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ये अस्पताल है या आम रास्ता?

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December 7, 2017

कहने को यह साइलेंट जोन है और यहां हॉर्न बजाना मना है लेकिन प्रेशर हॉर्न गूंजते हैं। जहां वातावरण शांत होना चाहिए वहां वाहनों की रेलमपेल रहती है। यह नजारा है राजकीय अमृतकौर चिकित्सालय परिसर का जो अब आम रास्ता बन चुका है। हालात यह है कि दिनभर चिकित्सालय के मुख्य गेट के समीप से भारी वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। तेज गति से गुजरते वाहन हादसों को न्यौता देते हैं। मरीजों को परेशानी होती है सो अलग। इन सबके बावजूद न तो यातायात पुलिस इस ओर गंभीर है और न ही चिकित्सालय प्रशासन कोई कार्रवाई कर पा रहा है। 

चिकित्सालय परिसर के सामने से दिनभर भारी वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। हालांकि चिकित्सालय प्रशासन ने गेट के सामने वाहनों की रोकथाम के लिए पिल्लर लगाकर चैन लगाई  है। लेकिन यहां केवल एम्बुलेंस निकलने के लिए छोड़Þी जगह में से लोग वाहन निकालते हैं। कई बार तो वाहन चालक मुख्य गेट के पास ही अपना वाहन खड़ा देते है। इससे मरीजो एवं उनके साथ आने वाले परिजन को परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालात ये होते हैं कि वाहन चालक जल्दबाजी में निकलने के प्रयास के तेज प्रेशर हॉर्न का उपयोग करने से भी गुरेज नहीं करते है। इससे चिकित्सालय में भर्ती मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार तेज गति से गुजरते वाहनों से हादसे की आशंका रहती है।

निरीक्षण में जताई थी आपत्ति 

चिकित्सालय में चल रही कायाकल्प योजना का निरीक्षण करने ब्यावर आई टीम के सदस्यों ने भी चिकित्सालय परिसर में इस प्रकार वाहनों की आवाजाही पर ऐतराज जताया था। उन्होंने कहा कि यहां चिकित्सालय में आने वाले मरीजों के लिए ये वाहन चिकित्सा सुविधा में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। टीम ने वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने की जरूरत बताई थी। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया है।


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