राजस्थान न्यूज़: जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दिल्ली में 10 जनपथ पर हुई सोनिया गांधी के साथ बैठक को लेकर कहा कि मीडिया को इसमें कोई बड़ा राजनीतिक गुणा-भाग या नया राजनीतिक परिदृश्य खोजने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बैठक राजीव गांधी नेशनल रिलीफ एंड वेलफेयर सोसाइटी के ट्रस्ट से जुड़ी नियमित बैठक थी। गहलोत ने कहा कि बैठक में सभी ट्रस्टियों को आमंत्रित किया गया था और यह पूरी तरह गैर-राजनीतिक तथा संस्थागत बैठक थी। उन्होंने कहा कि इस बैठक को राजस्थान कांग्रेस संगठन या किसी राजनीतिक कयासबाजी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में राहुल गांधी के दो वर्ष पूरे होने पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि इन दो सालों में राहुल गांधी ने देश की राजनीति पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने संसद के भीतर और बाहर जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाया है और विपक्ष की जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से निभाया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी ने जिस प्रकार सदन में अपनी शुरुआत की, वह ऐतिहासिक रही। उनके अनुसार, पहली बार ऐसा देखने को मिला कि प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और कई वरिष्ठ मंत्रियों को उनकी स्पीच के दौरान खड़े होकर अपनी बात रखनी पड़ी। गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी लगातार किसानों, मजदूरों, गरीबों और देश के समग्र विकास से जुड़े विषयों को उठा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि सरकार की नीतियों और कमियों को राहुल गांधी लगातार पुरजोर तरीके से सामने रखते हैं। वे देश की आवाज को सदन के अंदर भी और बाहर भी मजबूती से बुलंद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष का असली दायित्व आम जनता की भावनाओं, समस्याओं और अपेक्षाओं को सत्ता पक्ष के सामने रखना होता है और राहुल गांधी इस जिम्मेदारी को सफलतापूर्वक निभा रहे हैं। NEET मुद्दे पर बड़ा आंदोलन खड़ा किया: गहलोत पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि संसद के बाहर भी INDIA गठबंधन के नेता जनता से जुड़े मुद्दों पर लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल ही में NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दे को लेकर राहुल गांधी ने पूरे देश में बड़ा आंदोलन खड़ा किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का नेता प्रतिपक्ष के रूप में दो साल का कार्यकाल बेहद शानदार और ऐतिहासिक रहा है।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को दुर्गापुरा में ‘संविधान हत्या दिवस’ के अवसर पर आयोजित लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह में बड़ी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों की मासिक पेंशन में 5 हजार रुपए की वृद्धि करते हुए इसे 25 हजार रुपए करने तथा मासिक चिकित्सा सहायता में 1 हजार रुपए की वृद्धि करते हुए इसे 5 हजार रुपए करने की घोषणा की। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि 25 जून 1975 को तत्कालीन सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल ने संविधान और लोकतंत्र की आत्मा को कुचलने का काम किया था। उन्होंने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का ऐसा दौर था, जिसमें नागरिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर प्रहार किया गया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों ने कठिन परिस्थितियों में भी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। ऐसे सेनानियों का सम्मान करना राज्य सरकार का दायित्व है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के त्याग और संघर्ष को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि लोकतंत्र और संविधान के महत्व को समाज बेहतर ढंग से समझ सके। पेंशन और चिकित्सा सहायता में बढ़ोतरी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने समारोह में घोषणा की कि लोकतंत्र सेनानियों की मासिक पेंशन अब 25 हजार रुपए की जाएगी। इसके साथ ही मासिक चिकित्सा सहायता भी बढ़ाकर 5 हजार रुपए की जाएगी। सरकार के इस निर्णय से लोकतंत्र सेनानियों को आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी सहायता में राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री भजनलालशर्मा ने कहा कि राज्य सरकार लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया, उनका योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा। सरकार ऐसे सेनानियों के सम्मान को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक कृतज्ञता का प्रतीक मानती है।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। यमुना जल प्रोजेक्ट को लेकर राजस्थान के लिए 29 जून का दिन महत्वपूर्ण हो सकता है। सूत्रों के अनुसार सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में जल शक्ति मंत्रालय, राजस्थान सरकार और हरियाणा सरकार के बीच मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट यानी एमओए पर हस्ताक्षर होंगे। इस दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी मौजूद रहेंगे। इस एमओए में यमुना जल प्रोजेक्ट को लेकर राजस्थान और हरियाणा के बीच जल मात्रा, परियोजना की लागत, निर्माण, संचालन, रखरखाव और जल वितरण से जुड़ी अंतिम शर्तें निर्धारित की जाएंगी। माना जा रहा है कि यह समझौता शेखावाटी क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही पानी की मांग को धरातल पर उतारने की दिशा में निर्णायक कदम साबित हो सकता है। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई को बाड़मेर में पचपदरा रिफाइनरी के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान इस परियोजना को लेकर बड़ी घोषणा कर सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक कार्यक्रम या घोषणा का इंतजार है।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
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अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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राष्ट्रीय न्यूज़: अयोध्या। अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। मंदिर व्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहे मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव को भी व्यवस्था से अलग किए जाने की जानकारी सामने आ रही है। इस पूरे मामले के बाद अब ट्रस्ट के पुनर्गठन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। चंपत राय के पास राम मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं की बड़ी जिम्मेदारी थी। उनके बाद ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भी मंदिर संचालन और व्यवस्था से जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती थी। सूत्रों के मुताबिक, चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट और एफआईआर दर्ज होने के बाद यह कदम उठाया गया है। सीएम योगी के अयोध्या दौरे के बाद बढ़ी थी चर्चा करीब एक सप्ताह पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या दौरे पर गए थे। उस दौरान चंपत राय को मुख्यमंत्री के दौरे से दूर रखे जाने की बात सामने आई थी। तभी से यह चर्चा तेज हो गई थी कि ट्रस्ट के भीतर कुछ बड़े बदलाव हो सकते हैं। अब चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद इन चर्चाओं को और बल मिला है। सूत्रों के अनुसार, मंदिर व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी आधिकारिक स्तर पर विस्तृत घोषणा का इंतजार है। चढ़ावा चोरी मामले में दर्ज हुई थी पहली FIR चढ़ावा चोरी मामले में गुरुवार देर शाम श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर पहली एफआईआर दर्ज कराई गई थी। यह एफआईआर एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई। एफआईआर में 8 लोगों को आरोपी बनाया गया है, लेकिन चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा सहित ट्रस्ट के अन्य बड़े पदाधिकारियों के नाम शामिल नहीं हैं। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने गुरुवार देर रात कार्रवाई करते हुए रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू सहित सभी 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों से पूछताछ के बाद शुक्रवार को उनका मेडिकल कराया गया और फिर सभी को अदालत में पेश किया गया।8 आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत शुक्रवार को सभी 8 आरोपियों को सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। पुलिस और एसआईटी अब इस बात की जांच कर रही हैं कि चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी कैसे हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। मामला धार्मिक आस्था और श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़ा होने के कारण बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। देशभर से श्रद्धालु राम मंदिर में दान और चढ़ावा अर्पित करते हैं। ऐसे में इस मामले ने ट्रस्ट की आंतरिक व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रस्ट के पुनर्गठन की संभावना सूत्रों का कहना है कि इस मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जा सकता है। मंदिर व्यवस्था में नई जिम्मेदारियां तय की जा सकती हैं और चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े नियमों को अधिक सख्त किया जा सकता है। ट्रस्ट की वित्तीय निगरानी, दान संग्रह, रिकॉर्ड प्रबंधन और आंतरिक ऑडिट व्यवस्था को मजबूत करने पर भी विचार हो सकता है। फिलहाल पुलिस, एसआईटी और प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी है। आने वाले दिनों में आरोपियों से पूछताछ और दस्तावेजी जांच के आधार पर और खुलासे हो सकते हैं। चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद यह मामला अब ट्रस्ट की जवाबदेही और पुनर्गठन से भी जुड़ गया है।
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राष्ट्रीय न्यूज़: भोपाल/जबलपुर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान से जुड़े मानहानि मामले की सुनवाई मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में हुई। सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से लिखित आवेदन पेश किया गया, जिसमें उन्होंने अपने पुराने बयान पर खेद व्यक्त किया है। राहुल गांधी ने अपने आवेदन में कहा कि उनका बयान कार्तिकेय सिंह चौहान के संदर्भ में नहीं था और उसे उसी रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बयान को गलत संदर्भ में लिया गया। मामले की सुनवाई जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ में हुई। कोर्ट ने राहुल गांधी के आवेदन पर शिकायतकर्ता कार्तिकेय सिंह चौहान से जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता का पक्ष सामने आने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। अब मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होगी। राहुल गांधी द्वारा खेद व्यक्त किए जाने के बाद इस मामले में समझौते की संभावना बढ़ गई है। हालांकि, अंतिम निर्णय अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें और शिकायतकर्ता के जवाब के बाद ही होगा। यह मामला राहुल गांधी के पुराने राजनीतिक बयान से जुड़ा है, जिसे लेकर कार्तिकेय सिंह चौहान की ओर से मानहानि की शिकायत की गई थी। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप था कि बयान से उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची। वहीं राहुल गांधी की ओर से अब कहा गया है कि उनका बयान व्यक्तिगत रूप से कार्तिकेय के संदर्भ में नहीं था। हाईकोर्ट में राहुल गांधी के आवेदन के बाद अब सभी की नजर कार्तिकेय सिंह चौहान के जवाब पर रहेगी। यदि शिकायतकर्ता पक्ष राहुल गांधी के खेद को स्वीकार करता है, तो मामले में समझौते की राह खुल सकती है। फिलहाल अदालत ने कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है। कोर्ट ने शिकायतकर्ता से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई में मामले की आगे की दिशा तय होगी।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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