आज मैं एक ऐसी योजना का जिक्र कर रहा हूँ जिस पर 24 करोड खर्च करने का प्रावधान था। जो मात्र 12 करोड में पूरी हो गई और असल में देखा जाए तो इस पर ज़्यादा से ज़्यादा  5 करोड़ रुपये ख़र्च  किए गए। बाकी बंदरबांट में ख़र्च हो गए।
     देश की शायद यह इकलौती योजना होगी जहां भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का इतना बड़ा सामूहिक खेल खेला गया हो। वसुंधरा सरकार के समय में शुरू हुई इस योजना का नाम है  *एंट्री प्लाजा योजना*   पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर को अक्षरधाम की तर्ज पर बनाने की इस योजना की पूर्णाहुति होने पर भी वो अक्षरतः भी अक्षरधाम जैसी नहीं।
      मजेदार बात यह है कि इस योजना  में हुए भ्रष्टाचार को लेकर नगर पालिका के चार भूत पूर्व अध्यक्षों ने वर्तमान सरकार को लिखित में शिकायत की। दामोदर शर्मा, मंजू कुर्डिया ,अन्नी देवी और जनार्दन शर्मा ने नीचे तक का ज़ोर लगा दिया यानी सर से पांव तक का मगर फ़ाइलें  बंद की बन्द ही पड़ी रहीं।उनके बाद पूर्व मंत्री नसीम अख्तर और उनके  होनहार पति ने मोर्चा संभाला।
 योजना में हुए भ्रष्टाचार की बहुत शानदार तरीके से वसुंघरा सरकार के विरुद्ध  शिक़ायत की गई। नतीजा ये हुआ कि योजना में काम करने वाले ठेकेदार के विरुद्ध जांच भी बैठाई गई ।जांच कमेटी जांच करने पुष्कर आई भी मगर कमेटी की रिपोर्ट आज तक नहीं आई। शायद नसीम साहिबा और उनके पति इंसाफ़ जी को रिपोर्ट  आने का  आज भी इंतजार हो।ये  बात अलग है कि जांच रिपोर्ट दिए जाने के लिए वो सरकार पर दबाव नहीं डाल रहे ।शायद उनका उद्देश्य पूरा हो गया हो। इसी तरह की शिकायत नसीम अख्तर ने  होटल अनंता को लेकर भी की थी ।पास की ज़मीन पर निर्माण कराए  जाने के विरोध में ।यहां भी जांच बिठाई तो गई मगर कब खड़ी हो कर चलती बनी पता ही नहीं। नसीम अख्तर ही जाने। 
        अगर आज भी इंसाफ़ और नसीम जी चाहें तो जांच रिपोर्ट सामने आ सकती है क्यों कि आज की तारिख़ में ये दोनों पति पत्नी ही पुष्कर  पर राज कर रहे हैं।इनके बिना पुष्कर के किसी पेड़ का पत्ता भी नहीं हिलता। अधिकारियों की मज़ाल नहीं कि उनके बिना पूछे कुछ कर लें।अनुमति की शर्तों का निर्धारण भी वो ख़ुद ही करते हैं।
    अब सवाल उठता है कि अक्षरधाम जैसी जादुई योजना से पहले ब्रह्मा जी के मंदिर के पीछे क्या था ।यहां 10 बीघा में उपवन था। फलदार पेड़ थे। ख़ूबसूरत  बागीचे के बीच संत महात्माओं की  समाधियां  थीं।यहां के जामुन, आम, और नींबू विश्व प्रसिद्ध श्रेणी में आते थे।यहां के गुलाब मंदिर पर चढ़ाए जाते थे। हिंदूवादी वसुंधरा सरकार ने इस योजना के तहत पूरा उपवन बर्बाद कर दिया।उन्होंने सन्त महात्माओं की समाधियों  को तहस-नहस करने में भी  गुरेज़ नहीं किया ।
     मुख्यमंत्री वसुंधरा ने विकास के नाम पर जो खेल खेला उसका सबसे बड़ा उदाहरण है इस योजना का जल्दबाजी में शिलान्यास करवाना। मंदिर क्यों कि पुरातत्व विभाग के अंतर्गत आता है और ब्रह्मा मंदिर क्यों कि  राष्ट्रीय स्मारक घोषित है अतः इसे बिना  विभागीय अनुमति के हाथ लगाना ग़ैर कानूनी था।सरकार ने अपनी हरामज़दगी दिखाते हुए एंट्री प्लाजा के नाम पर सिर्फ़ पर्यटन  विभाग से मंदिर की मरम्मत कराए जाने की अनुमति ले ली।यानि  24 करोड में। मंदिर की  मरम्मत।
मंदिर की मरम्मत कितनी हुई ये तो ब्रह्मा जी जाने मगर सरकारी पैसों से राजनेताओं और अधिकारियों ने जम कर सरकारी ख़ज़ाने को लूटा। 
    मंदिर के मूल पौराणिक  स्वरूप को तहस नहस करने वाले बाहर के नहीं घर के ही गज़नवी थे। 
किसने कितना लूटा ये जांच का विषय है  मगर जांच नहीं होगी क्योंकि ठेकेदार ने सबको सेट कर दिया है। करोड़ों के काम में लाखों की सेटिंग तो बहुत आसान होती है। 
   एक और मजेदार बात यह हुई कि इस  योजना को शरू करने के लिए जिस तरह  वसुंधरा  बावली हुईं उसी तरह लोकार्पण करने में भी।। 6 अक्टूबर को चुनाव की आचार संहिता लगने के बाद भी वसुंधरा ने जबरदस्त रौद्र रूप दिखाया।अजमेर में कुछ लोगों के बीच लोकार्पण की घोषणा कर दी।आनन फानन में टेंट लगाए गए।इस अवैध निर्माण का शिलान्यास करने पर सरकारी ख़ज़ाने पर 70 लाख का ख़र्च आया।मात्र टेंट लगाने वालों ने नगर पालिका की बंदर बाँट से 40 लाख हड़प लिए। लोकार्पण हुआ तो आचार संहिता के बाद वो तत्कालीन ज़िला कलेक्टर गौरव गोयल को लेकर पुष्कर पहुंची ।जहां ठेकेदार ने उनसे साफ तौर पर कहा कि उनके पास काम करने की परमिशन नहीं।तब भी दंभी वसुंधरा ने अधिकारियों से सहयोग करने को कहा और आश्वाशन दिया कि परमिशन वो दिलवा देंगी। परमीशन तो आज तक नहीं आयी मगर 100 मीटर के अंदर हुए निर्माण को तोड़ने के आदेश आ गए है जो ज़िला प्रशाशन के यहां मज़े लूट रहे हैं।
  तीर्थ पुरोहितों ने जब विरोध किया और भारतीय पुरातत्व विभाग को शिक़ायत की औऱ क्षेत्र में अवैध निर्माण तत्काल रोके जाने की बात की  तो  केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने 29 अक्टूबर को इस कार्य को लिखित में ग़ैरकानूनी करार देते हुए सरकार से पूछा कि ब्रह्मा मंदिर के किस हिस्से पर मरम्मत का काम  किया जा रहा है।किसी के पास इस बात का जवाब न कल था  ना आज है।
    एक और मजेदार बात ये कि जब पुरातत्व विभाग को पता चला  कि उससे ग़लती हो गयी है तो उसने  योजना पूरी होने से पहले पुरातत्व विभाग द्वारा मरम्मत के लिए दी गईं परमिशन ही वापस ले ली ।
  ब्रह्मा जी के मंदिर के साथ वसुंधरा सरकार ने जबरदस्त धोखाधड़ी की। अपनी जेब भरने के लिए योजना के ठेकेदार को यूज किया गया। जांच के नाम पर उसे डरा धमकाकर मोटी रकम वसूली की गई ।किसी और के नाम ठेका और किसी को दे दिया गया।जो दिखाया गया वह किया नहीं।जो किया गया वो है ही नहीं।
     अब जबकि गहलोत सरकार आ गई है और ईमानदार प्रशासन होने का दावा किया जा रहा  है तब  दुनिया के निर्माता ब्रह्मा जी के साथ हुए षडयंत्र का खुलासा होने की ज़रूरत है। ज़रूरत है उन चेहरों को बेनकाब करने की जिनकी  वजह से सरकारी ख़ज़ाने को मोहम्मद ग़ज़नबी की तारा लूटा गया। हो सकता है इस बंदरबांट के अंतर्गत बाद में कांग्रेसी भी शामिल हो गए हों ।मगर ऐसा भी है तो बिना भेदभाव के गहलोत सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए। नगरपालिका का इसमें में कितना योगदान रहा वह भी सामने आना चाहिए ।जिला प्रशासन से इसकी उम्मीद करना बेमानी होगा क्योंकि सरकार जब तक उंगली का प्रयोग नहीं करेगी कोई अधिकारी फटे में पैर देने वाला नहीं।
    *और हाँ एक और बात,काम पूरा हो चुका है।लोकार्पण भी हो चुका है ।मगर एंट्री प्लाज़ा में किसी भी आम आदमी को जाने की इजाज़त नहीं।दरवाज़े लोकार्पण के बाद से आज तक जनता के लिए खुले ही नहीं अलबत्ता एंट्री प्लाज़ा के रख रखाव पर ब्रह्मा मंदिर ट्रस्ट हर माह 3 लाख खर्च कर रही है।अब तके लगभग 35 लाख खर्च हो चुके हैं ।आगे भी बराबर होते रहेंगे।
       अंदर का नज़ारा देखा जाए तो निर्माण के नाम पर जो पत्थर लगाए गए उन पर काई जम चुकी है।
         सच मे परम पिता ब्रह्मा जी के साथ वसुंधरा सरकार ने सबसे बड़ा कपट किया।अब जबकि सरकार बदल चुकी है जब भी जांच रिपोर्ट के लिए कोई कांग्रेसी नेता बोलने को तैयार नहीं।शायद ब्रह्मा जी ख़ुद ही कुछ करेंगे।इंतज़ार है।
"/> आज मैं एक ऐसी योजना का जिक्र कर रहा हूँ जिस पर 24 करोड खर्च करने का प्रावधान था। जो मात्र 12 करोड में पूरी हो गई और असल में देखा जाए तो इस पर ज़्यादा से ज़्यादा  5 करोड़ रुपये ख़र्च  किए गए। बाकी बंदरबांट में ख़र्च हो गए।
     देश की शायद यह इकलौती योजना होगी जहां भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का इतना बड़ा सामूहिक खेल खेला गया हो। वसुंधरा सरकार के समय में शुरू हुई इस योजना का नाम है  *एंट्री प्लाजा योजना*   पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर को अक्षरधाम की तर्ज पर बनाने की इस योजना की पूर्णाहुति होने पर भी वो अक्षरतः भी अक्षरधाम जैसी नहीं।
      मजेदार बात यह है कि इस योजना  में हुए भ्रष्टाचार को लेकर नगर पालिका के चार भूत पूर्व अध्यक्षों ने वर्तमान सरकार को लिखित में शिकायत की। दामोदर शर्मा, मंजू कुर्डिया ,अन्नी देवी और जनार्दन शर्मा ने नीचे तक का ज़ोर लगा दिया यानी सर से पांव तक का मगर फ़ाइलें  बंद की बन्द ही पड़ी रहीं।उनके बाद पूर्व मंत्री नसीम अख्तर और उनके  होनहार पति ने मोर्चा संभाला।
 योजना में हुए भ्रष्टाचार की बहुत शानदार तरीके से वसुंघरा सरकार के विरुद्ध  शिक़ायत की गई। नतीजा ये हुआ कि योजना में काम करने वाले ठेकेदार के विरुद्ध जांच भी बैठाई गई ।जांच कमेटी जांच करने पुष्कर आई भी मगर कमेटी की रिपोर्ट आज तक नहीं आई। शायद नसीम साहिबा और उनके पति इंसाफ़ जी को रिपोर्ट  आने का  आज भी इंतजार हो।ये  बात अलग है कि जांच रिपोर्ट दिए जाने के लिए वो सरकार पर दबाव नहीं डाल रहे ।शायद उनका उद्देश्य पूरा हो गया हो। इसी तरह की शिकायत नसीम अख्तर ने  होटल अनंता को लेकर भी की थी ।पास की ज़मीन पर निर्माण कराए  जाने के विरोध में ।यहां भी जांच बिठाई तो गई मगर कब खड़ी हो कर चलती बनी पता ही नहीं। नसीम अख्तर ही जाने। 
        अगर आज भी इंसाफ़ और नसीम जी चाहें तो जांच रिपोर्ट सामने आ सकती है क्यों कि आज की तारिख़ में ये दोनों पति पत्नी ही पुष्कर  पर राज कर रहे हैं।इनके बिना पुष्कर के किसी पेड़ का पत्ता भी नहीं हिलता। अधिकारियों की मज़ाल नहीं कि उनके बिना पूछे कुछ कर लें।अनुमति की शर्तों का निर्धारण भी वो ख़ुद ही करते हैं।
    अब सवाल उठता है कि अक्षरधाम जैसी जादुई योजना से पहले ब्रह्मा जी के मंदिर के पीछे क्या था ।यहां 10 बीघा में उपवन था। फलदार पेड़ थे। ख़ूबसूरत  बागीचे के बीच संत महात्माओं की  समाधियां  थीं।यहां के जामुन, आम, और नींबू विश्व प्रसिद्ध श्रेणी में आते थे।यहां के गुलाब मंदिर पर चढ़ाए जाते थे। हिंदूवादी वसुंधरा सरकार ने इस योजना के तहत पूरा उपवन बर्बाद कर दिया।उन्होंने सन्त महात्माओं की समाधियों  को तहस-नहस करने में भी  गुरेज़ नहीं किया ।
     मुख्यमंत्री वसुंधरा ने विकास के नाम पर जो खेल खेला उसका सबसे बड़ा उदाहरण है इस योजना का जल्दबाजी में शिलान्यास करवाना। मंदिर क्यों कि पुरातत्व विभाग के अंतर्गत आता है और ब्रह्मा मंदिर क्यों कि  राष्ट्रीय स्मारक घोषित है अतः इसे बिना  विभागीय अनुमति के हाथ लगाना ग़ैर कानूनी था।सरकार ने अपनी हरामज़दगी दिखाते हुए एंट्री प्लाजा के नाम पर सिर्फ़ पर्यटन  विभाग से मंदिर की मरम्मत कराए जाने की अनुमति ले ली।यानि  24 करोड में। मंदिर की  मरम्मत।
मंदिर की मरम्मत कितनी हुई ये तो ब्रह्मा जी जाने मगर सरकारी पैसों से राजनेताओं और अधिकारियों ने जम कर सरकारी ख़ज़ाने को लूटा। 
    मंदिर के मूल पौराणिक  स्वरूप को तहस नहस करने वाले बाहर के नहीं घर के ही गज़नवी थे। 
किसने कितना लूटा ये जांच का विषय है  मगर जांच नहीं होगी क्योंकि ठेकेदार ने सबको सेट कर दिया है। करोड़ों के काम में लाखों की सेटिंग तो बहुत आसान होती है। 
   एक और मजेदार बात यह हुई कि इस  योजना को शरू करने के लिए जिस तरह  वसुंधरा  बावली हुईं उसी तरह लोकार्पण करने में भी।। 6 अक्टूबर को चुनाव की आचार संहिता लगने के बाद भी वसुंधरा ने जबरदस्त रौद्र रूप दिखाया।अजमेर में कुछ लोगों के बीच लोकार्पण की घोषणा कर दी।आनन फानन में टेंट लगाए गए।इस अवैध निर्माण का शिलान्यास करने पर सरकारी ख़ज़ाने पर 70 लाख का ख़र्च आया।मात्र टेंट लगाने वालों ने नगर पालिका की बंदर बाँट से 40 लाख हड़प लिए। लोकार्पण हुआ तो आचार संहिता के बाद वो तत्कालीन ज़िला कलेक्टर गौरव गोयल को लेकर पुष्कर पहुंची ।जहां ठेकेदार ने उनसे साफ तौर पर कहा कि उनके पास काम करने की परमिशन नहीं।तब भी दंभी वसुंधरा ने अधिकारियों से सहयोग करने को कहा और आश्वाशन दिया कि परमिशन वो दिलवा देंगी। परमीशन तो आज तक नहीं आयी मगर 100 मीटर के अंदर हुए निर्माण को तोड़ने के आदेश आ गए है जो ज़िला प्रशाशन के यहां मज़े लूट रहे हैं।
  तीर्थ पुरोहितों ने जब विरोध किया और भारतीय पुरातत्व विभाग को शिक़ायत की औऱ क्षेत्र में अवैध निर्माण तत्काल रोके जाने की बात की  तो  केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने 29 अक्टूबर को इस कार्य को लिखित में ग़ैरकानूनी करार देते हुए सरकार से पूछा कि ब्रह्मा मंदिर के किस हिस्से पर मरम्मत का काम  किया जा रहा है।किसी के पास इस बात का जवाब न कल था  ना आज है।
    एक और मजेदार बात ये कि जब पुरातत्व विभाग को पता चला  कि उससे ग़लती हो गयी है तो उसने  योजना पूरी होने से पहले पुरातत्व विभाग द्वारा मरम्मत के लिए दी गईं परमिशन ही वापस ले ली ।
  ब्रह्मा जी के मंदिर के साथ वसुंधरा सरकार ने जबरदस्त धोखाधड़ी की। अपनी जेब भरने के लिए योजना के ठेकेदार को यूज किया गया। जांच के नाम पर उसे डरा धमकाकर मोटी रकम वसूली की गई ।किसी और के नाम ठेका और किसी को दे दिया गया।जो दिखाया गया वह किया नहीं।जो किया गया वो है ही नहीं।
     अब जबकि गहलोत सरकार आ गई है और ईमानदार प्रशासन होने का दावा किया जा रहा  है तब  दुनिया के निर्माता ब्रह्मा जी के साथ हुए षडयंत्र का खुलासा होने की ज़रूरत है। ज़रूरत है उन चेहरों को बेनकाब करने की जिनकी  वजह से सरकारी ख़ज़ाने को मोहम्मद ग़ज़नबी की तारा लूटा गया। हो सकता है इस बंदरबांट के अंतर्गत बाद में कांग्रेसी भी शामिल हो गए हों ।मगर ऐसा भी है तो बिना भेदभाव के गहलोत सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए। नगरपालिका का इसमें में कितना योगदान रहा वह भी सामने आना चाहिए ।जिला प्रशासन से इसकी उम्मीद करना बेमानी होगा क्योंकि सरकार जब तक उंगली का प्रयोग नहीं करेगी कोई अधिकारी फटे में पैर देने वाला नहीं।
    *और हाँ एक और बात,काम पूरा हो चुका है।लोकार्पण भी हो चुका है ।मगर एंट्री प्लाज़ा में किसी भी आम आदमी को जाने की इजाज़त नहीं।दरवाज़े लोकार्पण के बाद से आज तक जनता के लिए खुले ही नहीं अलबत्ता एंट्री प्लाज़ा के रख रखाव पर ब्रह्मा मंदिर ट्रस्ट हर माह 3 लाख खर्च कर रही है।अब तके लगभग 35 लाख खर्च हो चुके हैं ।आगे भी बराबर होते रहेंगे।
       अंदर का नज़ारा देखा जाए तो निर्माण के नाम पर जो पत्थर लगाए गए उन पर काई जम चुकी है।
         सच मे परम पिता ब्रह्मा जी के साथ वसुंधरा सरकार ने सबसे बड़ा कपट किया।अब जबकि सरकार बदल चुकी है जब भी जांच रिपोर्ट के लिए कोई कांग्रेसी नेता बोलने को तैयार नहीं।शायद ब्रह्मा जी ख़ुद ही कुछ करेंगे।इंतज़ार है।
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ब्रह्मा मंदिर को लूटने वाले ग़ज़नवी - सुरेन्द्र चतुर्वेदी

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August 19, 2019

आज मैं एक ऐसी योजना का जिक्र कर रहा हूँ जिस पर 24 करोड खर्च करने का प्रावधान था। जो मात्र 12 करोड में पूरी हो गई और असल में देखा जाए तो इस पर ज़्यादा से ज़्यादा  5 करोड़ रुपये ख़र्च  किए गए। बाकी बंदरबांट में ख़र्च हो गए।
     देश की शायद यह इकलौती योजना होगी जहां भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का इतना बड़ा सामूहिक खेल खेला गया हो। वसुंधरा सरकार के समय में शुरू हुई इस योजना का नाम है  *एंट्री प्लाजा योजना*   पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर को अक्षरधाम की तर्ज पर बनाने की इस योजना की पूर्णाहुति होने पर भी वो अक्षरतः भी अक्षरधाम जैसी नहीं।
      मजेदार बात यह है कि इस योजना  में हुए भ्रष्टाचार को लेकर नगर पालिका के चार भूत पूर्व अध्यक्षों ने वर्तमान सरकार को लिखित में शिकायत की। दामोदर शर्मा, मंजू कुर्डिया ,अन्नी देवी और जनार्दन शर्मा ने नीचे तक का ज़ोर लगा दिया यानी सर से पांव तक का मगर फ़ाइलें  बंद की बन्द ही पड़ी रहीं।उनके बाद पूर्व मंत्री नसीम अख्तर और उनके  होनहार पति ने मोर्चा संभाला।
 योजना में हुए भ्रष्टाचार की बहुत शानदार तरीके से वसुंघरा सरकार के विरुद्ध  शिक़ायत की गई। नतीजा ये हुआ कि योजना में काम करने वाले ठेकेदार के विरुद्ध जांच भी बैठाई गई ।जांच कमेटी जांच करने पुष्कर आई भी मगर कमेटी की रिपोर्ट आज तक नहीं आई। शायद नसीम साहिबा और उनके पति इंसाफ़ जी को रिपोर्ट  आने का  आज भी इंतजार हो।ये  बात अलग है कि जांच रिपोर्ट दिए जाने के लिए वो सरकार पर दबाव नहीं डाल रहे ।शायद उनका उद्देश्य पूरा हो गया हो। इसी तरह की शिकायत नसीम अख्तर ने  होटल अनंता को लेकर भी की थी ।पास की ज़मीन पर निर्माण कराए  जाने के विरोध में ।यहां भी जांच बिठाई तो गई मगर कब खड़ी हो कर चलती बनी पता ही नहीं। नसीम अख्तर ही जाने। 
        अगर आज भी इंसाफ़ और नसीम जी चाहें तो जांच रिपोर्ट सामने आ सकती है क्यों कि आज की तारिख़ में ये दोनों पति पत्नी ही पुष्कर  पर राज कर रहे हैं।इनके बिना पुष्कर के किसी पेड़ का पत्ता भी नहीं हिलता। अधिकारियों की मज़ाल नहीं कि उनके बिना पूछे कुछ कर लें।अनुमति की शर्तों का निर्धारण भी वो ख़ुद ही करते हैं।
    अब सवाल उठता है कि अक्षरधाम जैसी जादुई योजना से पहले ब्रह्मा जी के मंदिर के पीछे क्या था ।यहां 10 बीघा में उपवन था। फलदार पेड़ थे। ख़ूबसूरत  बागीचे के बीच संत महात्माओं की  समाधियां  थीं।यहां के जामुन, आम, और नींबू विश्व प्रसिद्ध श्रेणी में आते थे।यहां के गुलाब मंदिर पर चढ़ाए जाते थे। हिंदूवादी वसुंधरा सरकार ने इस योजना के तहत पूरा उपवन बर्बाद कर दिया।उन्होंने सन्त महात्माओं की समाधियों  को तहस-नहस करने में भी  गुरेज़ नहीं किया ।
     मुख्यमंत्री वसुंधरा ने विकास के नाम पर जो खेल खेला उसका सबसे बड़ा उदाहरण है इस योजना का जल्दबाजी में शिलान्यास करवाना। मंदिर क्यों कि पुरातत्व विभाग के अंतर्गत आता है और ब्रह्मा मंदिर क्यों कि  राष्ट्रीय स्मारक घोषित है अतः इसे बिना  विभागीय अनुमति के हाथ लगाना ग़ैर कानूनी था।सरकार ने अपनी हरामज़दगी दिखाते हुए एंट्री प्लाजा के नाम पर सिर्फ़ पर्यटन  विभाग से मंदिर की मरम्मत कराए जाने की अनुमति ले ली।यानि  24 करोड में। मंदिर की  मरम्मत।
मंदिर की मरम्मत कितनी हुई ये तो ब्रह्मा जी जाने मगर सरकारी पैसों से राजनेताओं और अधिकारियों ने जम कर सरकारी ख़ज़ाने को लूटा। 
    मंदिर के मूल पौराणिक  स्वरूप को तहस नहस करने वाले बाहर के नहीं घर के ही गज़नवी थे। 
किसने कितना लूटा ये जांच का विषय है  मगर जांच नहीं होगी क्योंकि ठेकेदार ने सबको सेट कर दिया है। करोड़ों के काम में लाखों की सेटिंग तो बहुत आसान होती है। 
   एक और मजेदार बात यह हुई कि इस  योजना को शरू करने के लिए जिस तरह  वसुंधरा  बावली हुईं उसी तरह लोकार्पण करने में भी।। 6 अक्टूबर को चुनाव की आचार संहिता लगने के बाद भी वसुंधरा ने जबरदस्त रौद्र रूप दिखाया।अजमेर में कुछ लोगों के बीच लोकार्पण की घोषणा कर दी।आनन फानन में टेंट लगाए गए।इस अवैध निर्माण का शिलान्यास करने पर सरकारी ख़ज़ाने पर 70 लाख का ख़र्च आया।मात्र टेंट लगाने वालों ने नगर पालिका की बंदर बाँट से 40 लाख हड़प लिए। लोकार्पण हुआ तो आचार संहिता के बाद वो तत्कालीन ज़िला कलेक्टर गौरव गोयल को लेकर पुष्कर पहुंची ।जहां ठेकेदार ने उनसे साफ तौर पर कहा कि उनके पास काम करने की परमिशन नहीं।तब भी दंभी वसुंधरा ने अधिकारियों से सहयोग करने को कहा और आश्वाशन दिया कि परमिशन वो दिलवा देंगी। परमीशन तो आज तक नहीं आयी मगर 100 मीटर के अंदर हुए निर्माण को तोड़ने के आदेश आ गए है जो ज़िला प्रशाशन के यहां मज़े लूट रहे हैं।
  तीर्थ पुरोहितों ने जब विरोध किया और भारतीय पुरातत्व विभाग को शिक़ायत की औऱ क्षेत्र में अवैध निर्माण तत्काल रोके जाने की बात की  तो  केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने 29 अक्टूबर को इस कार्य को लिखित में ग़ैरकानूनी करार देते हुए सरकार से पूछा कि ब्रह्मा मंदिर के किस हिस्से पर मरम्मत का काम  किया जा रहा है।किसी के पास इस बात का जवाब न कल था  ना आज है।
    एक और मजेदार बात ये कि जब पुरातत्व विभाग को पता चला  कि उससे ग़लती हो गयी है तो उसने  योजना पूरी होने से पहले पुरातत्व विभाग द्वारा मरम्मत के लिए दी गईं परमिशन ही वापस ले ली ।
  ब्रह्मा जी के मंदिर के साथ वसुंधरा सरकार ने जबरदस्त धोखाधड़ी की। अपनी जेब भरने के लिए योजना के ठेकेदार को यूज किया गया। जांच के नाम पर उसे डरा धमकाकर मोटी रकम वसूली की गई ।किसी और के नाम ठेका और किसी को दे दिया गया।जो दिखाया गया वह किया नहीं।जो किया गया वो है ही नहीं।
     अब जबकि गहलोत सरकार आ गई है और ईमानदार प्रशासन होने का दावा किया जा रहा  है तब  दुनिया के निर्माता ब्रह्मा जी के साथ हुए षडयंत्र का खुलासा होने की ज़रूरत है। ज़रूरत है उन चेहरों को बेनकाब करने की जिनकी  वजह से सरकारी ख़ज़ाने को मोहम्मद ग़ज़नबी की तारा लूटा गया। हो सकता है इस बंदरबांट के अंतर्गत बाद में कांग्रेसी भी शामिल हो गए हों ।मगर ऐसा भी है तो बिना भेदभाव के गहलोत सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए। नगरपालिका का इसमें में कितना योगदान रहा वह भी सामने आना चाहिए ।जिला प्रशासन से इसकी उम्मीद करना बेमानी होगा क्योंकि सरकार जब तक उंगली का प्रयोग नहीं करेगी कोई अधिकारी फटे में पैर देने वाला नहीं।
    *और हाँ एक और बात,काम पूरा हो चुका है।लोकार्पण भी हो चुका है ।मगर एंट्री प्लाज़ा में किसी भी आम आदमी को जाने की इजाज़त नहीं।दरवाज़े लोकार्पण के बाद से आज तक जनता के लिए खुले ही नहीं अलबत्ता एंट्री प्लाज़ा के रख रखाव पर ब्रह्मा मंदिर ट्रस्ट हर माह 3 लाख खर्च कर रही है।अब तके लगभग 35 लाख खर्च हो चुके हैं ।आगे भी बराबर होते रहेंगे।
       अंदर का नज़ारा देखा जाए तो निर्माण के नाम पर जो पत्थर लगाए गए उन पर काई जम चुकी है।
         सच मे परम पिता ब्रह्मा जी के साथ वसुंधरा सरकार ने सबसे बड़ा कपट किया।अब जबकि सरकार बदल चुकी है जब भी जांच रिपोर्ट के लिए कोई कांग्रेसी नेता बोलने को तैयार नहीं।शायद ब्रह्मा जी ख़ुद ही कुछ करेंगे।इंतज़ार है।

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