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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम बना गरीब बच्चों का जीवन रक्षक

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January 14, 2020

अजमेर, 14 जनवरी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम गरीब परिवारों के बच्चों का जीवन रक्षक बन गया है। अजमेर के मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में हाल ही 3 साल की लक्ष्मी, 8 साल की कोमल, 14 साल की पायल और 12 साल के दिल खुश के दिलों के जन्मजात रोगों का निःशुल्क इलाज किया गया। ये सभी बच्चे अब अन्य बच्चों की तरह अपना आगे का जीवन हंसते, मुस्कराते, खेलते-कूदते कुशलता से जीने को तैयार हैं।  मित्तल हॉस्पिटल के हृदय एवं शिशु रोग विभाग के दक्ष एवं अनुभवी चिकित्सा विशेषज्ञों की पूरी टीम जिनमें हार्ट एंड वास्कुलर सर्जन डॉ सूर्य, बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत माथुर एवं डॉ सुनील गोयल, कार्डियक एनेस्थेसियोलॉजिस्ट एवं इन्टेन्सिविस्ट डॉ धर्म चंद जैन ने इन बच्चों की तकलीफों का सफलता से निदान किया।

     राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. रामलाल चौधरी ने बताया कि आरबीएसकेे  का अब तक संभाग के 160 गरीब परिवारों के बच्चों को लाभ पहुंचाया जा चुका है। कुछ और भी बच्चे चिंहित हैं जिनके परिवारजनों से आरबीएसके की टीम समझाइश कर रही है। शीघ्र ही उन्हें भी सरकार की इस योजना का लाभ पहुंचाकर बच्चों का जीवन सुरक्षित किया जाएगा।

     डॉ. चौधरी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पाया गया कि पंसद नगर कोटड़ा निवासी भगवान सिंह की बेटी 3 वर्षीय लक्ष्मी के एक नहीं बल्कि दिल की जन्मजात दो तकलीफें थी। बच्ची लक्ष्मी के दिल में छेद तो था ही साथ में उसके फेफड़ेें की तरफ जाने वाली रक्तवाहिनी के वाल्व में भी सिकुड़न थी। मित्तल हॉस्पिटल में लक्ष्मी के शल्य चिकित्सा कर उसके दिल का छेद बंद किया और वाल्व रिपेयर किया गया। लक्ष्मी अब पूर्णरूप से स्वस्थ्य है और उसे अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं बच्ची के परिवारजनों से मित्तल हॉस्पिटल पहुंच कर मुलाकात की और बच्ची की कुशलक्षेम पूछी। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति के दिन भगवान सिंह के घर स्वस्थ लक्ष्मी के रूप में खुशी लौटी है इससे परिवारजन बेहद प्रसन्न हैं। इस मौके पर मित्तल हॉस्पिटल के निदेशक डॉ दिलीप मित्तल, मनोज मित्तल, वाइस प्रेसीडेंट श्याम सोमानी, से भी उन्होेेंने भेंट की। अतिरिक्त जिला नोडल अधिकारी आरबीएसके डॉ रामकृपाल लखावत, एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ सुरेश चौधरी भी उनके साथ थे।

     डॉ. चौधरी ने जानकारी दी कि तारागढ़ निवासी भगवान सिंह की 8 साल की बच्ची कोमल भी मित्तल हॉस्पिटल में उपचाररत है। कोमल को भी जल्द ही छुट्टी दी जाएगी। प्रारंभिक जांच में ज्ञात हुआ कि उसके दिल के दोनों अलिंदों के बीच की दीवार (पर्दा) नहीं था इसके कारण उसका दाहिना निलय फूलकर बड़ा हो गया था। ऎसी ही जन्मजात परेशानी भगवानपुरा बनेड़ा भीलवाड़ा निवासी उदा गुर्जर के 12 वर्षीय पुतर्् दिलखुश को थी। इन दोनों पीड़ित बच्चों के हृदय की झिल्ली का उपयोग करते हुए अलिंदों को रिपेयर किया गया। इसी तरह गगवाना निवासी अशोक पहाड़िया की 14 वर्षीय बेटी पायल जन्मजात दिल में छेद की तकलीफ से पीड़ित थी। उसके परिवारजन काफी परेशान रहा करते थे। इन सभी बच्चों को आरबीएसके की टीम ने आंगनबाड़ी केंद्रों व प्राथमिक शालाओं में स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान चिंहित किया और उनकी प्रारंभिक जांच कराई। फिर मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के लिए रेफर कर दिया।

     डॉ. रामलाल चौधरी ने कहा कि पीड़ित गरीब परिवारों के लिए यह प्रसन्नता की बात है उन्हें बच्चों के दिल के उपचार के लिए अजमेर या राजस्थान से बाहर ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ा, मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में ही उन्हें अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित ऑपरेशन थियेटरों में दक्ष व अनुभवी चिकित्सकों की पूरी टीम ने उनका बिना कोई अतिरिक्त खर्च लगे निःशुल्क उपचार किया। डॉ चौधरी ने इसके लिए सभी चिकित्सकों व हॉस्पिटल प्रबंधन के सहयोग को प्रशंसनीय बताया।

     मित्तल हॉस्पिटल के हॉर्ट एवं वास्कुलर सर्जन डॉ सूर्य ने बताया कि छोटे बच्चों के इस तरह के ऑपरेशन में पूरी टीम की महती भूमिका होती है। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ राहुल गुप्ता, डॉ विवेक माथुर, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत माथुर, डॉ. सुनील गोयल तथा बच्चों के मामले में दक्ष और अनुभवी कार्डियक एनेस्थेसियोलॉजिस्ट एवं इन्टेन्सिविस्ट डॉ धर्म चंद जैन आदि के सामूहिक प्रयासों से बच्चों के दिलों की शल्य चिकित्सा सम्भव हो पाई। उन्होंने बताया कि बच्चों के जन्मजात दिल के विकारों के कारण बच्चों की ग्रोथ बाधित हो जाती है। बच्चों में थकान, घड़कन का तेज होना, कमजोर रहना आदि परेशानी बनी रहती है। बच्चे सामान्य बच्चों की तरह खेलकूद नहीं पाते हेैं। डॉ सूर्य ने कहा कि अब ये सभी बच्चे सामान्य बच्चों की तरह स्वस्थ जीवन यापन कर सकेंगे।

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