राजस्थान न्यूज़: जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रामजल सेतु लिंक परियोजना को लेकर उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों को तेजी से काम करने और परियोजना को मिशन मोड में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित इस बैठक में उन्होंने बताया कि परियोजना की डीपीआर का तकनीकी परीक्षण केन्द्रीय जल आयोग द्वारा पूरा कर लिया गया है। उन्होंने अधिकारियों को परियोजना के वित्त पोषण के लिए पीआईबी नोट को शीघ्र अंतिम रूप देने और केंद्र सरकार से समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना से प्रदेश के आमजन को निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित होगी, इसलिए सभी कार्यों को तय समयसीमा में पूरा किया जाए। उन्होंने परियोजना के विभिन्न घटकों में प्रगति की समीक्षा करते हुए नियमित मॉनिटरिंग, मासिक प्रगति रिपोर्ट और सतत पर्यवेक्षण के निर्देश भी दिए। साथ ही परियोजना से प्रभावित लोगों को मुआवजा देने की प्रक्रिया को भी प्राथमिकता से पूरा करने को कहा। उन्होंने बीसलपुर से मोर सागर (अजमेर), ईसरदा से बंध बारैठा (भरतपुर), ईसरदा से रामगढ (जयपुर), खुरा चैनपुुरा से जयसमंद (अलवर) एवं ब्राह्मणी बैराज के कार्यों की विस्तृत जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। शर्मा ने परियोजना के विभिन्न घटकों के अलाइनमेंट की जानकारी भी ली और परियोजना से संबंधित समस्त कार्यों का सघन पर्यवेक्षण करने के निर्देश दिए। बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री शर्मा को अवगत कराया कि नवनेरा बैराज और ईसरदा बांध का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। रामगढ़ बैराज एवं महलपुर बैराज के काफर डेम एवं डेªनेज फीडर का कार्य पूरा कर लिया गया है। उन्होंने नवनेरा बैराज से मेज एनीकट के डूब क्षेत्र तक फीडर निर्माण एवं चम्बल एक्वाडक्ट के निर्माण कार्य, मेज एनीकट से गलवा बांध के डूब क्षेत्र तक फीडर ड्रेन, गलवा बांध से ईसरदा डूब क्षेत्र और बीसलपुर डूब क्षेत्र फीडर निर्माण की प्रगति से भी अवगत कराया।
Read more 1st Apr 2026
राजस्थान न्यूज़: राजस्थान पंचायत और शहरी निकाय चुनाव को लेकर काफी समय से इंतजार किया जा रहा है। वहीं विपक्ष भी लगातार सरकार पर जबरन चुनाव नहीं कराने का आरोप लगा रही है. विपक्ष का दावा है कि OBC रिपोर्ट की आड़ में चुनाव नहीं कराया जा रहा है। साथ ही यह दावा है कि सरकार अभी चुनाव कराएगी तो उसे हारने का डर सता रहा है. वहीं चुनाव को लेकर नया अपडेट सामने आया है। जिसमें साफ हो गया है कि अभी सितंबर तक निकाय चुनाव के कोई आसार नहीं हैं राजस्थान में पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनावों को लेकर तस्वीर अब लगभग साफ हो चुकी है। राज्य सरकार द्वारा ओबीसी (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग का कार्यकाल 30 सितंबर तक बढ़ाए जाने के बाद अब सितंबर तक चुनाव होने की संभावना लगभग खत्म हो गई है। ऐसे में चुनाव अक्टूबर तक टलते नजर आ रहे हैं। क्यों टल रहे हैं चुनाव निकाय और पंचायतीराज चुनावों में सबसे बड़ा पेंच ओबीसी आरक्षण को लेकर फंसा हुआ है। आयोग की रिपोर्ट के बिना सीटों का आरक्षण तय नहीं किया जा सकता, जिससे पूरी चुनाव प्रक्रिया अटकी हुई है। आयोग को जिलों से मिले आंकड़ों में खामी मिली कई पंचायतों के जनसंख्या डेटा अधूरे या गलत मिले हैं. जनाधार के डेटा से भी आयोग ने रिपोर्ट में मदद ली, लेकिन उसमें भी गड़बड़ दिखी। तकरीबन 400 गांव में तो इस रिकॉर्ड के मुताबिक ओबीसी की कोई आबादी ही नहीं थी। साथ ही एससी-एसटी और ओबीसी का सही अनुपात तय नहीं हो पा रहा. इसी कारण आयोग समय पर रिपोर्ट नहीं दे पाया और कार्यकाल बढ़ाना पड़ा। सितंबर तक क्यों बढ़ाया कार्यकाल ऐसा माना जा रहा है कि सरकार की मंशा ट्रिपल टेस्ट कि है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट के “ट्रिपल टेस्ट” नियम के तहत सही सर्वे और डेटा के आधार पर ही आरक्षण लागू किया जाए, ऐसा सरकार से जुड़े लोगों का मानना है. पहले 31 मार्च तक रिपोर्ट आने की उम्मीद थी, लेकिन डेटा अधूरा होने से सर्वे दोबारा करना पड़ रहा है। अब यह प्रक्रिया सितंबर तक पूरी होने की संभावना जताई जा रही है. आयोग का गठन सरकार ने मई 2025 में किया था, इसके बाद आयोग की रिपोर्ट में लग रहे वक्त के चलते इसकी मियाद एक बार फिर बढ़ाई गई है।
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राजस्थान न्यूज़: राजस्थान में ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग ने जिला प्रमुख, प्रधान और सरपंचों के मानदेय में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत अब सरपंचों को 7347 रुपये, प्रधानों को 12,858 रुपये और जिला प्रमुखों को 18,368 रुपये मासिक मानदेय मिलेगा। इस फैसले से प्रदेश की 12 जिला परिषदों के प्रमुखों और उनसे जुड़ी 78 पंचायत समितियों के प्रधानों को सीधा लाभ मिलेगा। हालांकि इस बढ़ोतरी का लाभ उन पूर्व सरपंचों को नहीं मिलेगा, जो वर्तमान में ग्राम पंचायतों में प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे हैं। गौरतलब है कि प्रदेश की लगभग सभी ग्राम पंचायतों में जनवरी 2025 से पूर्व सरपंच ही प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। सरपंच संघ के प्रवक्ता रफीक पठान के अनुसार करीब 11 हजार ग्राम पंचायतों में पूर्व सरपंच प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें किसी प्रकार का मानदेय नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में इस मुद्दे को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है कि प्रशासकों को भी मानदेय दिया जाना चाहिए।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
Read more 31st Aug 2022
राष्ट्रीय न्यूज़: भारतीय रेलवे द्वारा रेल परिचालन में संरक्षा को और मजबूत करने के क्रम में 30 मार्च, 2026 को वडोदरा - नागदा सेक्शन पर कवच 4.0 सिस्टम को सफलतापूर्वक कमीशन किया गया। इस अवसर पर वडोदरा स्टेशन से कवच प्रणाली से लैस स्पेशल ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गयी। इस प्रकार मिशन रफ़्तार के अंतर्गत मुंबई - नई दिल्ली मुख्य मार्ग के पश्चिम रेलवे के निर्धारित 693 रुट किलोमीटर में से 559.5 रुट किलोमीटर पर यानी अधिकतम रुट पर इस प्रणाली को स्थापित किया जा चुका है। वडोदरा - नागदा सेक्शन के अंतर्गत वडोदरा से मंगल महुडी सेक्शन (122.5 Rkm) और पंचपिपलिया - नागदा (102.01 Rkm) सेक्शन के बीच में यानी कुल 224.51 रुट किलोमीटर पर कवच प्रणाली को आज सफलतापूर्वक लांच किया गया है। मंगल महुडी से पंचपिपलिया के बीच इस प्रणाली को स्थापित करने का कार्य प्रगति पर है और जल्द ही इसे आटोमेटिक सिगनलिंग के साथ पूरा कर लिया जायेगा। वडोदरा मंडल द्वारा इससे पहले जनवरी 2026 में वडोदरा - विरार सेक्शन पर कवच सिस्टम चालू किया गया था और आज वडोदरा से गोधरा होते हुए नागदा तक इसे कमीशन किया गया है। कवच एक ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है और यह मानवीय गलतियों के जोखिम को कम करने के लिए ट्रेन सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत है। जो कि मानवीय त्रुटि के कारण 'सिग्नल पासिंग एट डेंजर' (SPAD) से होने वाले परिणामों को रोकती है। वडोदरा–नागदा सेक्शन पर इस जटिल कार्य के निष्पादन हेतु प्रत्येक स्टेशन तथा प्रत्येक एब्सोल्यूट/ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सेक्शन के लिए पृथक योजना तैयार की गई, पटरियों पर 6000 से अधिक स्थानों पर RFID टैग का प्रोग्रामिंग एवं स्थापना कार्य किया गया, 26 स्टेशनों, 13 मध्य-खंडों तथा लोकोमोटिव के बीच सतत रेडियो संचार की व्यवस्था सुनिश्चित की गई, प्रत्येक स्टेशन पर कुल 39 रेडियो संचार टावर एवं आवश्यक उपकरण स्थापित किए गए, पूरे मार्ग पर UP एवं DN दोनों दिशाओं में लगभग 600 किमी लंबाई की OFC केबल बिछाई गई, साथ ही प्रत्येक स्टेशन, मध्य-खंड एवं LC गेट पर आधुनिक ‘कवच’ उपकरण स्थापित कर उन्हें मौजूदा सिग्नलिंग प्रणाली से एकीकृत किया गया, लोकोमोटिव में भी ‘कवच’ उपकरण लगाए गए तथा अंततः संपूर्ण प्रणाली का सफलतापूर्वक ट्रायल एवं परीक्षण किया गया। 'कवच' प्रणाली अपने यूरोपीय समकक्षों (ETCS) की तुलना में बहुत सस्ती है। अभी तक WAP-7, WAG9, WAP5 लोकोमोटिव में कवच प्रणाली लगाई गयी है। जल्द ही, इसे दूसरे लोकोमोटिव पर भी शुरू किया जाएगा। भारतीय रेलवे आधुनिक एवं स्वदेशी तकनीकों को अपनाकर सुरक्षित, दक्ष एवं भविष्य उन्मुख रेल नेटवर्क के निर्माण हेतु निरंतर प्रतिबद्ध है।
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राष्ट्रीय न्यूज़: अजमेर/भोपाल 30 मार्च । राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने कहा है कि विधानसभा लोकतंत्र का मंदिर है। विधानसभा को शोर-शराबे का स्थान नहीं, बल्कि गंभीर, गरिमामय और रचनात्मक विचार-विमर्श का मंदिर बनाएं, जहाँ से जनकल्याण की दिशा तय हो और लोकतंत्र सशक्त बने। विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी सोमवार को मध्य प्रदेश विधानसभा में आयोजित दो दिवसीय युवा विधायकों के सम्मेलन के प्रारंभिक सत्र को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, विधानसभाध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर और प्रतिपक्ष के नेता भी मौजूद रहे। श्री देवनानी ने कहा कि विधानसभा केवल एक भवन नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा का प्रतीक होती है। यह वह मंच है जहाँ जनप्रतिनिधि जनता की आशाओं, अपेक्षाओं और समस्याओं को आवाज देते हैं। ऎसे पवित्र स्थल को शोर-शराबे, अव्यवस्था और हंगामे का केंद्र बनाना न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है, बल्कि जनता के विश्वास के साथ भी अन्याय है। श्री देवनानी ने कहा कि विधानसभा में सार्थक विचार-विमर्श के साथ तर्क, तथ्यों और मर्यादा के साथ चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विधानसभा में जनहित के मुद्दों पर गंभीरता से बहस हो, नीतियों का सूक्ष्म विश्लेषण किया जाए और सकारात्मक समाधान खोजे जाएँ। स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान यही है कि मतभेद होते हुए भी संवाद की गरिमा बनी रहे। जनप्रतिनिधियों को चाहिए कि वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन संयम, शालीनता और अनुशासन के साथ करें। व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर राज्य और राष्ट्रहित को सर्वाेपरि रखें। जब विधानसभा में सार्थक बहस होगी, तभी नीतियाँ प्रभावी बनेंगी और जनता का विश्वास मजबूत होगा। देवनानी ने कहा कि यह मंच केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के भविष्य को एक नई दिशा देने का संवाद मंच है। तीन प्रदेशों का यह युवा संगम का मूल दर्शन संसदीय कूटनीति और साझा विधायी मूल्यों को गरिमामय बनाना है। उन्होंने कहा कि लोकतन्त्र में जनता के चुने प्रतिनिधियों और नागरिकों की भूमिका में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। युवा विधायकों को विधायिका का प्रमुख आधार बन कर और पूरी प्रतिबद्धता और सक्रियता के साथ अपने निर्वाचन क्षेत्रों की तरह ही विधायिका के काम को भी पूरा महत्व देना चाहिए तभी वे जनता के बीच अपनी प्रतिभा की छाप छोड़ सकेंगे। युवा नेतृत्व की क्षमता नवीन दृष्टि विकास की नीति निर्धारण में अहम साबित हो सकती है। उन्हें नागरिकों और विधायिका के बीच का अंतराल पाटना होगा और आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए विकास में अपनी सार्थक सहभागिता की भूमिका को साबित करना होगा। विधानसभाध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी का सोच है कि विकसित भारत@2047 का संकल्प पूरा करने के लिए हर जन प्रतिनिधि विशेष कर युवा जनप्रतिनिधियों अपना सक्रिय योगदान दे। विकसित भारत@2047 का संकल्प तक पूरा नहीं सकेगा जब तक समाज के अन्तिम छोर पर बैठे व्यक्ति का विकास नहीं होता। श्री देवनानी ने सम्मेलन में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के 45 वर्ष से कम आयु के विधायकों की भागीदारी को “विधायी ऊर्जा का त्रिवेणी संगम” बताया और कहा कि युवा जनप्रतिनिधि देश के एक बड़े वर्ग ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’ का प्रतिनिधित्व करते हैं इसलिए नीति-निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी भविष्य की आवश्यकताओं को दिशा दे सकती है।
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अग्निवीर सेना भर्ती रैली, 20 जून के अभ्यर्थी देंगे 26 जून को रिपोर्ट
अग्निवीर सेना भर्ती रैली, 0 जून के अभ्यर्थी देंगे 26 जून को रिपोर्ट अजमेर, 19 जून। सेना भर्ती कार्यालय जोधपुर के निदेशक (भर्ती) कर्नल दीपांकर बसु ने बताया कि अजमेर में चक्रवात के कारण हुई अतिवृष्टि से अग्निवीर सेना भर्ती रैली के कार्यक्रम में परिवर्तन किया गया है। इसके कारण 20 जून को कायड़ विश्राम स्थली में रिपोर्ट करने वाले अभ्यर्थी अब 26 जून को प्रातः 2 बजे कायड़ विश्राम स्थली पर रिपोर्ट करेंगे।
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