राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय को सोमवार को नया मुख्य न्यायाधीश मिल गया। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने लोकभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई। जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल ने अंग्रेजी में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। मुख्य सचिव ने पढ़ी नियुक्ति अधिसूचना समारोह की शुरुआत में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राज्यपाल से जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल को शपथ दिलाने का आग्रह किया। इससे पहले उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की ओर से जारी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति अधिसूचना और वारंट पढ़कर सुनाया। मुख्यमंत्री और दोनों डिप्टी CM रहे मौजूद शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और डॉ. प्रेमचंद बैरवा भी मौजूद रहे। इसके अलावा मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधि, राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिकारी, अधिवक्ता और जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल के परिजन भी समारोह में शामिल हुए। राजस्थान हाईकोर्ट को मिला नियमित मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल की शपथ के साथ राजस्थान उच्च न्यायालय में नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हो गई। उनकी नियुक्ति को न्यायिक प्रशासन और हाईकोर्ट के संस्थागत कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Read more 7th Sep 2026
राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव के बीच एक नई राजनीतिक तस्वीर उभरकर सामने आई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने रविवार रात जयपुर में एक मंच साझा किया और भाजपा-कांग्रेस के अलावा तीसरे राजनीतिक विकल्प को मजबूत करने का संदेश दिया। संयुक्त सभा जयपुर के भट्टा बस्ती क्षेत्र में वार्ड 146 से AIMIM प्रत्याशी फिरोज बानो के समर्थन में आयोजित हुई। दोनों नेताओं के साथ आने को केवल निकाय चुनाव की रणनीति तक सीमित नहीं माना जा रहा। उनके बयानों से यह संकेत मिला कि भविष्य में विधानसभा चुनाव तक भी राजनीतिक सहयोग की संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं। हालांकि अभी दोनों दलों के बीच किसी विस्तृत औपचारिक गठबंधन की शर्तें सार्वजनिक नहीं हुई हैं। ओवैसी बोले- राजस्थान को चाहिए तीसरा राजनीतिक विकल्प असदुद्दीन ओवैसी ने सभा में कहा कि राजस्थान की राजनीति लंबे समय से भाजपा और कांग्रेस के बीच सिमटी हुई है और अब जनता के सामने तीसरा विकल्प खड़ा करने का समय आ गया है। उन्होंने जहां RLP के प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, वहां उनके समर्थन की अपील भी की। इस संयुक्त मंच को राजस्थान में AIMIM और RLP के संभावित राजनीतिक तालमेल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ओवैसी ने भाजपा पर धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और शिक्षा, सरकारी स्कूलों, महिला सुरक्षा तथा मूलभूत नागरिक सुविधाओं जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा। बेनीवाल बोले- जयपुर से नई राजनीति की शुरुआत हनुमान बेनीवाल ने ओवैसी के साथ मंच साझा करते हुए इसे राजस्थान की राजनीति में नई शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि किसानों, युवाओं, रोजगार, पेपर लीक और अग्निवीर जैसे मुद्दों को लेकर दोनों दल संघर्ष जारी रखेंगे। बेनीवाल ने यह भी संकेत दिया कि यह साथ केवल चुनावी मंच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जनमुद्दों पर भी आगे बढ़ना चाहिए। बेनीवाल ने 6 सितंबर को ओवैसी के साथ जयपुर के भट्टा बस्ती में संयुक्त सभा करने का कार्यक्रम पहले ही सार्वजनिक किया था। जाट-मुस्लिम समीकरण पर भी नजर इस संभावित राजनीतिक तालमेल को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा जाट और मुस्लिम वोट बैंक के समीकरण की हो रही है। RLP की राजनीतिक ताकत परंपरागत रूप से किसान और जाट बहुल क्षेत्रों में मानी जाती है, जबकि AIMIM मुस्लिम मतदाताओं में अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में दोनों दल यदि आगे भी साथ रहते हैं तो यह गठजोड़ कई सीटों पर भाजपा-कांग्रेस के पारंपरिक समीकरणों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है। निकाय चुनाव से पहले AIMIM नेताओं ने भी राजस्थान में भविष्य के तीसरे मोर्चे की संभावना से इनकार नहीं किया था। वार्ड 146 बना नए सियासी समीकरण का मंच जयपुर का वार्ड 146 इस नए राजनीतिक समीकरण का केंद्र बन गया है। यहां AIMIM की फिरोज बानो चुनाव मैदान में हैं और उनके समर्थन में आयोजित सभा में ओवैसी और बेनीवाल दोनों की मौजूदगी ने इसे हाई-प्रोफाइल मुकाबले में बदल दिया है। भट्टा बस्ती में हुई संयुक्त सभा को दोनों दलों के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है। BJP-कांग्रेस की दोध्रुवीय राजनीति को चुनौती देने की कोशिश राजस्थान की राजनीति लंबे समय से मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के बीच केंद्रित रही है। तीसरे दलों को अलग-अलग चुनावों में सीमित सफलता मिली है। ऐसे में RLP और AIMIM का साथ आना इस दोध्रुवीय राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि इसका वास्तविक असर कितना होगा, इसका पहला संकेत निकाय चुनाव के परिणामों से मिलेगा।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव के बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के रोड शो को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। गहलोत ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री को खुद रोड शो करने पड़ रहे हैं, यह सरकार के लिए उपलब्धि नहीं बल्कि उसकी नाकामी का संकेत है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के शहरों में सड़क, सीवरेज और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर जनता में नाराजगी है।गहलोत रविवार को जयपुर के एक निजी होटल में आयोजित मथुरा दास माथुर क्रिकेट अवार्ड समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने निकाय चुनाव के साथ जातिगत जनगणना, राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA), जयपुर में बन रहे क्रिकेट स्टेडियम और शहरी विकास के मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। ‘मुख्यमंत्री को रोड शो करने की नौबत क्यों आई?’ अशोक गहलोत ने सवाल किया कि आखिर स्थानीय निकाय चुनाव के लिए मुख्यमंत्री को इतने बड़े स्तर पर रोड शो करने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने इसे भाजपा सरकार की स्थिति से जोड़ते हुए दावा किया कि जनता पिछले ढाई साल के कामकाज से नाराज है और इसी कारण मुख्यमंत्री को खुद चुनाव प्रचार में उतरना पड़ रहा है। गहलोत ने यह भी दावा किया कि किसी मुख्यमंत्री का इस स्तर पर स्थानीय निकाय चुनाव में रोड शो करना असामान्य है। इस दावे को उन्होंने भाजपा की चिंता से जोड़कर पेश किया।टूटी सड़क और सीवरेज को बनाया मुद्दा पूर्व मुख्यमंत्री ने शहरी क्षेत्रों की स्थिति को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई शहरों में टूटी सड़कें, खराब सीवरेज, जलभराव और सफाई जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। गहलोत का आरोप है कि नगरीय विकास के काम अपेक्षित गति से नहीं हो रहे और अब चुनाव के समय बड़े नेताओं के रोड शो के जरिए जनता का ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं और भाजपा सरकार इन्हें चुनावी राजनीति का हिस्सा बताती रही है। जातिगत जनगणना पर नीयत को लेकर सवाल गहलोत ने जातिगत जनगणना को लेकर भी सरकार की नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर सरकार की नीयत स्पष्ट दिखाई नहीं देती और जिस प्रक्रिया के जरिए इसे आगे बढ़ाने की बात हो रही है, उसमें सुधार की आवश्यकता है। गहलोत ने जातिगत जनगणना को सामाजिक न्याय और सरकारी योजनाओं की बेहतर लक्ष्य-निर्धारण प्रक्रिया से जोड़ते हुए सरकार से स्पष्ट नीति की मांग की। RCA चुनाव नहीं होने पर सरकार को घेरा मथुरा दास माथुर क्रिकेट अवार्ड समारोह में गहलोत ने राजस्थान के क्रिकेट प्रशासन पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि करीब पौने तीन साल से राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के चुनाव नहीं हुए और जयपुर में प्रस्तावित बड़े क्रिकेट स्टेडियम का काम भी रुका हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने राजस्थान के क्रिकेट ढांचे को कमजोर किया है। गहलोत ने कहा कि खेल संस्थाओं में नियमित चुनाव और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास जरूरी है, ताकि राज्य के खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिल सकें।‘हमने प्रशासन शहरों के संग में 12 लाख पट्टे दिए’ अशोक गहलोत ने अपनी सरकार के समय चले ‘प्रशासन शहरों के संग’ अभियान का जिक्र करते हुए दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने करीब 12 लाख पट्टे जारी किए थे। उन्होंने वर्तमान सरकार से सवाल किया कि पिछले ढाई से पौने तीन साल में कितने पट्टे जारी किए गए। गहलोत पहले भी निकाय चुनाव प्रचार के दौरान पट्टों, सड़क, ट्रैफिक, जलभराव और सफाईकर्मी भर्ती को लेकर भजनलाल सरकार से सवाल पूछ चुके हैं।‘दूसरे राज्यों से नेताओं को क्यों बुलाना पड़ रहा?’ गहलोत ने भाजपा के चुनाव प्रचार में राष्ट्रीय नेताओं और दूसरे राज्यों के मंत्रियों की सक्रियता पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि दिल्ली, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से नेताओं को राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनाव में प्रचार के लिए बुलाया जा रहा है। गहलोत ने इसे भाजपा की चुनावी चिंता से जोड़ते हुए कहा कि यदि सरकार अपने कामकाज को लेकर आश्वस्त है तो स्थानीय चुनाव को इतना बड़ा राजनीतिक अभियान बनाने की जरूरत क्यों पड़ रही है। भाजपा ने दूसरी ओर इन चुनावों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री सहित राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेताओं को प्रचार अभियान में उतारा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी अलग-अलग नगर निगम क्षेत्रों में रोड शो कर रहे हैं।BJP-कांग्रेस के बीच तेज हुई जुबानी जंग निकाय चुनाव के अंतिम चरण में अब भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं। कांग्रेस जहां सड़क, सीवर, पट्टे, रोजगार, सफाई व्यवस्था और स्थानीय विकास को आधार बनाकर सरकार को घेर रही है, वहीं भाजपा कांग्रेस के पिछले कार्यकाल का हिसाब मांगते हुए ‘डबल इंजन’ और ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार के नाम पर वोट मांग रही है। गहलोत के इन आरोपों के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने भी पलटवार करते हुए कांग्रेस शासनकाल, चुनावी आचार संहिता और सफाईकर्मी भर्ती जैसे मुद्दों पर पूर्व मुख्यमंत्री को घेरा है। अब निकाय चुनाव में मुकाबला केवल स्थानीय प्रत्याशियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों दल इसे राज्य सरकार और पूर्व कांग्रेस सरकार के कामकाज की तुलना में बदलने की कोशिश कर रहे हैं।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
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अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। कांग्रेस ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट को पंजाब का AICC प्रभारी महासचिव नियुक्त किया है। पंजाब की जिम्मेदारी संभाल रहे पूर्व छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अब असम का प्रभार दिया गया है। सचिन पायलट अब तक छत्तीसगढ़ के प्रभारी महासचिव थे। कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से बदलावों की घोषणा की गई। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब पंजाब कांग्रेस आंतरिक खींचतान से गुजर रही है और अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी तेज हो रही हैं। पार्टी नेतृत्व के सामने प्रदेश संगठन को एकजुट कर चुनावी रणनीति तैयार करने की बड़ी चुनौती है। पंजाब में पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती- गुटबाजी खत्म करना पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ समय से प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से जुड़े खेमों के बीच मतभेद खुलकर सामने आते रहे हैं। टिकट वितरण और संगठनात्मक फैसलों को लेकर भी नेताओं के बीच बयानबाजी हुई है। ऐसे में सचिन पायलट की पहली बड़ी जिम्मेदारी अलग-अलग खेमों के बीच समन्वय स्थापित करना और विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को एकजुट करना होगी। पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित हैं, इसलिए कांग्रेस हाईकमान के इस फैसले को चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी सुखदेव भगत को सचिन पायलट के पंजाब जाने के बाद सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया है। वहीं भूपेश बघेल को पंजाब से हटाकर असम भेजा गया है। इसके साथ ही कांग्रेस ने अन्य राज्यों के संगठनात्मक प्रभार में भी बदलाव किए हैं। डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद को महाराष्ट्र और पी.वी. मोहन को आंध्र प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई है। गुजरात में भी बदलाव कांग्रेस ने गुजरात के संगठनात्मक प्रभार में भी बदलाव किया है। मुकुल वासनिक से गुजरात की जिम्मेदारी वापस लिए जाने और रणदीप सिंह सुरजेवाला को नया प्रभार दिए जाने की जानकारी सामने आई है। सुरजेवाला कांग्रेस के प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं में शामिल हैं और कर्नाटक संगठन से भी जुड़े रहे हैं। इस बदलाव को भी आने वाले चुनावी और संगठनात्मक समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। पंजाब में चुनाव से पहले नया प्रयोग सचिन पायलट का पंजाब प्रभारी बनना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पायलट राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री रहने के अलावा लंबे समय से राष्ट्रीय संगठन में सक्रिय हैं। अब तक उनके पास छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी थी। कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट पर फेरबदल से पहले उन्हें छत्तीसगढ़ और भूपेश बघेल को पंजाब का प्रभारी दर्ज किया गया था।पंजाब में उनकी नियुक्ति को हाईकमान की ओर से चुनाव से पहले संगठन में संतुलन बनाने और अलग-अलग नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी पंजाब से हटाए गए भूपेश बघेल को असम कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया है। असम में विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद संगठनात्मक बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही थी असम के तत्कालीन प्रभारी जितेंद्र सिंह ने 4 मई 2026 को चुनावी हार की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसलिए उन्हें इस ताजा फेरबदल में “हटाया गया” कहना सटीक नहीं होगा; उनका इस्तीफा कई महीने पहले ही आ चुका था।छह राज्यों की जिम्मेदारियों में बदलाव कांग्रेस के इस संगठनात्मक फेरबदल में मुख्य रूप से पंजाब, असम, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों के प्रभार में बदलाव सामने आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा राजनीतिक चर्चा सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी मिलने की हो रही है, क्योंकि पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को संगठनात्मक खींचतान खत्म करने और भाजपा, आम आदमी पार्टी तथा शिरोमणि अकाली दल के मुकाबले मजबूत चुनावी रणनीति तैयार करनी होगी। पायलट की नियुक्ति के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि वे पंजाब कांग्रेस के अलग-अलग गुटों के बीच किस तरह तालमेल स्थापित करते हैं और चुनाव से पहले संगठन को कितना एकजुट कर पाते हैं।
Read more 6th Sep 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सभी राज्य सरकारों से बाइक टैक्सी को मंजूरी देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि निजी बाइक और स्कूटर के जरिए यात्रियों को परिवहन सुविधा देने से खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। गडकरी ने दावा किया कि बाइक टैक्सी को व्यापक स्तर पर अनुमति मिलने से करीब 8 करोड़ लोगों के लिए रोजगार या आय के अवसर तैयार हो सकते हैं। ‘केंद्र ने अनुमति दी, अब राज्यों की मंजूरी जरूरी’ गडकरी ने कहा कि केंद्र सरकार बाइक टैक्सी को अनुमति देने की दिशा में कदम उठा चुकी है, लेकिन परिवहन का विषय राज्य सरकारों से भी जुड़ा होने के कारण कई राज्यों में अभी तक इसकी मंजूरी नहीं दी गई है। उन्होंने राज्य सरकारों से अपील की कि वे बाइक टैक्सी को अनुमति दें, ताकि युवाओं और आम लोगों को कम लागत में नया रोजगार और कमाई का जरिया मिल सके। बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर सख्ती की तैयारी गडकरी ने सड़क सुरक्षा को लेकर भी सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे वाहन चालकों पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत है जो बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते हैं। इसके लिए मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव कर ‘नेगेटिव पॉइंट सिस्टम’ लागू करने का प्रस्ताव बताया गया है। इसके तहत बार-बार नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों के रिकॉर्ड पर नकारात्मक अंक जुड़ सकते हैं और आगे सख्त कार्रवाई की व्यवस्था बनाई जा सकती है। भारी वाहन चालकों की ट्रेनिंग पर जोर नितिन गडकरी ने भारी वाहन और निर्माण उपकरण चलाने वाले ड्राइवरों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि बड़े निर्माण उपकरण और भारी मशीनें चलाने वालों के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण जरूरी होना चाहिए। उन्होंने JCB India जैसी कंपनियों से भी अपील की कि मशीन या उपकरण देने से पहले ड्राइवरों को उचित ट्रेनिंग दी जाए। 10 लाख ड्राइवरों की होगी मुफ्त स्वास्थ्य जांच गडकरी ने सड़क और औद्योगिक सुरक्षा से जुड़ा ‘सुरक्षा’ पायलट प्रोग्राम भी शुरू किया है। इस कार्यक्रम के तहत हाईवे, खनन और निर्माण जैसे जोखिम वाले क्षेत्रों में काम करने वाले करीब 10 लाख ड्राइवरों और कर्मचारियों की मुफ्त मेडिकल जांच और काउंसलिंग कराने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में नागपुर-कामठी के NH-44 और चंद्रपुर के खनन क्षेत्र में करीब 10 हजार लोगों की जांच करने की योजना है। दोपहिया हादसों में 81,780 मौतों का दावा गडकरी ने सड़क हादसों के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में दोपहिया वाहन दुर्घटनाओं में 81,780 लोगों की मौत हुई है और यह संख्या बेहद चिंताजनक है। उन्होंने सड़क हादसों के प्रमुख कारणों में सीट बेल्ट नहीं लगाना, हिट एंड रन, गलत दिशा में वाहन चलाना, शराब पीकर ड्राइविंग और मोबाइल फोन के इस्तेमाल को गिनाया। सीट बेल्ट नहीं लगाने से 14,466 मौतों का आंकड़ा गडकरी ने बताया कि सीट बेल्ट नहीं लगाने से 14,466 मौतें हुईं, जबकि हिट एंड रन की घटनाओं में 34,030 लोगों की जान गई।इन आंकड़ों के आधार पर उन्होंने ड्राइवर ट्रेनिंग, स्वास्थ्य जांच और ट्रैफिक नियमों के सख्त पालन की जरूरत पर जोर दिया। रोजगार और सड़क सुरक्षा दोनों पर फोकस गडकरी का बयान ऐसे समय आया है जब कई राज्यों में बाइक टैक्सी को लेकर अलग-अलग नीतियां और विवाद सामने आते रहे हैं। केंद्र की कोशिश इसे रोजगार के अवसर के तौर पर बढ़ावा देने की है, वहीं राज्य सरकारों को स्थानीय परिवहन नियमों और सुरक्षा मानकों के आधार पर निर्णय लेना होगा।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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