानी की मांग शामिल है। इसके अतिरिक्त एक अन्य स्थान से भी पानी लिया जाएगा। हरियाणा हाश्यावास के तीन रिजर्वायर में से एक से आवश्यकता के अनुसार पानी ले सकेगा। इन बिंदुओं को लेकर दोनों राज्यों के बीच तकनीकी सहमति बनने की जानकारी सामने आई है। हाईब्रिड मोड पर राजस्थान पहुंचेगा पानी हथिनी कुंड बैराज से राजगढ़, चूरू के जलाशय तक पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बनाई जाएगी। हथिनी कुंड और राजगढ़ के बीच भूतल स्तर में करीब 110 मीटर का अंतर है और राजगढ़ अपेक्षाकृत नीचा है। ऐसे में सामान्य स्थिति में पानी हथिनी कुंड से गुरुत्वाकर्षण के प्रवाह से राजगढ़ तक पहुंच सकेगा। हालांकि, इस पाइपलाइन को हाईब्रिड मोड पर विकसित किया जाएगा। इसके तहत पम्पिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे, ताकि पानी की उपलब्धता कम होने या प्रवाह में कमी आने पर पंपिंग सिस्टम के माध्यम से पानी राजगढ़ तक पहुंचाया जा सके। एसपीवी कंपनी करेगी परियोजना का संचालन इस परियोजना के संचालन के लिए पहले संयुक्त बोर्ड का प्रस्ताव था, लेकिन अब दोनों राज्य स्पेशल पर्पज व्हीकल यानी एसपीवी कंपनी बनाने पर सहमत हो गए हैं। एसपीवी के गठन और संचालन से जुड़े अन्य बिंदु आगे तय किए जाएंगे। यही कंपनी परियोजना के क्रियान्वयन और संचालन की जिम्मेदारी संभालेगी। परियोजना का पूरा आर्थिक व्यय राजस्थान सरकार वहन करेगी। हालांकि, इस व्यय में केंद्र सरकार से भी सहयोग लेने का प्रयास किया जाएगा। भविष्य में किशाऊ, लखवार और रेणुकाजी से राजस्थान के हिस्से का पानी भी इन्हीं पाइपलाइनों के जरिए प्रदेश तक पहुंचाया जा सकेगा। राजस्थान को मिलेगा 1917 क्यूसेक पानी राजस्थान को 1994 के समझौते के आधार पर ही पानी मिलेगा। बताया जा रहा है कि हरियाणा ने समझौते के बाद बदली परिस्थितियों और वर्तमान मांग के अनुसार बंटवारे का प्रस्ताव रखा था, लेकिन राजस्थान की ओर से मूल समझौते को ही फिलहाल लागू करने का प्रस्ताव रखा गया। इस पर दोनों राज्यों के बीच सहमति बनी। राजस्थान को 1917 क्यूसेक पानी मिलने की बात सामने आई है। हथिनी कुंड से चूरू के हाश्यावास तक तीन पाइपलाइन डाली जाएंगी। प्रत्येक पाइपलाइन का व्यास 3.6 मीटर होगा। यह पानी पश्चिमी यमुना कैनाल से उपलब्ध कराया जाएगा। हरियाणा के पांच जिलों से गुजरेगी पाइपलाइन प्रस्तावित पाइपलाइन हरियाणा के यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और हिसार जिलों से होकर गुजरेगी। पाइपलाइन मार्ग में आवश्यक भूमि अवाप्ति की जाएगी। मंजूरी के बाद वित्तीय संसाधन जुटाए जाएंगे और निर्माण कार्य के लिए टेंडर तथा वर्क ऑर्डर जारी किए जाएंगे। परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद इसका निर्माण कार्य शुरू होगा। जल संकट से जूझ रहे राजस्थान के इलाकों के लिए यह परियोजना दीर्घकालिक राहत देने वाली मानी जा रही है। विशेष रूप से चूरू, झुंझुनूं, सीकर और शेखावाटी क्षेत्र में पेयजल और जल उपलब्धता को लेकर यह समझौता महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। 32 साल पुराने विवाद के समाधान की उम्मीद यमुना जल बंटवारे को लेकर राजस्थान और हरियाणा के बीच 1994 से विवाद चला आ रहा था। लंबे समय से राजस्थान अपने हिस्से के पानी को लेकर समझौते के क्रियान्वयन की मांग कर रहा था। अब दोनों राज्यों के बीच एमओए की तैयारी को इस विवाद के समाधान की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि सोमवार को एमओए पर हस्ताक्षर होते हैं, तो राजस्थान के लिए यमुना जल समझौते के क्रियान्वयन का रास्ता साफ हो जाएगा। इसके बाद परियोजना की वित्तीय, तकनीकी और निर्माण संबंधी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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