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जाट सहानुभूति  लहर से निपटने के लिए रघु नहीं पायलेट को होना चाहिए मैदान में

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*जाट सहानुभूति  लहर से निपटने के लिए रघु नहीं पायलेट को होना चाहिए मैदान में* 


काफी लंबे समय से जब से अजमेर लोकसभा का उप चुनाव घोषित हुआ है, तब से ही कयास पर कयास लगाए जा रहे थे कि कौन भाजपा से और कौन कांग्रेस से चुनाव लड़ेगा?


 जहां तक भाजपा का सवाल है भाजपा के पास स्वर्गीय सांवरलाल जाट के पुत्र रामस्वरूप लांबा से बेहतर कोई और चेहरा इस उपचुनाव में दिखाई नहीं दे रहा था । समस्या यह भी थी कि सचिन पायलट जैसे मजबूत और कद्दावर कांग्रेस नेता का मुकाबला आखिर ऐसे किसी के भी हाथ में कैसे दे दिया जाए ? भारी मशक्कत के बाद कभी डॉक्टर पीके सारस्वत तो कभी डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी के नामों पर विचार होता रहा और पुनर्विचार करने के बाद भाजपा ने आज अपने पत्ते खोल कर दिवांगत जाट नेता सांवरलाल जाट के पुत्र रामस्वरूप लांबा के हाथ में लोकसभा उप चुनाव की कमान थमा दी है । 

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने अभी तक अपने पत्ते जगजाहिर नहीं किए हैं। परंतु अघोषित रूप से यह माना जा रहा है कि अजमेर लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ रघु शर्मा होंगे ।

 रघु शर्मा अपने आप में कांग्रेस का एक बड़ा चेहरा है और कई सालों से जमीनी राजनीति से जुड़े रहे हैं केकड़ी विधायक रहे  रघु शर्मा के पास लगभग राजस्थान के हर कस्बे में अपनी टीम है । फिर भी जहां तक इस उपचुनाव में मुकाबले को देखा जा रहा है, तो यह मुकाबला सिर्फ कांग्रेस और बीजेपी या जाट और गैर जाट के बीच में नहीं है। मुकाबला सीधा-सीधा सांवरलाल जाट के निधन से उपजी सहानुभूति लहार और भावनाओं से जुड़े वोट बैंक के सामने मजबूती से पैर जमा कर खड़े होने वाले प्रत्याशी के बीच का है । बल्कि  मुकाबला है ही भावनाओं से जुड़ा हुआ ऐसे भावनात्मक माहौल में  जाट समाज और भाजपा के कार्यकर्ताओं में व दूरदराज गांव में जो सहानुभूति लहर उत्पन्न हुई है उस का मुकाबला कर पाना कांग्रेस के लिए इतना आसान नहीं होगा। डॉक्टर रघु शर्मा भी  बहुत ही कुशल रणनीतिकार है और बड़े ही अनुभवी राजनेता  भी  है ।  टीम भी अच्छी है परंतु फिर भी इस घटा घनघोर की तरह छाई हुई सहानुभूति लहर को चीरकर कांग्रेस को विजयश्री दिलाना डॉक्टर शर्मा के बस का नहीं दिखाई दे रहा है । ऐसे माहौल में यदि कांग्रेस को अपनी जीत दर्ज करानी है तो प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट को आने वाले समय में खुद के मुख्यमंत्री पद का मोह छोड़कर मैदान में आना चाहिए ताकि इस लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस की जीत निश्चित हो।यह बात और है कि पायलट को शायद यह लगता होगा कि इससे पायलट की मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पर कोई असर पड़ेगा। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है यदि पायलट जीत दर्ज कराते हैं तो उनका दावा और मजबूत हो जाएगा और अगर नहीं भी करा पाते हैं तो भी बड़ी आसानी से हाईकमान को यह समझाना संभव होगा की सहानुभूति लहर थी । जो भी हो यदि फिर भी  डॉ रघु शर्मा को यदि कांग्रेस अपना उम्मीदवार बनाती है तो यह डॉ रघु शर्मा के लिए एक बहुत बड़ा अवसर होगा कि वह अपने आप को एक बार फिर सिद्ध कर सके।

परंतु फिर भी यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि यदि कांग्रेस को जीत चाहिए तो प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट फीवर जीत इस उपचुनाव में दिलवा सकते हैं और रघु शर्मा नहीं।


नरेश राघानी

प्रधान संपादक

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