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रियासत काल में लगा पिलर आज भी बता रहा अपनी हद

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December 5, 2018

ब्यावर, (हेमन्त साहू)। अजमेर जिले
के अंतिम छोर पर स्थित ब्यावर विधानसभा
क्षेत्र के दायरे में आने वाले टॉडगढ़
और भालिया क्षेत्र विधानसभा चुनाव के
दौरान प्रत्याशियों के लिए भी चुनौती बने
हैं। इसकी वजह है इन क्षेत्रों में प्रचार के
लिए प्रत्याशियों को राजसमंद जिले के भीम
और पाली जिले के जैतारण विधानसभा

क्षेत्र से होकर 23 किलोमीटर का सफर
तय करना। साथ ही इन क्षेत्रों की सीमा पर
बसे मतदाताओं को भी पहचान को लेकर भी कई
पेचीदगियों का सामना करना पड़ता है।
ब्यावर विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार
को लेकर प्रत्याशियों को राजसमंद व पाली
जिले की सीमा पर बसे गांवों से होकर अपने
विधानसभा क्षेत्र में प्रचार के लिए करीब
23 किलोमीटर का फिजूल सफर करना
पड़ता है। इन दोनों जिलों में आने वाले
गांवों के विधानसभा क्षेत्र को लेकर भी
संशय बना रहता है। अजमेर जिला सीमा
समाप्त होने के साथ राजसमंद जिला सीमा के
तहत शेरों का बाला, कूकड़ा चौराहा,
माल का चौड़ा, जस्साखेड़ा, आड़ा भाळा से
होते हुए ब्यावर विधानसभा क्षेत्र की सीमा
अरनाली, खोडमाल, बड़ाखेड़ा, बराखन,
बनजारी, बामनहेड़ा, आसन, बुझारेल
तक पहुंचती है। इसके बाद जालिया-रूपावास,
जालिया-पीथवास, जालिया-लालावास में
प्रचार के लिए पाली जिले के कोट-
किराना, बगड़ी-कलालिया को पार
करना पड़ता है। हालांकि इन जिलों की
सीमाओं पर स्थित अमरपुरा खेड़ा कला गांव
ब्यावर विधानसभा क्षेत्र को कड़ी के रूप
में स्थित है। जहां पहुंचने के लिए इन जिलों से
होकर गुजरना पड़ता है। अजमेर, राजसमंद
और पाली जिले की सीमा पर बसे गांवों में

संपर्क सड़क का जंक्शन हाइवे पर स्थित
केवल जस्साखेड़ा कस्बा है। चाहे अजमेर से
राजसमंद के गांवों या पाली जिले से
अजमेर के गांवों में आवागमन करना हो,
इसके लिए जस्साखेड़ा से होकर ही गुजरना
पड़ता है। आजादी से पहले अजमेर-
मेरवाड़ा रियासत की सरहद पर पत्थर का
पिलर लगाया गया था। आड़ा भाळा जो कभी
छोटी नदी या बड़ा नाला रही थी, के
किनारे स्थापित यह पिलर आज भी अजमेर
और राजसमंद जिले की सीमा को विभाजित
कर रहा है। इस पिलर से सटा आड़ा
भाळा का एक छोर अजमेर जिले की सीमा तो
दूसरा छोर राजसमंद जिले की सीमा
विभाजित कर रहा है। अजमेर-राजसमंद की
सीमा पर रहने वाले सोहन सिंह का उनका
मकान भीम-राजसमंद क्षेत्र में आता है तो
उनसे सटता हुआ दूसरा मकान ब्यावर-
अजमेर में आता है। चुनाव प्रचार के लिए
प्रत्याशियों की गाडिय़ां दोनों ही क्षेत्रों
से आती-जाती है। इसी प्रकार एक अन्य
ग्रामीण का कहना था कि उनका परिवार
राशन कार्ड तो अजमेर जिले का बना है
मगर मकान का एक हिस्सा राजसमंद जिले में
भी आता है। चंद कदम दूर रहने वाले
पड़ौसियों को तहसील के लिए भी लंबा सफर तय
करना पड़ता है। जबकि उन्हें ब्यावर
पहुंचने में कोई परेशानी नहीं होती।

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