RNI NO : RAJBIL/2013/50688
For News (24x7) : 9829070307

horizon hind news ajmer-youtube

10th Sep 18

ई - पेपर

Breaking News
राजीव गाँधी ब्रिगेड ने फुका प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी का पुतला |  4 दिनों में समझोते को राज्य सरकार ने नहीं किया लागू तो होता उग्र आन्दोलन |  स्थाई मान्यता की मांग कर रहे विधि महाविधालय के छात्रों ने फुका मुख्यमंत्री का पुतला |  वार्ड 60 की अमरदीप कॉलोनी की सड़क निर्माण कार्य का शिलान्यास |  30 द्विपक्षीय बैठकों में शामिल होंगी सुषमा, ब्रिक्स-सार्क देश के नेताओं से भी मिलेंगी |  महासभा में तीन महीने की बेटी के साथ पहुंची न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री, ऐसा पहली बार हुआ |  पितरों का तर्पण करने गए थे, फंस गए 500 श्रद्धालु |  घनश्याम तिवाड़ी आरक्षण का नया फॉर्मूला लाए |  जीप और मिनी बस की आमने सामने की टक्कर में चार की मौत, छह लोग हुए घायल |  हाथों में धर्म का कच्चा धागा बांधे युद्ध के मैदान में उतरे सियासी दल | 
madhukarkhin






फिल्म पद्मावती के शोर में दब गयी है सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस

Post Views 4

November 28, 2017

फिल्म पद्मावती के शोर में दब गयी है सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस की सुनवाई कर रहे दिवंगत न्यायाधीश लोया के परिजनों की आवाज़।

नरेश राघानी 

सुप्रसिद्ध सोहरबुदिन एनकाउंटर केस में एक नया खुलासा हुआ है। पिछले वर्षों में यह केस ढेर सारी सुर्खियां बटोर चुका है। जिस में तत्कालीन गुजरात सरकार के गृह मंत्री और वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को गृह मंत्री की कुर्सी से हाथ धोना पड़ा था। 
तत्पश्चात इस केस को निष्पक्षता बनाये रखने की के मंतव्य से महाराष्ट्र कि सीबीआई कोर्ट में स्थांतरित करवा दिया गया और सुनवाई सीबीआई की विशेष अदालत में जस्टिस बृजगोपाल हरिकिशन लोया की कोर्ट में हुई ।
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में साफ-साफ ग्रह मंत्रालय गुजरात सरकार, राजस्थान पुलिस के कुछ अफसरों और गुजरात के कुछ आईपीएस अफसरों के तालमेल से इस फर्जी एनकाउंटर के होने का वृतांत पेश किया। जिस पर सुनवाई कई वर्ष तक चलती रही । आपको एक चीज बता देने योग्य है कि सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार अपराधी सोहराबुद्दीन खुद ही गुजरात के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के दम पर फिरौती वसूलने जैसा जघन्य अपराध अंजाम लाता था । परंतु कुछ समय बाद यह बातें ज्यादा ही जग-जाहिर हो जाने के बाद वह वरदहस्त सौराहबुद्दीन को प्राप्त होना बंद हो गया और गुजरात सरकार पर जब सार्वजनिक रूप से सवाल उठने लगे की गुजरात पुलिस इस तरह का कृत्य न जाने किसकी शह पर कर रही है । तब गृह मंत्रालय और पुलिस अफसरों की मिलीभगत से सोहराबुद्दीन को गिरफ्तार कर राज़ खुलने के डर से रास्ते से हटाने की मंतव्य से एनकाउंटर करके मरवा दिया। उसके साथी तुलसी प्रजापति को भी कुछ समय थोड़ी रियायत देकर सरकारी गवाह बना लिया गया तत्पश्चात सबूत मिटाने के लिहाज से पुनः किसी और केस में उठाकर उसका भी एनकाउंटर कर दिया गया
कुछ समय बाद महाराष्ट्र की विशेष सीबीआई कोर्ट में सुनवाई कर रहे न्यायाधीश बृजगोपाल हरकिशन लोया की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गयी। उनकी मृत्यु के एक महीने के अंतराल में ही कोर्ट में नए न्यायाधीश की नियुक्ति हुई और अमित शाह को सीबीआई कोर्ट ने क्लीन चिट दे दी।

दो दिन पहले नई दिल्ली प्रेस की कारवान मैगजीन ने एक खुलासा किया जिसके अनुसार लोया के परिजनों ने अपने दिए गए इंटरव्यू में तत्कालीन मुम्बई हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस। मोहित शाह पर गंभीर आरोप लगाए हैं ।जस्टिस लोया की बहन ने यह बताया कि उनके दिवांगत भाई को मृत्यु से कुछ दिन पहले 1000 करोड़ रुपए की रिश्वत और मुंबई में मकान का प्रलोभन मोहित शाह द्वारा दिया गया था जिसके फलस्वरूप उन पर अमित शाह को क्लीनचिट देने हेतु दबाव डाला गया । जस्टिस लोया के ना करने पर उन पर दबाव भी बनाया गया जिसके चलते जस्टिस लोया तनाव में रहने लगे थे। यह बात लोया ने अपने मरने से 15 दिन पहले अपने परिजनों से कही थी।
जब लोया को दिल का दौरा पड़ा और उनकी मृत्यु हुई तो वह अन्य दो सहयोगी जजों के साथ रवि भवन पर रुके हुए थे ।यह खबर और लोया का मोबाइल सुबह एक RSS के नेता ने ही उन्हें ला कर दिया जो कि फॉर्मेट हो चुका था ।ताकि बातचीत की कोई भी जानकारी न मिल सके ।
30 दिन के अंदर ही अमित शाह को जब क्लीन चिट दी गयी ,उस समय देश का मीडिया सिर्फ नीचे पट्टी चलाकर इतिश्री कर रहा था। क्योंकि देश का पूरा ध्यान महेंद्र सिंह धोनी की परफॉर्मेंस और क्रिकेट पर था। कुछ ऐसा ही माहौल आज भी है जहां सारे चैनल सिर्फ पद्मावती फिल्म का विवाद डिस्कस कर रहे हैं, वहीं पर एक दिवंगत ईमानदार न्यायाधीश के परिवार के द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों को मीडिया तवज्जो नहीं दिखा पा रहा। अब क्या इसे इस देश की बदकिस्मती कहें या उस ईमानदार जज के परिवार की ? क्योंकि जब भी सत्तारूढ़ लोगों से जुड़े मुकदमों पर कोई बड़ा खुलासा होता है तो अचानक ऐसी कोई और बड़ी घटना घटित हो जाती है कि सारा मीडिया तंत्र बस वही दिखाने लगता है ।
एक न्यायिक आदेश पारित कर इस मामले की सुनवाई शुरू से लेकर अंत तक एक ही न्यायाधीश से करवाने की बात भी सामने आती है जिसकी पालना नहीं कि गयी । और लोया के समक्ष सुनवाई होने से उनकी ईमानदारी इस केस से जुड़े लोगों को राहत पहुचाने में सबसे बड़ी बाधक थी।
जिसके तहत लोया का जिंदा रहना अमित शाह को कभी भी क्लीन चिट नहीं दिलवा सकता था ।
अब सत्य चाहे कुछ भी हो परंतु एक इमानदार न्यायाधीश की मृत्यु की निष्पक्ष जांच करवाना उस दिवांगत आत्मा का हक़ है । परंतु यहां ऐसा इसलिए नहीं होता नजर आ रहा क्योंकि सारे देश का मीडिया पद्मावती फ़िल्म की खबरों के ज्वार से दबा हुआ है परंतु एक इमानदार न्यायिक अधिकारी के परिवार की पीड़ा सुनने का और लोगों तक पहुंचाने का आज की मीडिया के पास टाइम नहीं है।

Latest News

September 25, 2018

राजीव गाँधी ब्रिगेड ने फुका प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी का पुतला

Read More

September 25, 2018

4 दिनों में समझोते को राज्य सरकार ने नहीं किया लागू तो होता उग्र आन्दोलन

Read More

September 25, 2018

स्थाई मान्यता की मांग कर रहे विधि महाविधालय के छात्रों ने फुका मुख्यमंत्री का पुतला

Read More

September 25, 2018

वार्ड 60 की अमरदीप कॉलोनी की सड़क निर्माण कार्य का शिलान्यास

Read More

September 25, 2018

30 द्विपक्षीय बैठकों में शामिल होंगी सुषमा, ब्रिक्स-सार्क देश के नेताओं से भी मिलेंगी

Read More

September 25, 2018

महासभा में तीन महीने की बेटी के साथ पहुंची न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री, ऐसा पहली बार हुआ

Read More

September 25, 2018

पितरों का तर्पण करने गए थे, फंस गए 500 श्रद्धालु

Read More

September 25, 2018

घनश्याम तिवाड़ी आरक्षण का नया फॉर्मूला लाए

Read More

September 25, 2018

जीप और मिनी बस की आमने सामने की टक्कर में चार की मौत, छह लोग हुए घायल

Read More

September 25, 2018

हाथों में धर्म का कच्चा धागा बांधे युद्ध के मैदान में उतरे सियासी दल

Read More