राजस्थान न्यूज़: जयपुर। जयपुर के खोह नागोरियान क्षेत्र स्थित एक पटाखा फैक्ट्री में सोमवार को भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। आग की चपेट में आने से तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और प्रशासन, पुलिस तथा दमकल विभाग की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य में जुट गईं। जानकारी के अनुसार यह हादसा खोह नागोरियान थाना क्षेत्र के आयशा नगर तलाई इलाके में आईटीआई कॉलेज के पास स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुआ। फैक्ट्री में अचानक आग भड़कने के बाद कुछ ही देर में लपटों ने विकराल रूप धारण कर लिया। आग लगने के समय फैक्ट्री में कई मजदूर काम कर रहे थे, जिससे जनहानि हुई। हादसे में झुलसे पांच लोगों को गंभीर अवस्था में जयपुर के सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार अधिकांश घायल 80 से 90 प्रतिशत तक झुलसे हुए हैं और उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है। चिकित्सकों की टीम उनका उपचार कर रही है। जयपुर जिला कलेक्टर संदेश नायक ने बताया कि आग लगने की सूचना मिलते ही प्रशासन और दमकल विभाग की टीमों को मौके पर भेजा गया। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में किसी ज्वलनशील पदार्थ के कारण आग लगने की आशंका सामने आई है, हालांकि वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा। कलेक्टर ने बताया कि घायल मजदूरों को तत्काल एसएमएस अस्पताल पहुंचाया गया है और प्रशासन उनकी हरसंभव सहायता कर रहा है। उन्होंने कहा कि घटना की गंभीरता को देखते हुए पूरे मामले की जांच कराई जा रही है तथा यह भी पता लगाया जाएगा कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। आग लगने के बाद दमकल कर्मियों ने कई घंटों की मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रण में किया। पुलिस ने घटनास्थल को घेरकर जांच शुरू कर दी है। प्रशासन की टीम फैक्ट्री के लाइसेंस, सुरक्षा व्यवस्था और संचालन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। हादसे के बाद क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल है। स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से पटाखा फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों की सख्ती से जांच कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। पूर्व मंत्री महेश जोशी को भ्रष्टाचार के एक मामले में बड़ी राहत नहीं मिली है। विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम प्रकरण की अदालत ने उनकी ओर से दायर उस प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है, जिसमें गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए तत्काल रिहाई की मांग की गई थी। अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि गिरफ्तारी के दौरान संवैधानिक प्रावधानों तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के आवश्यक प्रावधानों का पर्याप्त रूप से पालन किया गया है। मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व मंत्री महेश जोशी की ओर से प्रस्तुत आवेदन में कहा गया था कि 7 मई को गिरफ्तारी के समय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। बचाव पक्ष का तर्क था कि जब उन्हें पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर न्यायालय में पांच दिन के पुलिस रिमांड के लिए पेश किया गया, तब गिरफ्तारी के आधारों की लिखित सूचना उनके परिजनों अथवा अधिवक्ता को उपलब्ध नहीं कराई गई थी। याचिका में उच्चतम न्यायालय के विहान कुमार बनाम हरियाणा राज्य मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया कि ऐसी स्थिति में गिरफ्तारी अवैध मानी जानी चाहिए और आरोपी को तत्काल रिहा किया जाना चाहिए। हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों से स्पष्ट है कि गिरफ्तारी के आधारों और परिस्थितियों की जानकारी परिजनों को समय पर उपलब्ध करा दी गई थी। सूचना तकनीकी माध्यमों और मौखिक रूप से भी साझा की गई थी, जिससे यह सिद्ध होता है कि गिरफ्तारी संबंधी आवश्यक जानकारी परिवार तक पहुंच चुकी थी। कोर्ट ने यह भी माना कि कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गिरफ्तार व्यक्ति और उसके परिजन गिरफ्तारी के कारणों से अवगत रहें। यदि सूचना प्रभावी रूप से उपलब्ध करा दी गई है तो केवल प्रक्रिया के किसी तकनीकी पहलू के आधार पर गिरफ्तारी को अवैध नहीं ठहराया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि मामले में संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन साबित नहीं हुआ है। इन टिप्पणियों के साथ विशेष न्यायालय ने महेश जोशी का प्रार्थना पत्र खारिज करते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग अस्वीकार कर दी। अदालत के इस आदेश के बाद मामले की आगे की सुनवाई नियमानुसार जारी रहेगी।
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राजस्थान न्यूज़: उदयपुर में धर्म परिवर्तन के कथित प्रयास पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 11 आरोपी गिरफ्तार
राजस्थान न्यूज़: उदयपुर। उदयपुर जिले के ऋषभदेव थाना क्षेत्र में आदिवासी परिवारों को कथित रूप से प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में अन्य राज्यों से आए तीन पादरी भी शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है और आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों तथा अन्य दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। पुलिस के अनुसार मामला कानूवाड़ा बिलखाई गांव का है, जहां पिछले दो दिनों से एक प्रार्थना सभा आयोजित की जा रही थी। आरोप है कि इस सभा में आसपास के 20 से अधिक गांवों के आदिवासी परिवारों को बुलाकर उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा था। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद मिले। ऋषभदेव के पुलिस उपाधीक्षक राजीव राहर ने बताया कि कुछ ग्रामीणों ने शिकायत दी थी कि उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रलोभन और कथित दबाव दिया जा रहा है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संबंधित लोगों को हिरासत में लिया और बाद में 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। थानाधिकारी हेमंत अहारी के अनुसार, सभा में शामिल लोगों को विभिन्न प्रकार के लाभों का आश्वासन दिए जाने के आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर आदिवासी परिवारों को लक्ष्य बनाकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा था। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें आर्थिक सहायता, कृषि सुविधाएं और अन्य लाभ देने के प्रस्ताव भी दिए गए। पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि उसे और उसके परिवार को भी धर्म परिवर्तन के लिए प्रोत्साहित किया गया था। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। फिलहाल यह जांच की जा रही है कि सभा का आयोजन किस उद्देश्य से किया गया था, इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी और क्या वास्तव में किसी प्रकार का प्रलोभन या दबाव दिया गया था। जांच एजेंसियां आरोपियों के मोबाइल डेटा, वित्तीय लेन-देन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच कर रही हैं ताकि मामले के सभी पहलुओं को स्पष्ट किया जा सके। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। उल्लेखनीय है कि धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में राजस्थान में कानून के तहत प्रलोभन, दबाव या धोखे से किए गए धर्म परिवर्तन के आरोप गंभीर श्रेणी में माने जाते हैं।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
Read more 31st Aug 2022
राष्ट्रीय न्यूज़: भोपाल। मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के चुनाव में मंगलवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा खारिज कर दिया गया। भारतीय जनता पार्टी द्वारा उठाई गई आपत्ति के बाद यह निर्णय लिया गया। भाजपा का आरोप था कि मीनाक्षी नटराजन ने हैदराबाद की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी अपने नामांकन पत्र में उल्लेखित नहीं की, जिसके आधार पर उनके नामांकन की वैधता पर सवाल उठाए गए थे। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान पर्यवेक्षक द्वारा मीनाक्षी नटराजन को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। जवाब पर विचार करने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन निरस्त करने का फैसला सुनाया। इस निर्णय के बाद राज्यसभा चुनाव की राजनीतिक तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रेरित बताते हुए फैसले का विरोध किया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है और उन्हें केवल अदालत से नोटिस प्राप्त हुआ था। उन्होंने दावा किया कि नामांकन रद्द करने का निर्णय तथ्यात्मक और कानूनी रूप से गलत है तथा कांग्रेस इस फैसले को अदालत में चुनौती देगी। नामांकन जांच प्रक्रिया के दौरान विधानसभा परिसर में राजनीतिक तनाव भी देखने को मिला। कांग्रेस और भाजपा नेताओं के बीच तीखी बहस, नारेबाजी और हंगामे की स्थिति बन गई। कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे और विक्रांत भूरिया ने रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष में प्रवेश करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस और विधानसभा सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोक दिया। इसी बीच कांग्रेस अपने विधायकों को बाड़ाबंदी के तहत बेंगलुरु भेजने की तैयारी कर रही थी। पार्टी के लिए विशेष चार्टर्ड विमान भोपाल पहुंचा था, लेकिन एयरपोर्ट अथॉरिटी द्वारा प्रारंभिक स्तर पर उड़ान की अनुमति नहीं दिए जाने से विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के दबाव में विमान को रोका जा रहा है। हालांकि करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद चार्टर्ड फ्लाइट को अनुमति मिल गई और शाम करीब साढ़े छह बजे विमान ने बेंगलुरु के लिए उड़ान भरी। बताया गया कि विमान में 38 विधायक सहित कुल 75 लोग सवार थे। लेकिन उड़ान भरने के तुरंत बाद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने की सूचना मिलने पर विमान को वापस लौटना पड़ा। इसके बाद कांग्रेस की आगे की रणनीति को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में इस घटनाक्रम को कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस अदालत में क्या कानूनी कदम उठाती है और राज्यसभा चुनाव की आगामी प्रक्रिया पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।
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राष्ट्रीय न्यूज़: अजमेर , 09 जून। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने चंडीगढ प्रवास के दौरान आज मंगलवार को लोक भवन पंजाब में राज्यपाल श्री गुलाबचंद कटारिया से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष श्री देवनानी ने राज्यपाल श्री कटारिया का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया तथा राजस्थान विधानसभा का स्मृति चिह्न भेंट कर अभिवादन किया। श्री देवनानी ने राज्यपाल श्री कटारिया को विधानसभा भवन के विभिन्न द्वारों के नामकरण की अवधारणा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विधानसभा के प्रमुख द्वारों को कर्तव्य द्वार, शक्ति द्वार, सुशासन द्वार, संकल्प द्वार एवं शौर्य द्वार नाम देकर लोकतंत्र के मूल आदर्शों और जनप्रतिनिधियों के दायित्वों को प्रतीकात्मक रूप से अभिव्यक्त किया गया है। उन्होंने श्री कटारिया को बताया कि विधानसभा भवन के बाहरी द्वारों को राजस्थान के विभिन्न अंचलों बृज, शेखावाटी, वागड, हाड़ौती, मारवाड़, मेवाड़, मेरवाड़ा एवं ढूंढाड़ के नाम समर्पित कर राज्य की सांस्कृतिक विविधता, लोक परंपराओं और क्षेत्रीय गौरव को लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया गया है। राज्यपाल श्री कटारिया ने स्पीकर श्री देवनानी की इस पहल को लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनभावनाओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया तथा कहा कि ऐसे नवाचार लोकतंत्र के प्रति नागरिकों में आत्मीयता और गौरव का भाव विकसित करते हैं। भेटवार्ता के दौरान दोनों जनप्रतिनिधियों के मध्य समसामयिक विषयों, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा जनसेवा से जुड़े विभिन्न विषयों पर आत्मीय चर्चा हुई। श्री देवनानी ने राज्यपाल श्री कटारिया के दीर्घ सार्वजनिक जीवन, प्रशासनिक अनुभव एवं समाज के प्रति उनके योगदान की सराहना की ।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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