इस बंगले के मालिक रहे श्रीशंकर तिवारी और उनकी पत्नी इंदू, बच्चन फैमिली से इतना चिढ़ते क्यों थे?

- पांडेय बताते हैं, बंगले के मालिक तिवारी और उनकी पत्नी इंदू दोनों बच्चन परिवार से चिढ़ते थे। बच्चन फैमिली की वजह से ही बंगले के गेट उनके लिए बंद हो गए।

- "उनके परिवार का इस बंगले से रिश्ता सिर्फ किराएदार का था। 1956-57 में बच्चन परिवार दिल्ली शिफ्ट हो गया, इसके बाद ही उनका इस घर से रिश्ता खत्म हो गया। फिर भी वो इसे अपना बताने की कोशिश करते रहे। यही बात तिवारी जी और उनकी पत्नी को बुरी लगती थी।"

आखिर ऐसा क्या हुआ कि रिश्ते तल्ख हुए?

- पांडेय कहते हैं- '1984 में अमिताभ कांग्रेस के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ रहे थे। उस समय श्रीशंकर तिवारी भी कांग्रेस के नेता थे। उन्होंने राजीव गांधी के अनुरोध पर एक रात बच्चन फैमिली को खाने के लिए बंगले पर बुलाया। दोनों फैमिली खाने की टेबल पर बैठी थीं। उस दौरान तेजी बच्चन ने एक प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा- तिवारी जी, आप इस बंगले को बेचने के बारे में विचार कर रहे हों तो मैं इसे लेना चाहूंगी।'

- उन्होंने आगे बताया- 'यह सुनकर तिवारी जी तो कुछ नहीं बोले, लेकिन इंदू तिवारी गुस्सा गईं। उन्होंने कहा- आईंदा इस बारे में कतई बात मत करना। आपकी जितनी भी संपत्ति हो, उसकी कीमत बोलो, यहीं बैठे-बैठे मैं सब खरीद लूंगी। ये जवाब सुनकर बच्चन फैमिली ही नहीं, खुद तिवारी जी भी शॉक्ड रह गए थे।'

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इस बंगले के मालिक रहे श्रीशंकर तिवारी और उनकी पत्नी इंदू, बच्चन फैमिली से इतना चिढ़ते क्यों थे?

- पांडेय बताते हैं, बंगले के मालिक तिवारी और उनकी पत्नी इंदू दोनों बच्चन परिवार से चिढ़ते थे। बच्चन फैमिली की वजह से ही बंगले के गेट उनके लिए बंद हो गए।

- "उनके परिवार का इस बंगले से रिश्ता सिर्फ किराएदार का था। 1956-57 में बच्चन परिवार दिल्ली शिफ्ट हो गया, इसके बाद ही उनका इस घर से रिश्ता खत्म हो गया। फिर भी वो इसे अपना बताने की कोशिश करते रहे। यही बात तिवारी जी और उनकी पत्नी को बुरी लगती थी।"

आखिर ऐसा क्या हुआ कि रिश्ते तल्ख हुए?

- पांडेय कहते हैं- '1984 में अमिताभ कांग्रेस के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ रहे थे। उस समय श्रीशंकर तिवारी भी कांग्रेस के नेता थे। उन्होंने राजीव गांधी के अनुरोध पर एक रात बच्चन फैमिली को खाने के लिए बंगले पर बुलाया। दोनों फैमिली खाने की टेबल पर बैठी थीं। उस दौरान तेजी बच्चन ने एक प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा- तिवारी जी, आप इस बंगले को बेचने के बारे में विचार कर रहे हों तो मैं इसे लेना चाहूंगी।'

- उन्होंने आगे बताया- 'यह सुनकर तिवारी जी तो कुछ नहीं बोले, लेकिन इंदू तिवारी गुस्सा गईं। उन्होंने कहा- आईंदा इस बारे में कतई बात मत करना। आपकी जितनी भी संपत्ति हो, उसकी कीमत बोलो, यहीं बैठे-बैठे मैं सब खरीद लूंगी। ये जवाब सुनकर बच्चन फैमिली ही नहीं, खुद तिवारी जी भी शॉक्ड रह गए थे।'

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जहां अमिताभ का बचपन बीता, केयरटेकर ने बताया बंगले में उनकी एंट्री पर रोक क्यों?

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October 11, 2017

 आज 75th बर्थडे मना रहे अमिताभ बच्चन का बचपन इलाहाबाद में बीता था। यहां सिविल लाइंस के 17 क्लाइव रोड के बंगले में उनका परिवार रहता था। हाल ही में यह सुर्खियों में तब आया जब बीते 5 अगस्त को अभिषेक-ऐश्वर्या यहां आए। वे दोनों 20 मिनट गेट पर खड़े रहे। लेकिन उन्हें बंगले में बिना एंट्री के लौटना पड़ा। इस बंगले से अमिताभ का मौजूदा जुड़ाव किस तरह का है और अभिषेक-ऐश्वर्या की यहां एंट्री क्यों नहीं हो सकी, इस बारे में जानने के लिए DainikBhaskar.com ने बंगले के केयर टेकर एडवोकेट केके पांडेय से बातचीत की। उन्होंने बताया कि आखिर क्यों बच्चन फैमिली और इस बंगले के मालिक के बीच विवाद खड़ा हुआ था? अमिताभ इस बंगले में कब रहे?

- अमिताभ के पिता हरिवंश राय बच्चन 1939 में कटघर वाले मकान को छोड़कर क्लाइव रोड स्थित बंगले में किराए पर रहने आ गए। अमिताभ का जन्म 1942 में हुआ। बच्चन परिवार इस बंगले में 1956 तक रहा।

- इस बंगले (फूल वाले बंगले) में तीन बड़े कमरे हैं। दरवाजे, खिड़की और रोशनदान मिलाकर दस दरवाजे हैं। इस वजह से इसे 10 द्वार वाला बंगला भी कहा जाता है।

कौन था बंगले का मालिक और अब कौन करता है देखरेख?

- बंगले के मालिक श्रीशंकर तिवारी थे। वे वकील थे। कांग्रेस के टिकट पर इटावा से सांसद भी बने थे। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के परिवार से इनके अच्छे रिश्ते थे।

- इस बंगले में अब कोई नहीं रहता। यहां ताला लगा है। इसकी देखभाल अब ट्रस्ट के मैंबर और वकील केके पांडेय करते हैं। पांडेय, श्रीशंकर तिवारी के पड़ोसी थे। तिवारी ने ही पांडेय को बंगले की देखरेख की जिम्मेदारी दी थी। तिवारी का निधन हो चुका है।

कैसे सुर्खियों में आया यह बंगला? क्यों नहीं मिली अभिषेक-ऐश्वर्या को एंट्री?

- 5 अगस्त को अभिषेक-ऐश्वर्या को इस बंगले में घुसने नहीं दिया गया था। इस बारे में पूछे जाने पर पांडेय ने DainikBhaskar.com को बताया- यह बंगला ट्रस्ट का है।

- "उन्होंने आने से पहले ना तो कोई सूचना दी थी और न बंगला देखने के लिए परमिशन मांगी थी। क्या इलाहाबाद का कोई व्यक्ति बच्चन परिवार से बिना किसी अप्वॉइंटमेंट के मिल सकता है? नहीं ना? इसलिए ट्रस्ट के लोगों की परमिशन के बिना उन्हें अंदर नहीं जाने दिया जा सकता था।"

इस बंगले के मालिक रहे श्रीशंकर तिवारी और उनकी पत्नी इंदू, बच्चन फैमिली से इतना चिढ़ते क्यों थे?

- पांडेय बताते हैं, बंगले के मालिक तिवारी और उनकी पत्नी इंदू दोनों बच्चन परिवार से चिढ़ते थे। बच्चन फैमिली की वजह से ही बंगले के गेट उनके लिए बंद हो गए।

- "उनके परिवार का इस बंगले से रिश्ता सिर्फ किराएदार का था। 1956-57 में बच्चन परिवार दिल्ली शिफ्ट हो गया, इसके बाद ही उनका इस घर से रिश्ता खत्म हो गया। फिर भी वो इसे अपना बताने की कोशिश करते रहे। यही बात तिवारी जी और उनकी पत्नी को बुरी लगती थी।"

आखिर ऐसा क्या हुआ कि रिश्ते तल्ख हुए?

- पांडेय कहते हैं- '1984 में अमिताभ कांग्रेस के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ रहे थे। उस समय श्रीशंकर तिवारी भी कांग्रेस के नेता थे। उन्होंने राजीव गांधी के अनुरोध पर एक रात बच्चन फैमिली को खाने के लिए बंगले पर बुलाया। दोनों फैमिली खाने की टेबल पर बैठी थीं। उस दौरान तेजी बच्चन ने एक प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा- तिवारी जी, आप इस बंगले को बेचने के बारे में विचार कर रहे हों तो मैं इसे लेना चाहूंगी।'

- उन्होंने आगे बताया- 'यह सुनकर तिवारी जी तो कुछ नहीं बोले, लेकिन इंदू तिवारी गुस्सा गईं। उन्होंने कहा- आईंदा इस बारे में कतई बात मत करना। आपकी जितनी भी संपत्ति हो, उसकी कीमत बोलो, यहीं बैठे-बैठे मैं सब खरीद लूंगी। ये जवाब सुनकर बच्चन फैमिली ही नहीं, खुद तिवारी जी भी शॉक्ड रह गए थे।'

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