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Guest-writer News:

April 5, 2017

पुराने सांचे में नए शब्‍द का ढल जाना

बुरा नहीं है पुराने सांचे में नए शब्‍द का ढल जाना जब तक बनी रहे अर्थ पर नज़र शब्‍द पर विश्‍वास करना अच्‍छा है ...! बुरे के पास भी होते हैं अच्‍छे-अच्‍छे शब्‍द ... बुरे अर्थों के साथ बुरे शब्‍दों का इतिहास भी लिखा जा सकता है अच्‍छे शब्‍दों में एकमेक हो जाते हैं अच्‍छे और बुरे शब्‍द नीयत में घुलने के बाद ...! पानी हैं शब्‍द हर रंग के पीछे छिप जाते हैं उसी रंग का होकर जंग रंगों की होती है, पानी दोनों तरफ रहता है पानी होकर शब्‍द घुलता है और शब्‍द बहता है युद्धभूमि में रक्‍त के साथ ....! शब्‍द आग हैं लपलपाते हैं, जलते हैं और राख भी होते हैं आग से खेलने वाले खेलते हैं शब्‍द से हाथ जलते हैं उनके भी इनके भी आग से खेलोगे तो जलोगे ही जलने वाले के साथ नहीं, मुहावरे आग की दुहाई में आ खड़े होते हैं .... ! शब्‍द हवा हैं बाहर से भीतर जाते हैं और भीतर से आते हैं बाहर सांस पर होगी सब चर्चा, इस पर कभी बहस न होगी कि भीतर क्‍या गया, बाहर क्‍या आया हवा होकर बच जाते हैं शब्‍द लोकनिन्‍दा से ....! आकाश हैं शब्‍द फैलने पर आते हैं तो अनंत तक जाते हैं, न लौटने जितना दूर सिमटने पर आंख भर में सिमट जाते हैं उतने ही दिखते हैं अर्थ जितना देखती है आंख आंख के पीछे बना लेते हैं ठिकाना, देखेंगे शब्‍द, दिखेगी बस आंख ...! मिट्टी हो जाते हैं शब्‍द एक दिन भुरभुरा कर ढह जाता है अर्थ हवाओं में भटकते, लुओं में तपते, बारिशों में भीगते एक दिन लौट आते हैं शब्‍द मिट्टी के घर में मिट्टी सबका घर है, हवा का भी, पानी, आग और शब्‍द का भी ... ! दुख मत करना मिट्टी होना होता है सब कुछ आखिरी चरण में मिट्टी हो जाना अर्थ का टूट जाना भर है, शब्‍द का खत्‍म हो जाना नहीं शब्‍द गलता है, शब्‍द गलाकर ही रचे जाते हैं महाकाव्‍य देखो, वो जो बीज की दीवारें बेध कर अंकुआ रहा है हरा सा वह नया शब्‍द है ..... ! माया मृग

March 29, 2017

क्यूँ न सभी शहरों के पौराणिक नाम वापस वही रखे जाएँ

क्या आप जानते हैं कि हमारे देश, गाँव व शहरों के असली नाम क्या थे ? १. हिन्दुस्तान, इंडिया या भारत का असली नाम - आर्यावर्त्त ! २. कानपुर का असली नाम - कान्हापुर ! ३. दिल्ली का असली नाम - इन्द्रप्रस्थ ! ४. हैदराबाद का असली नाम - भाग्यनगर ! ५. इलाहाबाद का असली नाम - प्रयाग ! ६. औरंगाबाद का असली नाम - संभाजी नगर ! ७. भोपाल का असली नाम - भोजपाल ! ८. लखनऊ का असली नाम - लक्ष्मणपुरी ! ९. अहमदाबाद का असली नाम - कर्णावती ! १०. फैजाबाद का असली नाम - अवध ! ११. अलीगढ़ का असली नाम - हरिगढ़ ! १२. मिराज का असली नाम - शिव प्रदेश ! १३. मुजफ्फरनगर का असली नाम - लक्ष्मी नगर ! १४. शामली का असली नाम - श्यामली ! १५. रोहतक का असली नाम - रोहितासपुर ! १६. पोरबंदर का असली नाम - सुदामापुरी ! १७. पटना का असली नाम - पाटलीपुत्र ! १८. नांदेड का असली नाम - नंदीग्राम ! १९. आजमगढ का असली नाम - आर्यगढ़ ! २०. अजमेर का असली नाम - अजयमेरु ! २१. उज्जैन का असली नाम - अवंतिका ! २२. जमशेदपुर का असली नाम काली माटी ! २३. विशाखापट्टनम का असली नाम - विजात्रापश्म ! २४. गुवाहटी का असली नाम - गौहाटी ! २५. सुल्तानगँज का असली नाम - चम्पानगरी ! २६. बुरहानपुर का असली नाम - ब्रह्मपुर ! २७. इंदौर का असली नाम - इंदुर ! २८. नशरुलागंज का असली नाम - भीरुंदा ! २९. सोनीपत का असली नाम - स्वर्णप्रस्थ ! ३०. पानीपत का असली नाम - पर्णप्रस्थ ! ३१.बागपत का असली नाम - बागप्रस्थ ! ३२. उसामानाबाद का असली नाम - धाराशिव (महाराष्ट्र में) ! ३३. देवरिया का असली नाम - देवपुरी ! (उत्तर प्रदेश में) ३४. सुल्तानपुर का असली नाम - कुशभवनपुर ३५. लखीमपुर का असली नाम - लक्ष्मीपुर ! (उत्तर प्रदेश में) ये सभी नाम मुगलों, अंग्रेजों, ने बदले हैं । आज फिर से इन्हें अपने वास्तविक नामो में लाने कीे कोशिश की जाए तो श्रेष्ठ विचार है |

March 22, 2017

17 माह का बच्चा और महिला मिली स्वाईन फ्लू पाॅजिटिव

17 माह का बच्चा और महिला मिली स्वाईन फ्लू पाॅजिटिव स्वाईन फ्लू का मर्ज अजमेर में बढ़ता ही जा रहा है। बुधवार को अजमेर में एक डेढ साल का बच्चा और एक महिला स्वाईन फ्लू पाॅजिटिव मिले हैं। इसके साथ ही स्वाईन फ्लू पीड़ितों का आंकडा बढ़कर आठ हो गया है। स्वाईन फ्लू के बढ़ते मामलों से चिकित्सा विभाग भी चिंतित है।

March 8, 2017

घर से दफ्तर चूल्हे से चंदा तक, पुरुष संग अब दौड़े यह नार

घर से दफ्तर चूल्हे से चंदा तक, पुरुष संग अब दौड़े यह नार ...महिला दिवस है , शक्ति दिवस भी पुरुष नजरिया में हो और सुधार .....आज महिला दिवस की धूम पूरे भारत में गूंज रही है | धारणा यह है की यह दिन महिलाओं को उनकी क्षमता , समाजिक ,राजनीतिक व् आर्थिक तरक्की दिलाने व् उन महिलाओं को याद करने का दिन है जिन्होंने महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए अथक प्रयास किये | लेकिन बात करे यदि हम महिलाओं के अधिकारों व् उनकी शक्ति की तो अनादि काल से ही महिलाओ के अधिकारों और उनके सम्मान की तो पुरुष प्रधान समाज में यह चर्चा तब से अब तक होती आई है । लेकिन जो सम्मान उन्हें मिलना चाहिए था वो ना अनादि काल में भी नही मिला था और आज भी नही क्योकि जब बात है महिलाओ की सम्मान की तब उसके जीवन से जुड़े हर पुरुष के संम्मान को ठेस पहुँचती है अनादि काल से ही महिलाओ के मान को ही पुरुष का सम्मान समझ जाता रहा है सतयुग में सीता ने रावण राज्य में भी अपने मान को खोने न दिया वही उसके पति राम के राज्य में आकर एक पुरुष की विकृत मानसिकता ने सीता के मान पर सवाल खड़े कर दिए और उन्हें अपने पति के सामने ही अग्नि परीक्षा देनी पड़ी और आज भी महिलाओ के मान को ही पुरुष का सम्मान जाता है पुत्री का मान उसके पिता के सम्मान से , ब

March 7, 2017

तीखी बात/बुरा न मानो होली है!

अजमेर |सारे देश के गधे गुस्से से तमतमाये हुए हैं। यूपी के चुनावी संग्राम में जिस प्रकार गुजरात के गधों की असम्मानपूर्ण चर्चा की गई है यह पूरी वैशाखनंदन जाति का घनघोर अपमान है। जातीय अपमान के इस मुद्दे पर सम्पूर्ण गर्दभ जाति एक है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के गधे उद्वेलित हैं, विचलित हैं, अपमानित हैं। सौराष्ट्र से लेकर असम तक के गधे एक स्वर में अपना विरोध व्यक्त कर रहे हैं और प्रतिशोध लेने को आतुर हैं। यदि किसी नेता को यह गुमान हो कि गुजरात के गधों का अपमान करके वह किसी अन्य राज्य के गधों से अपने सम्बन्ध अच्छे बनाये रख सकेगा तो हम उसकी यह गलतफहमी शीघ्र ही दूर कर देंगे। हम राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलायेंगे और शीघ्र ही संसद का घेराव करेंगे। धोबी के गधे, कुम्हार के गधे, पहाड़ी खच्चर, मैदानी टट्टू और यहाँ तक कि हमारे ही बड़े भाई अर्थात् घोड़े भी हमारे साथ आने को तैयार हैं।




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