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HORIZON HIND NEWS - HEADLINES 18 OCT 2017 |  शिक्षक संघ राधा कृष्णनन ने मनाया स्थापना दिवस |  मगरा क्षेत्राीय विकास कार्यक्रम के तहत 90 लाख के 10 कार्यो की स्वीकृति जारी |  सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयन्ती राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप  में मनायी जाएगी |  दीपावली पर्व पर समस्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश |  नवीन स्वचालित दुग्ध प्रोसेसिंग प्लान्ट का शिलान्यास 22 को  |  रूप चौदस पर भारतीय और विदेशी युवतियोंं ने किया सोलह श्रृंगार |  बच्चे को चॉकलेट देकर बढ़ाई पहचान, मौका मिलते ही बाकी को बेहोश कर लूटा |  महंगाई की चपेट में आई दिवाली |  मन की बात ग्रुप के सदस्यों ने मनाई बेसहारा बच्चों के साथ दीपावली | 

dharatal NEWS :

October 11, 2017

आखिर सच हुआ सचिन पायलट का सपना ..

यूँ तो आज एअरपोर्ट के उदघाटन के साथ ही शहर यह मान कर बैठ गया है की एअरपोर्ट शुरू हो गया है लेकिन शायद इस शहर की भोली भाली जनता को यह पता नहीं है की कई ऐसे भी एअरपोर्ट तैयार और उद्घाटित हुए पड़े हुए हैं जो राजनेताओं के वादों को पूरा करने के लिए शुरू तो कर दिए गए लेकिन फिर विमानों में सीटें खाली रहने की वजह से बंद भी कर दिए गए | कुछ तो ऐसे भी है जिन पर बस उदघाटन का फीता काटने के पश्चात आज तक कोई विमान नहीं उतर पाया है क्यूंकि आर्थिक के अलावा और भी कई परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती है या कह लीजिये की उत्पन्न कर दी जाती है ताकि मुद्दे को और ज़रा लंबा खींचा जा सके | राजनेताओं और राजनीति की परम्परा रही है की कर्म कोई करे और फल किसी और को मिले | लेकिन यहाँ तो जनता ने सीधे सीधे मान और ठान रखा है की यह एअरपोर्ट केवल और केवल पूर्व सांसद सचिन पायलट की देंन है |और बात में दम भी बहुत है वर्ना क्या मजाल थी किसी की की पांच पांच बार सांसद रहते हुए भी सचिन पायलट के आने से पहले तक एअरपोर्ट के मुद्दे पर राजनीति के सिवा कुछ और काम किया हो |

September 9, 2017

अधूरा इन्साफ

बेशक वर्ष 1993 में हुए मुंबई बम विस्फोट कांड में कानून के हाथ धीरे-धीरे अपराधियों तक पहुंच रहे हैं, लेकिन यह सवाल हमारे सामने है कि 24 साल बाद न्यायिक प्रक्रिया का इस मुकाम तक पहुंचना कितने संतोष की बात हो सकता है? इस सामूहिक हत्याकांड के प्रमुख षड्यंत्रकारियों में से एक याकूब मेमन को सवा दो साल पहले फांसी दी गई थी। अब मुंबई के टाडा (आतंकवादी एवं विध्वंसकारी गतिविधि निरोधक कानून) कोर्ट ने दो और प्रमुख अपराधियों (ताहिर मर्चेंट और फिरोज खान) को सजा-ए-मौत सुनाई है। लेकिन मुंबई में अलग-अलग जगहों पर बम रखने की साजिश में दूसरे कई लोगों को शामिल करने और हमले के लिए सामान जुटाने वाला प्रमुख मुजरिम अबू सलेम कठोरतम सजा पाने से बच गया है। दरअसल, सलेम हमारी सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देते हुए भागकर पुर्तगाल चला गया था। वहां से उसका प्रत्यर्पण उसकी जिंदगी की गारंटी बन गया। यूरोपीय मानवाधिकार संधि के तहत पुर्तगाल ने उसे भारत को सौंपने के पहले मृत्युदंड ना देने की शर्त लगा दी। भारत उस शर्त से बंधा हुआ है। लेकिन इस कांड में मृत्युदंड पाने वाले दूसरे अपराधी इसे जरूर एक विसंगित के रूप में देखेंगे। टाडा कोर्ट ने अबू सलेम और करीमुल्लाह शेख को उम्रकैद की सजा सुनाई है। एक अन्य मुजरिम रियाज सिद्दीकी को 10 साल कैद की सजा सुनाई गई है। 

August 24, 2017

तीन तलाक - दशा और दिशा दोनों बदलेंगी

तीन तलाक - दशा और दिशा दोनों बदलेंगी

June 22, 2017

दो मंत्री, दो सांसद के होते पानी को तरस रहा है शहर

इसे अजमेर के लोगों का दुर्भागय ही कहेंगे। राजस्थान सरकार में अजमेर से दो विधायक मंत्री हैं। लोकसभा और राज्य सभा में सांसद भी अजमेर से है। इन सबके बावजूद शहर के कई हिस्सों के लोग पानी को तरस रहे हैं। इसे राजनैतिक इच्छा शक्ति की कमी या फिर जनता के प्रति संवेदनहीनता नहीं तो और क्या कहेंगे। शहर के कई हिस्सों में पिछले तीन दिनों से पानी की सामान्य सप्लाई नहीं हो रही है। लोगों को निजी स्तर पर पानी के टेंकर मंगवाकर अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। पानी टेंकरों की मनमानी भी लोगों को भारी पड़ रही है। जलदाय विभाग पूरी तरह नाकाम सा साबित हो रहा है।

June 7, 2017

कैसे रुके हाईवे पर मौत का तांडव

इन दिनों जिस तरफ देखो सभी ओर से हाईवे पर दुर्घटनाओं की जैसे बाड़ सी आ गयी है |सारे सोशल मीडिया पर चाहे वह फेसबुक हो या वाट्स अप्प या रोज़ सुबह आने वाला अखबार , हर रोज़  औसतन दो या चार ख़बरें पढ़ने को मिल जाती है की भीषण सड़क दुर्घटना में लोगों की तत्काल मृत्यु हो गयी | अब यह घटनाएं चाहे कहीं की भी हो या चाहे कितने भी लोग काल का ग्रास बन गए हो इन सभी दुर्घटनाओं में एक चीज़ सामान है और वह है भारी वाहन जैसे ट्रक ,ट्रोला ,डम्पर इत्यादि | माना अन्धेरा बहुत घना है पर दिया जलाना कहाँ मना है ... जय श्री कृष्णा

May 31, 2017

एक थी कांग्रेस .....

दरअसल कांग्रेस का आंतरिक ढांचा उनके युवराज के कुशल नेतृत्व में प्रयोग कर कर के इतना कमज़ोर हो चला है की अब यह अपने सेकुलरिज्म के मूल सिद्धांत से ही भटक गया है | जिसको जैसे समझ आ रहा है वो वैसे परिस्थिति के हिसाब से कांग्रेस  के मूल सिधान्तों की बलि खुले आम चढा  देता है |  इसका एक ताज़ा उदाहरण है अजमेर शहर कांग्रेस कमिटी द्वारा महराणा प्रताप जयंती मनाना | यह सचमुच पहली बार हुआ है की शहर कांग्रेस को महराणा प्रताप याद आये | जबकि सालो साल कांग्रेस में अपना योगदान दे चुके लोग अब तक इस सदमे से नहीं निकल पा रहे की    ये क्या था ...?.इधर जाऊं या उधर जाऊं बड़ी मुश्किल में हूँ किधर जाऊं ... वैसे तो यह पंक्तियाँ किसी गुमनाम शायर की अनमोल धरोहर हैं लेकिन आज कल यह देश की सबसे पुरानी लोकतांत्रिक पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर बिलकुल फिट बैठ रही है | मतलब कुछ भी .... हद हो चुकी है किसी बात की | राजनीति के चलते एक तरफ तो युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता केरल में एक प्रदर्शन के दौरान गौमांस खाते है और प्रदर्शन करते है और वहीँ  दूसरी ओर अजमेर में हिन्दू सम्राट महाराणा प्रताप की जयंती मनाने पहुँच जाते है | जैसे जनता और आम बुधीजिवी वर्ग  तो बेवकूफ ही है और ये समझ नहीं पायेगा की यह लोग आखिर चाहते  क्या  हैं ?  जवाब एक दम साफ़ है भाई ,और वह है सत्ता और केवल सत्ता | दरअसल नेता जात के ही कोई ईमान धरम नहीं है इस दुनिया में | भाजपा को ही देख लीजिये | जीवन भर भाजपा की सेवा करने वाला और भाजपा को भगवान् राम से जोड़ने वाला व्यक्ति जब अपनी सोच के दम पर भाजपा को सत्ता के द्वार पर लाकर खडा कर देता है तो उसी का वरिष्ठतम शिष्य उसे धीरे धीरे  परास्त करता हुआ ऐसे कगार पर ले आता है की वह भले ही वह खुद देश का प्रधान मंत्री बन जाए लेकिन अपने गुरु को बजाये देश का राष्ट्रपति बनाने के बस जेल न जाने देने की शर्त पर ही अपनी गुरु दक्षिणा की इति श्री कर लेता है | कांग्रेस में भी प्रदेश स्तर पर हालात कुछ ठीक नहीं हैं  | यहाँ भी इन दिनों कुछ भी  ...  होता हुआ दिखाई दे रहा है | गौरतलब है की राजस्थान प्रदेश कांग्रेस को इतने वर्षों से जिस तरह पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संभाल कर चलाया है वही अभी का प्रदेश नेतृत्व बस केंद्र में बैठे कांग्रेस युवराज का थोपा हुआ ही साबित होता नज़र आ रहा है | राजस्थान प्रदेश की आज की कांग्रेस में न तो वरिष्ठ और कनिष्ठ की समझ दिखाई देती है न ही कोई चमत्कारिक बात जिस से जनता झट से आंदोलित हो कर आगामी चुनाव में कांग्रेस को वोट दे बैठेगी | बस युवराज और उनके प्रिय राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष की आँखें मूँद कर जय जय कार करने वालों की भीड़ जमा है , जिनका विवेक उनको सच कहने की हिम्मत नहीं दे पा रहा है की दरअसल .... वर्तमान कर्णधार के पास न तो कोई जनाधार है ना ही राष्ट्रीय नेतृत्व को दी जाने वाली कोई सूची जिस से वह खुद पूर्ण रूप से आगामी चुनाव में जीत को लेकर संतुष्ट हों | कहने का मतबल यह है भैया की पूर्व मुख्यमंत्री के पास भी शायद तकरीबन 200 विधानसभा सीटों पर लगभग 300 से 350 मजबूत उम्मीदवार बचे हों जो सीना ठोक कर कह सकते हों की - हाँ हम साहब के आदमी हैं | |वर्तमान प्रदेषाध्यक्ष के पास तो ऐसे जांबाज लोगों का इस वक़्त टोटा ही नज़र आ रहा है | उनका स्कोर बोर्ड नहीं लगता की 120   मजबूत खिलाड़ियों से ज्यादा  होगा| और होगा भी तो वह सब कौनसा उनके साथ लम्बा जुड़े रहेंगे | | सो अपन इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं की ..... अपनेु मूल सिधान्तो से भटकी हुई कांग्रेस का अब इस देश में बहुत ज्यादा समय शेष नहीं रह गया है | जल्द ही हम लोग कहते सुनेंगे लोगों को की एक थी कांग्रेस .... कोई इंसान   नेतानागरी के वास्ते पशु नर एक समान ... श्री कृष्णं शरणम ममः

May 18, 2017

स्कूल के बाहर सुरा दरबार ... आँखें मूंद सोई सरकार

नियमों की आड़ में भारी भरकम बातें करने वाले सरकारी विभाग किस तरह से खुद ही नियमों को टाक  में रखे हुए हैं इसका किसी को उदहारण देखना हो तो आ जाए सीधा अजमेर | तात्कालिक आबकारी नियमों के अनुसार किसी भी ऐसे स्थान पर मदिरा का बेचान नहीं किया जा सकता जहां पर ३०० मीटर के दायरे में कोई भी शैक्षणिक संस्थान हो,धार्मिक स्थल हो अथवा भारी रिहाईशी इलाका हो जहां सैकड़ों मकान बने हुए हो

April 27, 2017

विदा हुए विनोद ...

भारतीय सिनेमा के मध्यकाल की भोर का तारा आज टूट गया .... नहीं रहे मशहूर नायक विनोद खन्ना विनोद अपने नाम की ही तरह स्वभाव से भी बहुत खुशगवार और जिंदादिल इंसान थे | उन्होंने भारतीय फिल्म जगत में वो कीर्तिमान स्थापित किये जो शायद ही आज के फिल्म जगत में अब कहीं देखने को मिलेंगे | पूरी दुनियां का अपने फन से दिल जीतने वाला सितारा आखिर अपने स्वस्थ्य की जंग हार गया विनोद खन्ना अपने आप में इस बात का उदाहरण है की चाहे आप कितने ही खूबसूरत है या कामयाब है आप को ईश इच्छा के आगे एक दिन घुटने टेकने ही पड़ते है|उनका व्यक्तित्व भारतीय फिल्म जगत के मध्यकाल में सबसे ज्यादा आकर्षक और अभिनय सबसे ज्यादा प्रभावशाली माना जाता है | ढलती उम्र में भी उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया और अंततः राजनीति के जगत में भी उनके व्यक्तित्व की अपनी ही छाप रही |अपने पारिवारिक दायित्वों का बखूभी निर्वाह करते हुए आखिर विदा हुए विनोद खन्ना |

April 3, 2017

भगवान् कृष्णा सब देख रहे हैं ...

एक पुराणिक कहावत है की - अल्प ज्ञान अती भयंकुरु अर्ताथ - कम ज्ञान बहुत खतरनाक वस्तु है | जो की इन दिनों साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा है जब एक सिरफिरा राजनेता भगवान् कृष्णा की तुलना एक काल्पनिक पात्र से करता है और उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री आदित्यनाथ योगी के महिला सुरक्षा को लेकर उठाये गए सराहनीय कदम को लेकर सोशल मीडिया पर यह कह बैठता है की - रोमियो ने तो एक महिला से प्यार किया था जबकि भगवान् कृष्णा ने १६००० महिलाओं से तो क्यूँ न एंटी रोमियो स्क्वाड का नाम एंटी कृष्णा स्क्वाड रख दिया जाए | यह साफ़ दर्शाता है की इस देश में राजनेताओं की अपनी ही संस्कृति को लेकर समझ कितनी पानी में है | शायद वह महानुभाव यह भूल गए की भगवान् कृष्णा ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया और इसके पीछे कौनसी लोक कल्याण की भावना थी | भगवत पुराण में इस प्रसंग को लेकर साफ़ साफ़ लिखा है जब दैत्य नरकासुर ने तीनो लोकों में त्राहि त्राहि मचाते हुए देवताओं के रजा इंद्र की माता अदिति के कुंडल चुरा लिए और पृथ्वी लोक के राजाओं को परास्त कर उमकी १६००० बेटियां हरण कर अपने साथ मणिपर्वत ले गया तब देवराज इंद्र भगवान्स कृष्णा के पास पहुंचे और उनसे रक्षा की गुहार की | जिस पर भगवान् कृष्णा और सत्यभामा गरुड़ पर सवार होकर मणिपर्वत पहुंचे और नरकासुर का वध कर सभी १६००० स्त्रियों को उसके कब्जे से आज़ाद किया |सभी स्त्रीयों ने यह कह कर भगवान् कृष्णा से गुहार की और विनती करते हुए कहा की अब हम सभी को पृथ्वीलोक में जाकर पुरे समाज का सामना करना पड़ेगा और हमें कोई भी स्वीकार नहीं करेगा क्योंकि हम एक असुर द्वारा हरण कर लायी गयी है और हमें समाज गलत द्रिष्टी से देखेगा |जिस पर भगवान् कृष्णा ने उन सभी को अपना नाम देकर लोकलज्जा से रक्षा करने के मंतव्य से अपनी पत्नीयां स्वीकार किया | ऐसी स्वच्छ भावना की तुलना एक अंग्रेज़ी प्रेमकथा से कर इस तरह का निर्लज बयान देना बहुत शर्मनाक है |बिना पूर्ण ज्ञान के बस राजनीति चमकाने के लिए इतना गैर जिम्मेदाराना बयान देना भला कहाँ तक वाजिब है ? वैसे भी रोमियो जूलिएट को आज तक उनके अपने ही देश में भगवान् यीशु के समकक्ष दर्जा प्राप्त नहीं है, जबकि भगवान् कृष्णा को पूरा विश्व लार्ड कृष्णा कह कर ही संबोधित करता है | यानी की भगवान् कृष्णा की तुलना विलियम शेक्सपीयर के एक काल्पनिक पात्र से करना तो शायद शेक्सपीयर के खुद के देश में भी संभव नहीं होगा | फिर भी हमारे समझदार राजनेता ऐसा चमत्कार इस देश में इसीलिए कर पाते हैं क्यूंकि यहाँ पर क़ानून व्यवस्था बड़ी लचर है और बड़ी आसानी से इस तरह के लोग कुछ भी बकवास कर के लाखों लोगो का दिल दुखाने में सक्षम हैं | और क्यूँ न हो जब ऐसी बात करने वाला खुद ही कानून का खिलाड़ी है | अंत में गाज़ियाबाद निवासी मुकेश मित्तल को इस सिरफिरे को थप्पड़ मारने वाले को एक लाख रुपया इनाम देने की घोषणा हेतु साधुवाद दिए बिना इस लेख का कोई महत्त्व नहीं होगा |और बहुत जल्द ही उनकी इस पुनीत पहल का पूरा देश स्वागत करता नज़र आएगा | खैर जो भी हो भगवान् कृष्णा सब कुछ बड़ी सरलता से देख रहे है और शीघ्र ही इस समझदार प्राणी का इलाज खुद ब खुद होता हुआ दिखाई देगा |

March 15, 2017

बादशाह हो या सम्राट - क्या किसी को फर्क पड़ता है ?

भाजपा और उनके वरिष्ठ जन आज कल अजमेर की धरा को इतिहास की प्रयोगशाला समझ कर इतिहास की पुनः रचना में जुटे हुए है |कभी अकबर के किले को अजमेर का किला तो कभी बादशाह की सवारी को सम्राट अशोक की सवारी का नामान्तारण खुले आम किया जा रहा है | मेयर धर्मेन्द्र गहलोत तो मीडिया के सम्मुख खुद सम्राट जैसा गणवेश धारण कर नगर निगम में अपनी कुर्सी पर बैठ कर मे यह दावा करते सुनाई देते हैं की सम्राट पुराणिक अजयमेरु नगर में अपनी प्रजा के साथ होली खेलने के लिए निकलते थे और जनता भी रंगों में सराबोर होकर भरपूर आनंद लेती थी | जहां तक आनंद का सवाल है तो आनंद तो लोग आज भी ले रहे हैं बादशाह की सवारी का लेकिन उस आनंद के बीच इतिहास के साथ जो छेडछाड हो रही है वह बहुत शर्मनाक है |

March 9, 2017

बिहारी गंज में स्थित देवेन्द्र गुप्ता का बंद पड़ा मकान उठा सकता है कई रहस्यों से पर्दा ....

बिहारी गंज में स्थित देवेन्द्र गुप्ता का बंद पड़ा मकान उठा सकता है कई रहस्यों से पर्दा ....देवेद्र गुप्ता इस बात से बिलकुल इतेफाक नही रखता था. देवेन्द्र गुप्ता का परिचय दें तो देवेन्द्र एक मध्यम तबके के परिवार का एक लड़का जो की आम बच्चों की तरह शहर की गलियों में मस्ती करता था ,जैसे सभी बच्चे रहते है वैसे ही रहता था. उसके पिता परचून की दुकान चला के घर का गुजारा करता थे. आम आदमी को देश के प्रति सम्मान होता है और देश के लिए कुछ भी करने का भाव होता है पर देवेन्द्र में इससे थोडा ज्यादा अपनी संस्कृति को बचाने और हिंदुत्व के लिए कुछ भी करने का जूनून सवार था| उसका आर एस एस से जुड़ना समाज में हिंदुत्व के प्रति सबको सजग करना ध्येय था

March 4, 2017

ये अवामे अजमेर है और सब जानती है ...

अजमेर से विधायक और राजस्थान सरकार के शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी को एक ख़त मिला जिसमें किसी सिरफिरे ने उन्हें देख लेने की धमकी दे डाली | नाराज़गी थी की देवनानी ने नया बाज़ार स्थित अकबर के किले का नाम अपने प्रभाव का इस्तमाल कर अजमेर का किला रख दिया है |लिखने वाले न स्पष्ट रूप से अपनी पहचान ज़ाहिर की न ही पता बस तरन्नुम चिश्ती मुल्क की खादिम लिख कर जो मन में आया वैसी ही भड़ास निकाल ली |



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