राजस्थान न्यूज़: जोधपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने रविवार को जोधपुर एयरपोर्ट पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित कार्यक्रम की तैयारियों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने एयरपोर्ट के नवीन टर्मिनल भवन का जायजा लिया और अधिकारियों से तैयारियों की विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं समय पर और सुव्यवस्थित रूप से पूरी की जाएं। उन्होंने सुरक्षा, यातायात, अतिथि व्यवस्था, आवागमन, पार्किंग और कार्यक्रम स्थल से जुड़ी तैयारियों की समीक्षा की। नवीन टर्मिनल भवन का किया निरीक्षण मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से भवन की सुविधाओं, यात्री क्षमता, सुरक्षा व्यवस्थाओं और उद्घाटन कार्यक्रम से जुड़ी तैयारियों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए और सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। जोधपुर एयरपोर्ट का नया टर्मिनल पश्चिमी राजस्थान की हवाई कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके शुरू होने से यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी और जोधपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन, व्यापार और निवेश को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन, पुलिस, एयरपोर्ट अथॉरिटी और संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए सभी व्यवस्थाएं निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रहे, आमजन को असुविधा न हो और कार्यक्रम से जुड़े सभी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं। उन्होंने विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया। जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण और जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित कार्यक्रम की तैयारियों और नए टर्मिनल भवन से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री के निरीक्षण के बाद प्रशासनिक स्तर पर तैयारियों को और तेज कर दिया गया है। प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे को देखते हुए जोधपुर एयरपोर्ट और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
Read more 28th Jun 2026
राजस्थान न्यूज़: जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर सिविल सेवा परीक्षा-2025 और भारतीय वन सेवा परीक्षा-2025 में चयनित राजस्थान के निवासी अभ्यर्थियों से संवाद किया। इस अवसर पर चयनित अभ्यर्थियों के परिजन भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने युवाओं से उनकी तैयारी, संघर्ष, अनुभव और सफलता की यात्रा के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने चयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सिविल सेवा और भारतीय वन सेवा जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि इन युवाओं की मेहनत, अनुशासन और समर्पण प्रदेश के अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनेगा। युवाओं से जाने तैयारी के अनुभव संवाद के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अभ्यर्थियों से पूछा कि उन्होंने परीक्षा की तैयारी के दौरान किन चुनौतियों का सामना किया और सफलता के लिए किस तरह की रणनीति अपनाई। अभ्यर्थियों ने अपनी तैयारी, समय प्रबंधन, अध्ययन पद्धति और परिवार के सहयोग से जुड़े अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए धैर्य, निरंतरता और सही दिशा में मेहनत बेहद जरूरी है। उन्होंने चयनित अभ्यर्थियों से आह्वान किया कि वे भविष्य में प्रशासनिक सेवा के माध्यम से जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। परिजनों को भी दी बधाई मुख्यमंत्री ने अभ्यर्थियों के परिजनों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि किसी भी विद्यार्थी की सफलता में परिवार का त्याग, समर्थन और विश्वास बड़ी भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के युवाओं ने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर प्रदेश का मान बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को आगे बढ़ाने, शिक्षा और अवसरों को मजबूत करने तथा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि चयनित अभ्यर्थी प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन संवेदनशीलता, ईमानदारी और जनसेवा की भावना से करेंगे। अधिकारी और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद इस अवसर पर ऊर्जा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार हीरालाल नागर, मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारीगण और अन्य विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में चयनित अभ्यर्थियों और उनके परिवारों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित यह संवाद कार्यक्रम युवाओं की उपलब्धि का सम्मान करने के साथ-साथ प्रदेश के अन्य विद्यार्थियों को प्रेरित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया। चयनित अभ्यर्थियों ने भी सरकार की इस पहल के लिए आभार व्यक्त किया।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट-2024 के तहत राज्य सरकार द्वारा देश-विदेश के निवेशकों के साथ किए गए 45.22 लाख करोड़ रुपए के 22,299 एमओयू में से अब तक 3,895 परियोजनाओं पर ग्राउंड ब्रेकिंग शुरू हो सकी है। इन परियोजनाओं में 8.01 लाख करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है और इनके माध्यम से 2,88,302 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना जताई गई है। यह जानकारी उद्योग मंत्री ने विधानसभा में किशनपोल से कांग्रेस विधायक अमीन कागजी के प्रश्न के लिखित जवाब में दी। सरकार ने इसे निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। हालांकि, बड़ी संख्या में निवेश प्रस्ताव अभी भी विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं। विधानसभा में दिए गए जवाब में सरकार ने स्वीकार किया कि कई निवेश प्रस्ताव भूमि आवंटन, आवश्यक स्वीकृतियों, बाजार परिस्थितियों में बदलाव और निवेशकों के स्तर पर लिए गए निर्णयों के कारण आगे नहीं बढ़ पाए हैं। भूमि आवंटन और स्वीकृतियों में अटके कई प्रस्ताव सरकार के अनुसार, निवेश प्रस्तावों को गति देने के लिए डायरेक्ट अलॉटमेंट पॉलिसी-2025 और राजस्थान लैंड अलॉटमेंट पॉलिसी-2025 लागू की गई है। इन नीतियों का उद्देश्य निवेशकों को भूमि आवंटन और परियोजनाओं की स्थापना से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल और तेज बनाना है। सरकार का दावा है कि निवेश प्रस्तावों की नियमित निगरानी की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक एमओयू को धरातल पर उतारा जा सके। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, कई प्रस्ताव स्वीकृतियों और विभागीय प्रक्रियाओं में लंबित हैं। वहीं, कुछ निवेशकों ने बाजार की बदली परिस्थितियों या व्यावसायिक कारणों से परियोजनाओं को आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया है। ऐसे मामलों में संबंधित एमओयू की समीक्षा की जा रही है। उद्योग विभाग में सबसे ज्यादा एमओयू राइजिंग राजस्थान के तहत सबसे अधिक एमओयू उद्योग विभाग में हुए हैं। सरकार के अनुसार, उद्योग विभाग में 13,341 एमओयू किए गए, जिनमें 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। वहीं ऊर्जा क्षेत्र में 35.26 लाख करोड़ रुपए के निवेश से जुड़े 1,390 एमओयू हुए हैं। इससे स्पष्ट है कि राज्य सरकार ने औद्योगिक निवेश और ऊर्जा क्षेत्र को निवेश आकर्षण का प्रमुख आधार बनाया है। हालांकि, ग्राउंड ब्रेकिंग के स्तर पर अब तक सबसे अधिक 1,396 परियोजनाएं उद्योग विभाग से संबंधित हैं। इन परियोजनाओं में 76,080 करोड़ रुपए का निवेश और 85,148 रोजगार संभावित बताए गए हैं। ऊर्जा विभाग की 472 परियोजनाओं पर ग्राउंड ब्रेकिंग हुई है, जिनमें 6,15,995 करोड़ रुपए का निवेश और 39,256 रोजगार संभावित हैं। कई एमओयू रद्द करने के अनुरोध विधानसभा में यह भी बताया गया कि कुछ निवेश प्रस्तावों पर आगे बढ़ने की संभावना कम है। एमओयू के दोहराव, बदली हुई बाजार परिस्थितियों और निवेशकों की ओर से परियोजना नहीं लगाने के निर्णय के चलते कई समझौतों को निरस्त करने का अनुरोध किया गया है। कुछ प्रस्ताव स्वीकृति की कसौटी पर खरे नहीं उतरने के कारण भी रद्द किए जाने की प्रक्रिया में हैं। हालांकि, सरकार ने ऐसे एमओयू की संख्या का खुलासा नहीं किया है। निवेश प्रस्तावों की स्थिति को देखते हुए सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती एमओयू को वास्तविक निवेश और रोजगार में बदलने की है। राइजिंग राजस्थान के तहत किए गए बड़े निवेश दावों को लेकर अब विपक्ष भी सरकार से यह पूछ रहा है कि कितने प्रस्ताव धरातल पर उतरे और कितने अभी कागजों में ही लंबित हैं।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
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अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में भारत की रक्षा क्षमता, स्वदेशी विमान निर्माण, योग, समाजसेवा, खेल और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई प्रेरक उदाहरणों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समुद्र से लेकर आसमान तक भारत सुरक्षित है। प्रधानमंत्री ने हाल में सफलतापूर्वक परीक्षण की गई जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का जिक्र करते हुए देश की बढ़ती रक्षा शक्ति को आत्मनिर्भर भारत की उपलब्धि बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जून महीने में देश ने विमानन क्षेत्र में भी एक बड़ी सफलता हासिल की है। मेड इन इंडिया अभियान के तहत तैयार C-295 विमान ने अपनी पहली सफल उड़ान पूरी कर ली है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ऐसे 40 विमान भारत में ही बनाए जा रहे हैं। यह उपलब्धि भारत की स्वदेशी निर्माण क्षमता और रक्षा उत्पादन में बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाती है। नौसेना में शामिल स्वदेशी जहाजों का किया उल्लेख प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल ही में उन्हें कोलकाता में नौसेना से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला। वहां INS दूनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि इन जहाजों की डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक सब कुछ स्वदेशी है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत आज रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। स्वदेशी तकनीक, भारतीय इंजीनियरिंग और देश के युवाओं की प्रतिभा के दम पर भारत समुद्र, जमीन और आसमान में अपनी सुरक्षा क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। योगासन चैम्पियनशिप में भारत ने जीते 114 पदक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से जुड़े कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस बार दुनिया के 2500 से अधिक स्थानों पर योग के कार्यक्रम आयोजित हुए। अहमदाबाद में आयोजित ‘विश्व योगासन चैम्पियनशिप’ की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने इसमें शानदार प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत ने इस चैम्पियनशिप में कुल 114 पदक जीते, जिनमें 102 गोल्ड मेडल शामिल हैं। इस प्रदर्शन के साथ भारत पदक तालिका में पहले स्थान पर रहा। उन्होंने कहा कि योग अब केवल स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और वैश्विक योगदान का प्रतीक बन चुका है। महाराष्ट्र के पेठकर परिवार की सराहना ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री मोदी ने महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के बहादुरपुरा गांव के पेठकर परिवार का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस परिवार ने घर में विवाह के अवसर पर अपने गांव के लगभग साढ़े तीन हजार लोगों के लिए दुर्घटना बीमा की व्यवस्था की। हर व्यक्ति को एक लाख रुपए का बीमा कवर दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सामाजिक अवसरों को समाजहित से जोड़ने की यह पहल प्रेरणादायक है। ऐसे उदाहरण दिखाते हैं कि समाज में सकारात्मक सोच और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना कैसे बड़े बदलाव ला सकती है। नगालैंड की बेबी लीग और विमेन फुटसल लीग को बताया प्रेरक प्रधानमंत्री मोदी ने नगालैंड में चल रही दो खेल लीगों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी को प्रेरित कर सकती हैं। उन्होंने नगालैंड बेबी लीग का जिक्र किया, जिसमें 5 से 12 वर्ष तक के बच्चे भाग लेते हैं। यह लीग बच्चों की रफ्तार, प्रतिभा और खेल भावना को प्रोत्साहित करती है और तीन वर्ष पूरे कर चुकी है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने नगालैंड विमेन फुटसल लीग की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि फुटसल को आम भाषा में इंडोर फुटबॉल कहा जाता है। इसमें पांच खिलाड़ी होते हैं और खेल छोटे मैदान पर तेज गति से खेला जाता है। इस खेल में खिलाड़ियों को तेजी से निर्णय लेने होते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी लीगों से युवाओं और महिलाओं में खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।असम के हरगिला पक्षी और ‘हरगिला आर्मी’ की कहानी प्रधानमंत्री मोदी ने असम के दुर्लभ पक्षी ‘हरगिला’ का जिक्र करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हरगिला प्रकृति को स्वच्छ रखने में अहम भूमिका निभाता है, लेकिन असम के कुछ इलाकों में लंबे समय तक इसे अशुभ माना जाता था। लोग इसे अपने आसपास देखना पसंद नहीं करते थे और कई बार उन पेड़ों को भी काट दिया जाता था, जिन पर हरगिला के घोंसले होते थे। प्रधानमंत्री ने जीव-विज्ञानी पूर्णिमा देवी बर्मन के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पूर्णिमा देवी ने लोगों के मन में बैठी गलत धारणा को बदलने का संकल्प लिया। उन्होंने महिलाओं और ग्रामीणों को विज्ञान के आधार पर समझाया। धीरे-धीरे महिलाएं इस अभियान से जुड़ती गईं और एक बड़ा बदलाव शुरू हुआ। पीएम मोदी ने कहा कि जिस पक्षी को कभी अशुभ मानकर भगाया जाता था, वही गांवों की पहचान बनने लगा। हजारों ग्रामीण महिलाएं हरगिला को बचाने के लिए आगे आईं और आज वे ‘हरगिला आर्मी’ के नाम से जानी जाती हैं। उन्होंने कहा कि यह उदाहरण दिखाता है कि सही जानकारी और जागरूकता से वर्षों पुरानी सोच भी बदली जा सकती है। नालंदा विश्वविद्यालय ने शास्त्रार्थ परंपरा को किया जीवंत प्रधानमंत्री मोदी ने नालंदा विश्वविद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि इसने शास्त्रार्थ की प्राचीन भारतीय परंपरा को फिर से जीवंत किया है। उन्होंने कहा कि शास्त्रार्थ केवल अपनी बात रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह वाद-संवाद और मंथन की अनुशासित प्रक्रिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि शास्त्रार्थ में तर्क और तथ्य के साथ अपनी बात रखना जरूरी होता है। साथ ही दूसरों के विचारों को धैर्य से सुनने और समझने की सीख भी इसी प्रक्रिया से मिलती है। उन्होंने प्रसन्नता जताई कि नालंदा विश्वविद्यालय ने शास्त्रार्थ को अपने दीक्षांत समारोह का हिस्सा बनाया। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में कहा कि भारत की शक्ति केवल रक्षा, विज्ञान और तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की सकारात्मक पहल, खेल, योग, पर्यावरण संरक्षण और ज्ञान परंपरा भी देश की बड़ी ताकत हैं।
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राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी आईबी के स्पेशल डायरेक्टर महेश दीक्षित को देश की आंतरिक खुफिया एजेंसी का नया प्रमुख नियुक्त किया है। वे मौजूदा आईबी डायरेक्टर तपन कुमार डेका का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल 30 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। केंद्र सरकार ने महेश दीक्षित को दो वर्ष के लिए आईबी डायरेक्टर नियुक्त किया है। महेश दीक्षित 1993 बैच के आंध्र प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। वे फिलहाल इंटेलिजेंस ब्यूरो में स्पेशल डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थे और एजेंसी के दूसरे सबसे वरिष्ठ अधिकारी माने जाते थे। खुफिया तंत्र, आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। जम्मू-कश्मीर में भी संभाल चुके हैं अहम जिम्मेदारी महेश दीक्षित इससे पहले जम्मू-कश्मीर में सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी एसआईबी के प्रमुख रह चुके हैं। जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में काम करने के दौरान उन्होंने सुरक्षा, खुफिया समन्वय और आतंकवाद विरोधी अभियानों से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्हें आंतरिक सुरक्षा और खुफिया ऑपरेशन का अनुभवी अधिकारी माना जाता है। आईबी प्रमुख के रूप में महेश दीक्षित के सामने देश की आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद, साइबर चुनौतियों, कट्टरपंथी गतिविधियों, सीमा पार नेटवर्क और संगठित अपराध से जुड़े खुफिया तंत्र को और मजबूत करने की जिम्मेदारी होगी। बदलते सुरक्षा परिदृश्य में आईबी की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती तपन कुमार डेका का कार्यकाल 30 जून को होगा समाप्त मौजूदा आईबी डायरेक्टर तपन कुमार डेका का कार्यकाल 30 जून 2026 को पूरा हो रहा है। डेका 1988 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। वे जुलाई 2022 से इंटेलिजेंस ब्यूरो के प्रमुख पद पर कार्यरत थे। केंद्र सरकार ने उनके कार्यकाल को दो बार विस्तार दिया था। तपन कुमार डेका को भी आतंकवाद विरोधी मामलों और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषयों का अनुभवी अधिकारी माना जाता है। उनके कार्यकाल के दौरान आईबी ने कई संवेदनशील सुरक्षा मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब उनके स्थान पर महेश दीक्षित देश की आंतरिक खुफिया एजेंसी की कमान संभालेंगे। आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से अहम नियुक्ति इंटेलिजेंस ब्यूरो देश की प्रमुख आंतरिक खुफिया एजेंसी है। इसकी जिम्मेदारी देश के भीतर सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखना, आतंकवाद और आंतरिक खतरे से संबंधित इनपुट जुटाना तथा केंद्र और राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय करना है। महेश दीक्षित की नियुक्ति को आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में निरंतरता और अनुभव के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आईबी में लंबे समय तक कार्य करने और संवेदनशील क्षेत्रों में जिम्मेदारी संभालने के कारण वे एजेंसी की कार्यप्रणाली और सुरक्षा चुनौतियों से भली-भांति परिचित हैं। आने वाले समय में महेश दीक्षित के नेतृत्व में इंटेलिजेंस ब्यूरो की प्राथमिकता आतंरिक सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने, आधुनिक तकनीकी निगरानी क्षमता बढ़ाने और राज्यों के साथ खुफिया समन्वय को अधिक प्रभावी बनाने पर रह सकती है।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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