राजस्थान न्यूज़: राजस्थान सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए एक महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है। सहकारिता विभाग के ‘सहकार से समृद्धि’ अभियान के तहत अब ग्राम सेवा सहकारी समितियों (पैक्स) और प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों के माध्यम से ग्रामीणों को घर-घर बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण आबादी को उनके गांव और घर के निकट ही आधुनिक बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराना है। सहकारिता विभाग के शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां डॉ. समित शर्मा ने बुधवार को शासन सचिवालय में राजस्थान राज्य सहकारी बैंक के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में इस योजना की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने सभी सक्रिय प्राथमिक डेयरी समितियों को ‘बैंक मित्र’ के रूप में विकसित कर उन्हें माइक्रो एटीएम उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। डॉ. शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार का लक्ष्य 30 सितंबर 2026 तक 5,000 सहकारी समितियों और 31 मार्च 2027 तक सभी 12,000 सक्रिय प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों को बैंक मित्र बनाकर माइक्रो एटीएम उपलब्ध कराना है। इस योजना के लिए नाबार्ड की वित्तीय सहायता भी प्राप्त हो रही है। माइक्रो एटीएम के माध्यम से ग्रामीणों को खाते का बैलेंस देखने, नकद निकासी एवं जमा, वित्तीय लेन-देन, ऋण वितरण और ऋण जमा कराने जैसी कई सुविधाएं उपलब्ध होंगी। अब तक लगभग 2,700 पैक्स और 557 प्राथमिक डेयरी समितियों को माइक्रो एटीएम उपलब्ध कराए जा चुके हैं। योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि सहकारी बैंक अपने एफआईजी (FIG) पोर्टल पर ऐसी व्यवस्था विकसित कर रहे हैं, जिसके जरिए पैक्स और डेयरी समितियों के प्रबंधक ग्रामीणों के घर या कार्यस्थल तक पहुंचकर नए बैंक खाते खोल सकेंगे तथा जमा राशि संग्रहित कर सकेंगे। इससे ग्रामीणों को बैंक शाखाओं के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और बैंकिंग सेवाएं सीधे उनके द्वार तक पहुंच सकेंगी।
Read more 3rd Jun 2026
राजस्थान न्यूज़: जयपुर में मॉडिफाइड वाहनों, फर्जी नंबर प्लेटों तथा वाहनों पर लगे अनधिकृत बोर्ड, पोस्टर और लाल पट्टियों के खिलाफ परिवहन विभाग और यातायात पुलिस ने संयुक्त रूप से विशेष अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशों के बाद बुधवार से शहर के प्रमुख निकास मार्गों और टोल प्लाजा पर व्यापक जांच अभियान चलाया गया। अभियान के पहले ही दिन परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की संयुक्त टीमों ने 1000 से अधिक वाहनों की जांच की। जांच के दौरान विभिन्न नियमों के उल्लंघन के मामलों में 200 से अधिक चालान जारी किए गए। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान आगामी दिनों में भी जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आरटीओ प्रथम राजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि जांच के दौरान कई वाहनों पर नियम विरुद्ध बोर्ड, स्टिकर और अन्य पहचान चिह्न लगे मिले। एक मामले में स्विफ्ट कार (RJ01 CE 5434) की नंबर प्लेट के ऊपर “सचिव प्रदेश कांग्रेस कमेटी, राज.” का बोर्ड लगा हुआ पाया गया। परिवहन विभाग के अनुसार वाहन पर इस प्रकार का बोर्ड लगाना निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं था। जांच के बाद वाहन चालक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया और वाहन से बोर्ड को तत्काल हटवा दिया गया। अभियान के दौरान अधिकारियों ने फर्जी नंबर प्लेट, नंबर प्लेट के डिजाइन में बदलाव, अनधिकृत लाल-नीली बत्ती, सरकारी या राजनीतिक पदनाम लिखे बोर्ड, अवैध मोडिफिकेशन और अन्य यातायात नियम उल्लंघनों की भी जांच की। कई वाहनों पर निर्धारित मानकों के विपरीत नंबर प्लेट और संशोधित संरचनाएं पाई गईं, जिन पर नियमानुसार कार्रवाई की गई। परिवहन विभाग का कहना है कि सड़क सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों ने वाहन मालिकों से अपील की है कि वे अपने वाहनों पर केवल वैध और अनुमत पहचान चिह्न ही लगाएं तथा मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों का पालन करें। विभाग ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी टोल प्लाजा, प्रमुख मार्गों और शहर के विभिन्न हिस्सों में ऐसे विशेष अभियान चलाए जाएंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ चालान, जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
Read more 3rd Jun 2026
राजस्थान न्यूज़: जयपुर। जयपुर ग्रामीण क्षेत्र के मनोहरपुर थाना इलाके में भाजपा के स्थानीय नेता एवं अनुसूचित जाति मोर्चा के पूर्व मंडल अध्यक्ष रामवतार असवाल की निर्मम हत्या से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। अज्ञात बदमाशों ने सोमवार रात करीब 9 बजे धारदार हथियार से उनका गला रेतकर हत्या कर दी। मंगलवार सुबह उनका शव खून से लथपथ अवस्था में एक कबाड़ गोदाम में मिलने के बाद इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलते ही मनोहरपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हत्या धारदार हथियार से की गई है। साक्ष्य जुटाने के लिए फोरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड को भी मौके पर बुलाया गया। पुलिस आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और संदिग्धों की तलाश में जुटी हुई है। मृतक रामवतार असवाल (52) मनोहरपुर कस्बे में कबाड़ व्यवसाय से जुड़े हुए थे और भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता होने के साथ सामाजिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेते थे। उनकी हत्या की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण, परिजन और भाजपा कार्यकर्ता घटनास्थल पर पहुंच गए। घटना को लेकर लोगों में भारी रोष देखने को मिला। हत्या से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने मंगलवार सुबह मनोहरपुर थाने के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने हत्या के आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग रखी। परिजनों का कहना है कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होगी, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
Read more 2nd Jun 2026
अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
Read more 31st Aug 2022
राष्ट्रीय न्यूज़: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 58 विधायकों ने अलग गुट बनाते हुए विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष समर्थन पत्र सौंप दिया है। इस घटनाक्रम को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, ऋतब्रत बनर्जी और उनके समर्थक विधायकों ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रथींद्र बोस से मुलाकात कर 58 विधायकों के समर्थन वाला पत्र प्रस्तुत किया। पत्र में ऋतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता घोषित करने और उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा देने की मांग की गई। बताया जा रहा है कि नए गुट ने अपनी संगठनात्मक संरचना भी तय कर ली है। जावेद खान, संदीपन साहा और सिउली साहा को उपनेता जबकि अखरुज्जमान को मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) के रूप में प्रस्तावित किया है। विधानसभा सूत्रों के अनुसार स्पीकर द्वारा इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। प्रेस वार्ता में ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि दो अन्य विधायक भी उनके संपर्क में हैं और जल्द ही उनका समर्थन प्राप्त हो सकता है। उन्होंने अपने गुट को विधानसभा में वास्तविक विपक्षी शक्ति बताते हुए कहा कि यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों और संगठन के भीतर असंतोष के कारण उठाया गया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब नेता प्रतिपक्ष के चयन से जुड़े प्रस्ताव में कथित फर्जी हस्ताक्षरों के आरोपों के बाद टीएमसी ने ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया था। घटनाक्रम के बीच टीएमसी नेतृत्व ने भी संगठनात्मक स्तर पर बड़ा कदम उठाते हुए पश्चिम बंगाल में अपनी कई प्रमुख समितियों और फ्रंटल संगठनों को भंग कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को नियंत्रित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। वरिष्ठ टीएमसी नेता फिरहाद हकीम ने कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया है। इसे भी पार्टी में चल रहे राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि इस पूरे मामले पर अभी तक ममता बनर्जी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा और विपक्षी राजनीति के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
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राष्ट्रीय न्यूज़: दिल्ली के मालवीय नगर क्षेत्र में स्थित एक होटल-रेस्टोरेंट में बुधवार सुबह हुए भीषण अग्निकांड में राजस्थान के तीन लोगों की मौत हो गई। मृतकों में अजमेर के वृद्ध दंपती और किशनगढ़ के एक प्रतिष्ठित मार्बल व्यवसायी शामिल हैं। हादसे की सूचना मिलते ही परिजनों और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस दर्दनाक हादसे में अजमेर के निवासी जंवरी लाल और उनकी पत्नी कमला देवी की जान चली गई। वहीं किशनगढ़ के लक्ष्मी विहार निवासी 62 वर्षीय मार्बल व्यवसायी अशोक अग्रवाल की भी आग में झुलसने से मृत्यु हो गई। परिजनों के अनुसार अशोक अग्रवाल अपने बुजुर्ग फूफा राधेश्याम अग्रवाल की तबीयत जानने के लिए दिल्ली गए थे। राधेश्याम अग्रवाल मालवीय नगर क्षेत्र के एक अस्पताल में भर्ती बताए जा रहे हैं। अशोक अग्रवाल अपने कुछ रिश्तेदारों और मित्रों के साथ दिल्ली पहुंचे थे और 2 जून को अस्पताल जाकर अपने फूफा से मुलाकात की थी। बताया गया कि उन्होंने अपने साथ आए रिश्तेदारों और परिचितों को वापस भेज दिया था तथा स्वयं मालवीय नगर स्थित होटल में पहले से बुक किए गए कमरे में ठहर गए। बुधवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे होटल-रेस्टोरेंट परिसर में भीषण आग लग गई, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। आग तेजी से फैलने के कारण कई लोग इसकी चपेट में आ गए और अशोक अग्रवाल की मौके पर ही मौत हो गई। सूत्रों के अनुसार इस अग्निकांड में करीब 21 लोगों की मृत्यु हुई है, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। मृतकों में दिल्ली के एक ही परिवार के कई सदस्य, अजमेर के एक वृद्ध दंपती और किशनगढ़ के व्यवसायी अशोक अग्रवाल शामिल बताए जा रहे हैं। अशोक अग्रवाल की मृत्यु की सूचना मिलते ही किशनगढ़ में शोक का माहौल बन गया। व्यापारिक और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उनके सम्मान में शहर में स्थित उनकी पंसारी की दुकान भी बंद रखी गई। परिवार में उनकी पत्नी सरोज देवी, दो पुत्र, पुत्रवधुएं और पौत्र-पौत्रियां हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने के बाद होटल में अफरा-तफरी मच गई। कई लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से छलांग लगा दी। सूचना मिलने पर दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और लंबे समय तक चले राहत एवं बचाव अभियान के बाद आग पर काबू पाया गया। दमकल विभाग, पुलिस और अन्य राहत एजेंसियों ने संयुक्त अभियान चलाकर 40 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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